अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही बातचीत को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि या तो दोनों देशों के बीच 'शानदार और सार्थक' समझौता होगा, या फिर कोई समझौता नहीं होगा. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'ईरान के साथ डील या तो बहुत अच्छी और अर्थपूर्ण होगी, वरना कोई डील नहीं होगी.' हालांकि उनके इस पोस्ट से एक बार फिर दुनिया में हलचल मच गई है. कहा जा रहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष लंबा चल सकता है.
यह भी पढ़ें: US-Iran War: क्या है अब्राहम अकॉर्ड? जिसमें ईरान को शामिल कर सकते हैं ट्रंप
ओबामा सरकार की आलोचना
ट्रंप ने इस दौरान अमेरिकी राजनीति के आलोचकों पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने डेमोक्रेट्स, रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सदस्यों और अन्य विरोधियों को 'नासमझ' करार दिया. ट्रंप ने कहा कि जो लोग अभी से डील में संभावित रियायतों की आलोचना कर रहे हैं, वे वास्तविक बातचीत से अनजान हैं. उन्होंने लिखा, 'मैं उन सभी डेमोक्रेट्स, RINO और मूर्खों पर हंसता हूं जो मेरी ईरान के साथ हो रही डील के बारे में कुछ नहीं जानते.' ट्रंप ने 2015 के ओबामा प्रशासन द्वारा किए गए परमाणु समझौते (JCPOA) की तुलना में अपनी भावी डील को बिल्कुल उलट बताया. उन्होंने पुराने समझौते को 'आपदा' बताया और कहा कि उसने ईरान को परमाणु हथियार बनाने का सीधा रास्ता दिया था.
यह भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट से आई खुशखबरी! ईरान का होर्मुज को लेकर बड़ा ऐलान, भारत को बड़ी राहत
कई मुद्दों पर बनी सहमती
ट्रंप ने 2018 में अमेरिका को इस डील से बाहर निकाला था. उन्होंने दोहराया कि उनकी डील JCPOA जैसी कमजोर नहीं होगी. विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इसी लाइन पर कहा कि या तो मजबूत समझौता होगा या फिर ईरान से दूसरे तरीके से निपटा जाएगा. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बगई ने कहा कि 14 सूत्रीय संभावित समझौते पर कई मुद्दों पर सहमति बन गई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि युद्ध समाप्त करने वाला अंतिम समझौता हो गया है. ईरान का जोर मुख्य रूप से युद्ध समाप्त करने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करने पर है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही बातचीत को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि या तो दोनों देशों के बीच ‘शानदार और सार्थक’ समझौता होगा, या फिर कोई समझौता नहीं होगा. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘ईरान के साथ डील या तो बहुत अच्छी और अर्थपूर्ण होगी, वरना कोई डील नहीं होगी.’ हालांकि उनके इस पोस्ट से एक बार फिर दुनिया में हलचल मच गई है. कहा जा रहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष लंबा चल सकता है.
यह भी पढ़ें: US-Iran War: क्या है अब्राहम अकॉर्ड? जिसमें ईरान को शामिल कर सकते हैं ट्रंप
ओबामा सरकार की आलोचना
ट्रंप ने इस दौरान अमेरिकी राजनीति के आलोचकों पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने डेमोक्रेट्स, रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सदस्यों और अन्य विरोधियों को ‘नासमझ’ करार दिया. ट्रंप ने कहा कि जो लोग अभी से डील में संभावित रियायतों की आलोचना कर रहे हैं, वे वास्तविक बातचीत से अनजान हैं. उन्होंने लिखा, ‘मैं उन सभी डेमोक्रेट्स, RINO और मूर्खों पर हंसता हूं जो मेरी ईरान के साथ हो रही डील के बारे में कुछ नहीं जानते.’ ट्रंप ने 2015 के ओबामा प्रशासन द्वारा किए गए परमाणु समझौते (JCPOA) की तुलना में अपनी भावी डील को बिल्कुल उलट बताया. उन्होंने पुराने समझौते को ‘आपदा’ बताया और कहा कि उसने ईरान को परमाणु हथियार बनाने का सीधा रास्ता दिया था.
यह भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट से आई खुशखबरी! ईरान का होर्मुज को लेकर बड़ा ऐलान, भारत को बड़ी राहत
कई मुद्दों पर बनी सहमती
ट्रंप ने 2018 में अमेरिका को इस डील से बाहर निकाला था. उन्होंने दोहराया कि उनकी डील JCPOA जैसी कमजोर नहीं होगी. विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इसी लाइन पर कहा कि या तो मजबूत समझौता होगा या फिर ईरान से दूसरे तरीके से निपटा जाएगा. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बगई ने कहा कि 14 सूत्रीय संभावित समझौते पर कई मुद्दों पर सहमति बन गई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि युद्ध समाप्त करने वाला अंतिम समझौता हो गया है. ईरान का जोर मुख्य रूप से युद्ध समाप्त करने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करने पर है.