वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके घर से उठाकर न्यूयॉर्क की जेल में डालने के बाद अब सब की नजर इस पर है कि अमेरिका का अगला निशाना कौन होगा. अमेरिका और रूस के रिश्तों पर भी दूसरे देशों की नजर है. क्योंकि रूस हमेशा वेनेजुएला का सहयोगी रहा है. रूस ने अमेरिका की इस कार्रवाई का भी विरोध किया था. हाल ही अमेरिका ने रूस का झंडा लगे एक टैंकर को भी समुद्र में जब्त कर लिया था.
इसके अलावा यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने मांग की है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी उठाने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऐसा ही प्लान बनाएं. हालांकि, ट्रंप ने जेलेंस्की के सुझाव से असहमति जताई है. ट्रंप ने कहा कि पुतिन के खिलाफ ऐसी कार्रवाई जरूरी नहीं है. बेशक वह रूसी राष्ट्रपति से बेहद निराश हैं.
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मादुरो की गिरफ्तारी के बाद जेलेंस्की ने परोक्ष रूप से पुतिन का जिक्र करते हुए कहा था कि यदि तानाशाह के साथ ऐसा ही व्यवहार किया जाना चाहिए, तो ‘अमेरिका जानता है कि आगे क्या करना है.’
जब ट्रंप से इस बारे में पूछा गया कि क्या वे पुतिन को पकड़ने का आदेश देंगे, तो उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि इसकी जरूरत होगी. मुझे लगता है कि हमारे संबंध उनके साथ अच्छे रहेंगे और हमेशा रहे हैं. मैं उनसे बहुत निराश हूं. मैंने आठ युद्ध सुलझाए हैं. मुझे लगा था कि यह (रूस-यूक्रेन युद्ध) भी आसानी से सुलझ जाएगा.’
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बता दें, यूक्रेन में कथित युद्ध अपराधों को लेकर हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने पुतिन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर रखा है. 2022 से रूस और युक्रेन में युद्ध चल रहा है. इस युद्ध में हजारों लोगों की जान गई है. डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इस युद्ध में पिछले महीने ही 31,000 लोग मारे गए हैं.
निकोलस मादुरो को कैसे दबोचा?
काराकस में आधी रात के ठीक बाद, जब मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स अपने महल में सो रहे थे. तभी अमेरिकी जेट विमानों ने शहर पर हवाई हमले शुरू कर दिए. इसके बाद अमेरिका की ‘डेल्टा फोर्स’ ने प्रवेश किया. सैनिकों ने मादुरो को पकड़ा और उन्हें देश से बाहर एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ले गए. वहां से उन्हें युद्धपोत के जरिए न्यूयॉर्क लाया गया. अब वेनेजुएला की कमान डेलसी रोड्रिगेज ने संभाल ली है और ट्रंप प्रशासन देश के तेल निर्यात पर नियंत्रण की तैयारी कर रहा है.










