21 देशों में महंगाई से मचा हड़कंप, यूरोप में 2.6 से बढ़कर 3 प्रतिशत हुई दर, ईरान-अमेरिका युद्ध ने कैसे बिगाड़े हालात‌?

US Iran War Impact: ईरान और अमेरिका के युद्ध का सबसे बड़ा असर यूरोप के देशों में देखने को मिला है। कच्चा तेल महंगा होने के कारण यूरोप के करीब 21 देशों में महंगाई बढ़ गई है। जिससे लोगों में हड़कंप मचा हुआ है और उनका जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

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मिडिल ईस्ट की जंग का सबसे बड़ा असर यूरोप में देखने को मिला है।

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान का युद्ध फिर शुरू हो सकता है। क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी से तनाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिका परमाणु समझौते के बिना युद्ध खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए राजी नहीं है। ईरान भी परमाणु कार्यक्रम बंद करने को तैयार नहीं है। लेकिन दोनों देशों के अड़ियल रवैये का खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है। क्योंकि कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं, जिस वजह से यूरोप के 21 देशों में महंगाई बढ़ने से हड़कंप मच गया है।

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यूरोजोन की ग्रोथ रेट भी धमी हुई

बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉक होने से तेल-गैस की सप्लाई बाधित हो गई है। इसलिए यूरोप के 21 देशों में महंगाई का बम फूटा है। यूरोजोन की ग्रोथ रेट बेहद स्लो हो गई है। इसका कारण कच्चे तेल और ऊर्जा संसाधनों का महंगा होना है। अमेरिका और ईरान युद्ध को ग्लोबल इकोनॉमी के लिए झटका माना जा रहा था, जिसके सबूत भी अब सामने आने लगे हैं। भारत-पाकिस्तान समेत कई देशों में जहां तेल-गैस का संकट गहराया। वहीं यूरोपीय देशों में रोजमर्रा की चीजें महंगी होने से संकट बढ़ा है।

इन 21 देशों में महंगाई से हड़कंप

शेयर्ड यूरो करेंसी इस्तेमाल करने वाले 21 देशों में महंगाई बहुत बढ़ गई है। इन देशों में फ्रांस, जर्मनी, इटली, ऑस्ट्रिया, स्पेन, बेल्जियम, फिनलैंड, नीदरलैंड्स जैसे बड़े देश शामिल हैं। यूरोजोन में सालाना महंगाई दर मार्च में 2.6% से बढ़कर अप्रैल में 3% हो गई, क्योंकि एनर्जी की कीमतों में 10.9% प्रतिशत का इजाफा हुआ है। महंगाई के साथ-साथ यूरोजोन की ग्रोथ रेट ने काफी निराश किया है। जनवरी से मार्च की तिमाही में यूरोजोन की ग्रोथ पिछली तिमाही की तुलना में 0.1% बढ़ी।

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बता दें कि ईरान के द्वारा होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉक किए जाने से हालात ज्यादा खराब हुए हैं। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का असर गैस और जेट फ्यूल की कीमतों पर पड़ा है। पॉलिसीमेकर्स इस स्थिति को स्टैगफ्लेशन कहते हैं। महंगाई को कंट्रोल करने का एक ही तरीका है कि सेंट्रल बैंक बेंचमार्क इंटरेस्ट रेट बढ़ा दें, जिससे क्रेडिट कॉस्ट बढ़कर ग्रोथ धीमी हो जाएगी।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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