Donald Trump Abraham Accord: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक लंबी पोस्ट लिखकर पश्चिम एशिया सहित पूरी दुनिया की राजनीति में खलबली मचा दी है. ट्रंप ने पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की, कतर, मिस्र और जॉर्डन जैसे बड़े मुस्लिम देशों से अपील की है कि वे बिना किसी देरी के तुरंत 'अब्राहम अकॉर्ड्स' में शामिल हों. ट्रंप ने दोटूक लहजे में कहा है कि अगर यह समझौता नहीं हुआ तो दुनिया महायुद्ध की तरफ बढ़ सकती है.
ईरान को भी साथ लाने का दावा
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि अब्राहम समझौते में शामिल देशों (यूएई, बहरीन, मोरक्को और सूडान) के लिए यह डील आर्थिक, व्यापारिक और सामाजिक रूप से एक बड़ा वरदान साबित हुई है. उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत सऊदी अरब और कतर को तुरंत हस्ताक्षर करके करनी चाहिए और बाकी देशों को उनके पीछे आना चाहिए. ट्रंप का मानना है कि अगर मुस्लिम देश इसमें शामिल होते हैं, तो 5000 वर्षों में पहली बार मध्य पूर्व में सच्ची शांति और मजबूती आएगी. इतना ही नहीं, ट्रंप ने यह भी दावा किया कि वे ईरान को भी अमेरिका के साथ इस ऐतिहासिक वैश्विक गठबंधन का हिस्सा बनने के लिए मना सकते हैं.
क्या है अब्राहम अकॉर्ड?
साल 2020 में अमेरिका की पहल पर 'अब्राहम अकॉर्ड' की शुरुआत हुई थी. इसका मुख्य उद्देश्य अरब देशों और इजरायल के बीच दशकों पुरानी दुश्मनी को खत्म कर औपचारिक रिश्ते बनाना और मध्य पूर्व में ईरान के बढ़ते प्रभाव को रोकना है.
पाकिस्तान के सामने खड़ी हुई बड़ी दुविधा
ट्रंप के इस आदेश ने पाकिस्तान और अन्य मुस्लिम देशों को गहरे संकट में डाल दिया है. पाकिस्तान ने आज तक इजरायल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं दी है, क्योंकि उसकी पूरी राजनीति 'मुस्लिम पहचान' और फिलिस्तीन के समर्थन पर टिकी है. यदि पाकिस्तान ट्रंप के दबाव में आकर इस समझौते पर दस्तखत करता है, तो इसका सीधा मतलब फिलिस्तीन के मुद्दे को पूरी तरह छोड़ना होगा. पाकिस्तान की कट्टरपंथी धार्मिक तंजीमें इजरायल से सख्त नफरत करती हैं, ऐसे में इजरायल को अपना दोस्त मानना पाकिस्तान के भीतर गृहयुद्ध और हिंसक विद्रोह की आग को भड़का सकता है. अब देखना यह होगा कि ये मुस्लिम देश ट्रंप की बात मानकर इजरायल से हाथ मिलाते हैं या अपनी पुरानी कूटनीति पर कायम रहते हैं.
Donald Trump Abraham Accord: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक लंबी पोस्ट लिखकर पश्चिम एशिया सहित पूरी दुनिया की राजनीति में खलबली मचा दी है. ट्रंप ने पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की, कतर, मिस्र और जॉर्डन जैसे बड़े मुस्लिम देशों से अपील की है कि वे बिना किसी देरी के तुरंत ‘अब्राहम अकॉर्ड्स’ में शामिल हों. ट्रंप ने दोटूक लहजे में कहा है कि अगर यह समझौता नहीं हुआ तो दुनिया महायुद्ध की तरफ बढ़ सकती है.
ईरान को भी साथ लाने का दावा
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि अब्राहम समझौते में शामिल देशों (यूएई, बहरीन, मोरक्को और सूडान) के लिए यह डील आर्थिक, व्यापारिक और सामाजिक रूप से एक बड़ा वरदान साबित हुई है. उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत सऊदी अरब और कतर को तुरंत हस्ताक्षर करके करनी चाहिए और बाकी देशों को उनके पीछे आना चाहिए. ट्रंप का मानना है कि अगर मुस्लिम देश इसमें शामिल होते हैं, तो 5000 वर्षों में पहली बार मध्य पूर्व में सच्ची शांति और मजबूती आएगी. इतना ही नहीं, ट्रंप ने यह भी दावा किया कि वे ईरान को भी अमेरिका के साथ इस ऐतिहासिक वैश्विक गठबंधन का हिस्सा बनने के लिए मना सकते हैं.
क्या है अब्राहम अकॉर्ड?
साल 2020 में अमेरिका की पहल पर ‘अब्राहम अकॉर्ड’ की शुरुआत हुई थी. इसका मुख्य उद्देश्य अरब देशों और इजरायल के बीच दशकों पुरानी दुश्मनी को खत्म कर औपचारिक रिश्ते बनाना और मध्य पूर्व में ईरान के बढ़ते प्रभाव को रोकना है.
पाकिस्तान के सामने खड़ी हुई बड़ी दुविधा
ट्रंप के इस आदेश ने पाकिस्तान और अन्य मुस्लिम देशों को गहरे संकट में डाल दिया है. पाकिस्तान ने आज तक इजरायल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं दी है, क्योंकि उसकी पूरी राजनीति ‘मुस्लिम पहचान’ और फिलिस्तीन के समर्थन पर टिकी है. यदि पाकिस्तान ट्रंप के दबाव में आकर इस समझौते पर दस्तखत करता है, तो इसका सीधा मतलब फिलिस्तीन के मुद्दे को पूरी तरह छोड़ना होगा. पाकिस्तान की कट्टरपंथी धार्मिक तंजीमें इजरायल से सख्त नफरत करती हैं, ऐसे में इजरायल को अपना दोस्त मानना पाकिस्तान के भीतर गृहयुद्ध और हिंसक विद्रोह की आग को भड़का सकता है. अब देखना यह होगा कि ये मुस्लिम देश ट्रंप की बात मानकर इजरायल से हाथ मिलाते हैं या अपनी पुरानी कूटनीति पर कायम रहते हैं.