---विज्ञापन---

ईरान की सीक्रेट डिप्लोमेसी या मजबूरी? कौन हैं मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, क्या अमेरिका से क्रैक कर पाएंगे डील

Mohammad Bagher Ghalibaf: ईरान ने अमेरिका से शांति वार्ता के लिए संसद के स्पीकर गालिबाफ को ही क्यों भेजा? क्या वे अमेरिका से डील कर पाएंगे, तेहरान के लिए समझौता कर पाएंगे? कौन हैं गालिबाफ और ईरान की सियासत में उनका कद कितना ऊंचा है, आइए जानते हैं...

---विज्ञापन---

Who is Mohammad Bagher Ghalibaf: पाकिस्तान के इस्लामाबाद में आज अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता होगी। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के नेतृत्व में ईरान का प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच गया है। दोनों प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षा के लिए इस्लामाबाद शहर के सील कर दिया गया है और पूरा शहर छावनी बना हुआ है। इस बीच चर्चा यह है कि ईरान के तरह से आने वाले गालिबाफ कौन हैं और इन्हें ही क्यों भेजा गया अमेरिका से बात करने के लिए? क्या वे अमेरिका से डील कर पाएंगे?

US-ईरान के बीच शांति वार्ता हुई फेल तो क्या होगा? डोनाल्ड ट्रंप ने बताया बैकअप प्लान

---विज्ञापन---

ईरान की संसद के स्पीकर हैं बाघेर गालिबाफ

बता दें कि गालिबाफ ईरान की संसद यानी मजलिस के स्पीकर है, यानी वे ईरान की सरकार की मजबूत आवाज हैं। वे 1997 में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कमांडर थे। 2005 में तेहरान के मेयर बने थे और 12 साल तक पद पर रहे थे। वे मोजतबा खामेनेई के करीबी लोगों में से एक हैं। साल 2000 में वे पुलिस चीफ बने थे। साल 2020 से वे ईरान की संसद के स्पीकर हैं। 1982 में ईराक के कब्जे से खुर्रम शहर को छुड़वाने में इन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। वे 3 बार चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन जीत हासिल नहीं हुई। साल 2017 में इन्होंने चुनाव से नाम वापस लेकर इब्राहिम रईसी को समर्थन दिया था।

ईरान अब चाहकर भी नहीं खोल पाएगा होर्मुज स्ट्रेट? IRGC पर लगा बारूद बिछाकर लोकेशन भूलने का आरोप

---विज्ञापन---

अराघची और गालिबाफ ही अनुभवी नेता बचे

बता दें कि ईरान के पास विदेश मंत्री अब्बास अराघची और बाघेर गालिबाफ ही ऑप्शन बचे हैं, जो अमेरिका के साथ शांति वार्ता करने आए हैं। क्योंकि अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई थी। उनकी जगह उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर बनाया गया, लेकिन वे कहां हैं? इस बारे में किसी को पता नहीं है और न ही वे सार्वजनिक रूप से जनता के सामने आते हैं। युद्ध में ईरान के कई बड़े दिग्गज नेता और कमांडर ढेर हो चुके हैं। राष्ट्रपति पेजेश्कियान संवैधानिक पद पर होने के नाते किसी भी तरह के डेलिगेशन को लीड नहीं कर सकते।

First published on: Apr 11, 2026 01:01 PM

End of Article

About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola