Iran America Peace Agreement: ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव को खत्म करने के लिए जिस शांति समझौते की उम्मीद की जा रही थी, वह अब अधर में लटकता नजर आ रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कुछ नई और बेहद सख्त शर्तों की वजह से इस ऐतिहासिक समझौते पर दस्तखत अटक गए हैं. इन शर्तों के सामने आने के बाद अब समझौते की समय-सीमा को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है.
- अब्राहम अकॉर्ड्स की नई शर्त
शांति समझौते के रास्ते में सबसे पहला और बड़ा अड़ंगा डोनाल्ड ट्रंप की वह मांग है, जिसमें उन्होंने युद्धविराम के दायरे को बढ़ा दिया है. ट्रंप का कहना है कि इस शांति समझौते और युद्धविराम के लिए सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन जैसे प्रमुख मुस्लिम देशों को 'अब्राहम अकॉर्ड्स' पर दस्तखत करने होंगे. हालांकि, पेंच यह है कि ये मुस्लिम देश फिलहाल इजरायल के साथ किसी भी तरह का राजनयिक या औपचारिक संबंध कायम करने के लिए तैयार नहीं हैं. इस शर्त ने बातचीत को पूरी तरह उलझा दिया है.
- एनरिच्ड यूरेनियम पर अड़े ट्रंप
दूसरा बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को लेकर खड़ा हुआ है. पहले दोनों पक्षों के बीच इस संवेदनशील प्रक्रिया को निपटाने के लिए 30 से 60 दिनों का समय तय किया गया था. लेकिन अब ट्रंप ने इस पर अभी से फाइनल फैसला मनवाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है, जिससे ईरान असहज है.
- यूरेनियम तुरंत सौंपने या नष्ट करने का अल्टीमेटम
ट्रंप ने इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी शेयर की है. अपनी पोस्ट में उन्होंने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए लिखा है कि ईरान अपना सारा संवर्धित यूरेनियम या तो तुरंत अमेरिका को सौंप दे या फिर अमेरिका के साथ तालमेल बिठाकर उसे पूरी तरह नष्ट कर दे.
डोनाल्ड ट्रंप के इस कड़े और आक्रामक रुख के कारण शांति समझौते की टेबल पर बात आगे नहीं बढ़ पा रही है. दोनों देशों के बीच महीनों की कूटनीतिक मेहनत के बाद तैयार हुआ यह मसौदा अब इन शर्तों के कारण खटाई में पड़ता दिख रहा है.
Iran America Peace Agreement: ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव को खत्म करने के लिए जिस शांति समझौते की उम्मीद की जा रही थी, वह अब अधर में लटकता नजर आ रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कुछ नई और बेहद सख्त शर्तों की वजह से इस ऐतिहासिक समझौते पर दस्तखत अटक गए हैं. इन शर्तों के सामने आने के बाद अब समझौते की समय-सीमा को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है.
- अब्राहम अकॉर्ड्स की नई शर्त
शांति समझौते के रास्ते में सबसे पहला और बड़ा अड़ंगा डोनाल्ड ट्रंप की वह मांग है, जिसमें उन्होंने युद्धविराम के दायरे को बढ़ा दिया है. ट्रंप का कहना है कि इस शांति समझौते और युद्धविराम के लिए सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन जैसे प्रमुख मुस्लिम देशों को ‘अब्राहम अकॉर्ड्स’ पर दस्तखत करने होंगे. हालांकि, पेंच यह है कि ये मुस्लिम देश फिलहाल इजरायल के साथ किसी भी तरह का राजनयिक या औपचारिक संबंध कायम करने के लिए तैयार नहीं हैं. इस शर्त ने बातचीत को पूरी तरह उलझा दिया है.
- एनरिच्ड यूरेनियम पर अड़े ट्रंप
दूसरा बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को लेकर खड़ा हुआ है. पहले दोनों पक्षों के बीच इस संवेदनशील प्रक्रिया को निपटाने के लिए 30 से 60 दिनों का समय तय किया गया था. लेकिन अब ट्रंप ने इस पर अभी से फाइनल फैसला मनवाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है, जिससे ईरान असहज है.
- यूरेनियम तुरंत सौंपने या नष्ट करने का अल्टीमेटम
ट्रंप ने इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी शेयर की है. अपनी पोस्ट में उन्होंने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए लिखा है कि ईरान अपना सारा संवर्धित यूरेनियम या तो तुरंत अमेरिका को सौंप दे या फिर अमेरिका के साथ तालमेल बिठाकर उसे पूरी तरह नष्ट कर दे.
डोनाल्ड ट्रंप के इस कड़े और आक्रामक रुख के कारण शांति समझौते की टेबल पर बात आगे नहीं बढ़ पा रही है. दोनों देशों के बीच महीनों की कूटनीतिक मेहनत के बाद तैयार हुआ यह मसौदा अब इन शर्तों के कारण खटाई में पड़ता दिख रहा है.