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US हमले से पहले मादुरो ने क्यों ठुकराया पुतिन का ऑफर? और भी देश आए थे मदद करने, किसी की नहीं मानी

अमेरिकी सेना ने काराकास में हमला करके मादुरो को उनकी बीवी समेत उठाकर न्यूयार्क लेकर चले गए थे. जब हमला किया गया तो मादुरो अपनी बीवी के साथ अपने महल में सो रहे थे.

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Edited By : Arif Khan Updated: Jan 10, 2026 15:13
मादुरो पर न्यूयार्क में मुकदमा चलाया जाएगा.

वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की मदद के लिए अमेरिकी हमले से पहले रूस समेत कई देश आगे आए थे. उन्हें सुरक्षित देश छोड़कर निकलने के लिए कई देशों ने ऑफर दिये थे, लेकिन उन्होंने ऑफर ठुकरा दिए थे. ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मादुरो को रूस में शरण का प्रस्ताव भी मिला था, लेकिन उन्होंने अंत तक सत्ता नहीं छोड़ने की जिद पकड़ी रखी. रिपोर्ट में सरकारी दस्तावेजों के हवाले से लिखा गया है कि क्रिसमस की पूर्व संध्या पर वेटिकन के सेक्रेट्री ऑफ स्टेट कार्डिनल पिएत्रो पारोलिन ने अमेरिकी राजदूत ब्रायन बर्च के साथ एक जरूरी बैठक की थी. पारोलिन ने यह जानने की कोशिश की थी कि क्या अमेरिका केवल ड्रग तस्करों को निशाना बना रहा है या उसका मकसद तख्तापलट है.

रूस का ठुकरा दिया ऑफर

कार्डिनल ने वेनेजुएला में अस्थिरता को रोकने के लिए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से संपर्क करने की कई दिन कोशिश की थी. बर्च के साथ चर्चा के दौरान कार्डिनल ने संकेत दिए कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मादुरो को सुरक्षा की गारंटी के साथ अपने यहां शरण देने के लिए तैयार था. रूस ने प्रस्ताव दिया था कि मादुरो वेनेजुएला छोड़ दें और अपनी संपत्ति के साथ यहां सुरक्षित जीवन जिएं. लेकिन मादुरो ने यह ऑफर ठुकरा दिया. इसके एक सप्ताह बाद अमेरिकी सेना काराकास में हमला करके मादुरो और उनकी बीवी को पकड़कर न्यूयार्क ले गई. जहां उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा रहा है.

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यह भी पढ़ें : मादुरो के बाद क्या अब पुतिन की बारी? जेलेंस्की के सवाल पर डोनाल्ड ट्रंप ने दिया दो टूक जवाब

मादुरो को देश से बाहर निकालने और मिलिट्री दखल से बचने के लिए इंटरनेशनल लेवल पर बहुत कोशिशें की गईं. रूस के अलावा, कतर, तुर्किए और भी कई देश और लोगों ने US ऑपरेशन से पहले मादुरो के लिए एक सुरक्षित जगह ढूंढने की कोशिश की थी. ब्राजील के अरबपति जोसली बतिस्ता जैसे बिचौलियों के जरिए भी बातचीत करवाई गई. लेकिन मादुरो ने किसी की बात नहीं मानी.

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ट्रंप की चेतावनी को हल्के में लिया

नवंबर 2025 में डोनाल्ड ट्रंप और मादुरो के बीच एक फोन कॉल हुई थी, जिसे मादुरो ने सकारात्मक समझा. हालांकि, व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि उनके पास दो रास्ते हैं – आसानी या मुश्किल. मादुरो ने इस चेतावनी को नजरअंदाज किया और इस गलतफहमी में रहे कि वे अगले चुनाव तक टिके रहेंगे.

यह भी पढ़ें : तेल टैंकर फुल और तिजोरी खाली, कैसे वेनेजुएला को मजबूर कर रहा अमेरिका? चीन-रूस से नाता तोड़ने की रखी शर्त

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मादुरो की डिप्टी पर ट्रंप का भरोसा

एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो के बजाय मादुरो की डिप्टी डेल्सी रोड्रिगेज के साथ काम करने को प्राथमिकता दी. CIA की एक गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार, मादुरो के वफादार तंत्र को चलाने में रोड्रिगेज अधिक सक्षम थींय. रोड्रिगेज को ‘व्यावहारिक’ माना गया, जो अमेरिकी विरोधी विचारधारा में नहीं फंसी थीं. मादुरो के हटने के बाद अब रोड्रिगेज ने सत्ता संभाल ली है. उन्होंने राजनीतिक कैदियों को रिहा करने और अमेरिका को तेल निर्यात फिर से शुरू करने का समझौता किया है, जिससे व्हाइट हाउस का उन पर भरोसा और बढ़ गया है.

First published on: Jan 10, 2026 03:13 PM

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