मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान का युद्ध फिर शुरू हो सकता है। क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी से तनाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिका परमाणु समझौते के बिना युद्ध खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए राजी नहीं है। ईरान भी परमाणु कार्यक्रम बंद करने को तैयार नहीं है। लेकिन दोनों देशों के अड़ियल रवैये का खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है। क्योंकि कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं, जिस वजह से यूरोप के 21 देशों में महंगाई बढ़ने से हड़कंप मच गया है।
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यूरोजोन की ग्रोथ रेट भी धमी हुई
बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉक होने से तेल-गैस की सप्लाई बाधित हो गई है। इसलिए यूरोप के 21 देशों में महंगाई का बम फूटा है। यूरोजोन की ग्रोथ रेट बेहद स्लो हो गई है। इसका कारण कच्चे तेल और ऊर्जा संसाधनों का महंगा होना है। अमेरिका और ईरान युद्ध को ग्लोबल इकोनॉमी के लिए झटका माना जा रहा था, जिसके सबूत भी अब सामने आने लगे हैं। भारत-पाकिस्तान समेत कई देशों में जहां तेल-गैस का संकट गहराया। वहीं यूरोपीय देशों में रोजमर्रा की चीजें महंगी होने से संकट बढ़ा है।
इन 21 देशों में महंगाई से हड़कंप
शेयर्ड यूरो करेंसी इस्तेमाल करने वाले 21 देशों में महंगाई बहुत बढ़ गई है। इन देशों में फ्रांस, जर्मनी, इटली, ऑस्ट्रिया, स्पेन, बेल्जियम, फिनलैंड, नीदरलैंड्स जैसे बड़े देश शामिल हैं। यूरोजोन में सालाना महंगाई दर मार्च में 2.6% से बढ़कर अप्रैल में 3% हो गई, क्योंकि एनर्जी की कीमतों में 10.9% प्रतिशत का इजाफा हुआ है। महंगाई के साथ-साथ यूरोजोन की ग्रोथ रेट ने काफी निराश किया है। जनवरी से मार्च की तिमाही में यूरोजोन की ग्रोथ पिछली तिमाही की तुलना में 0.1% बढ़ी।
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बता दें कि ईरान के द्वारा होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉक किए जाने से हालात ज्यादा खराब हुए हैं। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का असर गैस और जेट फ्यूल की कीमतों पर पड़ा है। पॉलिसीमेकर्स इस स्थिति को स्टैगफ्लेशन कहते हैं। महंगाई को कंट्रोल करने का एक ही तरीका है कि सेंट्रल बैंक बेंचमार्क इंटरेस्ट रेट बढ़ा दें, जिससे क्रेडिट कॉस्ट बढ़कर ग्रोथ धीमी हो जाएगी।
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान का युद्ध फिर शुरू हो सकता है। क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी से तनाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिका परमाणु समझौते के बिना युद्ध खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए राजी नहीं है। ईरान भी परमाणु कार्यक्रम बंद करने को तैयार नहीं है। लेकिन दोनों देशों के अड़ियल रवैये का खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है। क्योंकि कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं, जिस वजह से यूरोप के 21 देशों में महंगाई बढ़ने से हड़कंप मच गया है।
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यूरोजोन की ग्रोथ रेट भी धमी हुई
बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉक होने से तेल-गैस की सप्लाई बाधित हो गई है। इसलिए यूरोप के 21 देशों में महंगाई का बम फूटा है। यूरोजोन की ग्रोथ रेट बेहद स्लो हो गई है। इसका कारण कच्चे तेल और ऊर्जा संसाधनों का महंगा होना है। अमेरिका और ईरान युद्ध को ग्लोबल इकोनॉमी के लिए झटका माना जा रहा था, जिसके सबूत भी अब सामने आने लगे हैं। भारत-पाकिस्तान समेत कई देशों में जहां तेल-गैस का संकट गहराया। वहीं यूरोपीय देशों में रोजमर्रा की चीजें महंगी होने से संकट बढ़ा है।
इन 21 देशों में महंगाई से हड़कंप
शेयर्ड यूरो करेंसी इस्तेमाल करने वाले 21 देशों में महंगाई बहुत बढ़ गई है। इन देशों में फ्रांस, जर्मनी, इटली, ऑस्ट्रिया, स्पेन, बेल्जियम, फिनलैंड, नीदरलैंड्स जैसे बड़े देश शामिल हैं। यूरोजोन में सालाना महंगाई दर मार्च में 2.6% से बढ़कर अप्रैल में 3% हो गई, क्योंकि एनर्जी की कीमतों में 10.9% प्रतिशत का इजाफा हुआ है। महंगाई के साथ-साथ यूरोजोन की ग्रोथ रेट ने काफी निराश किया है। जनवरी से मार्च की तिमाही में यूरोजोन की ग्रोथ पिछली तिमाही की तुलना में 0.1% बढ़ी।
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बता दें कि ईरान के द्वारा होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉक किए जाने से हालात ज्यादा खराब हुए हैं। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का असर गैस और जेट फ्यूल की कीमतों पर पड़ा है। पॉलिसीमेकर्स इस स्थिति को स्टैगफ्लेशन कहते हैं। महंगाई को कंट्रोल करने का एक ही तरीका है कि सेंट्रल बैंक बेंचमार्क इंटरेस्ट रेट बढ़ा दें, जिससे क्रेडिट कॉस्ट बढ़कर ग्रोथ धीमी हो जाएगी।