वेनेजुएला के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की नजरों में ग्रीनलैंड है। यहां तक कि ट्रंप के ग्रीनलैंड पर कब्जा करने या खरीदने तक का प्लान चर्चा में आ चुका है। इसके लिए ट्रंप ने ग्रीनलैंड के नागरिकों को 1 लाख डॉलर देने का भी ऐलान किया। अब ग्रीनलैंड को लेकर ट्र्ंप का रुख और सख्त होता जा रहा है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड मुद्दे पर अगर अमेरिका कोई कदम नहीं उठाता है, तो रूस और चीन दखल देंगे। ट्रंप ने साफ किया कि वॉशिंगटन उन्हें पड़ोसी के रूप में नहीं चाहता है। डेनमार्क पर ट्रंप ने कहा कि 500 साल पहले ग्रीनलैंड में नाव उतारने का मतलब यह नहीं है कि वे उस जमीन के मालिक हैं।
यह भी पढ़ें: ‘अमेरिका ने ठीक नहीं किया…’ अब किसने उठाई ट्रंप के फैसले के खिलाफ आवाज?
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ने शीर्ष तेल और गैस अधिकारियों के साथ अपनी बैठक के दौरान मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए ये बातें कहीं। ग्रीनलैंड के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि हम ग्रीनलैंड के मुद्दे पर कुछ करेंगे, चाहे उन्हें पसंद हो या न हो क्योंकि अगर हम ऐसा नहीं करते हैं, तो रूस या चीन ग्रीनलैंड पर कब्जा कर लेंगे। कहा कि हम रूस या चीन को पड़ोसी के रूप में नहीं रखना चाहेंगे। मैं आसान तरीके से समझौता करना चाहता हूं, लेकिन अगर यह आसान तरीके से नहीं हुआ, तो हमें इसे कठिन तरीके से करना पड़ेगा।
यह भी पढ़ें: ‘नेतनयाहू को किडनैप कर मुकदमा चलाए अमेरिका…’ पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का विवादित बयान
रटे रटाए दावे को ट्रंप ने फिर दोहराते हुए कहा था कि मैंने 8 युद्धों को समाप्त कराया। इनमें से कुछ तो शुरू होने ही वाले थे। जैसे भारत और पाकिस्तान, जहां पहले ही 8 जेट विमान मार गिराए जा चुके थे। मैंने परमाणु हथियारों के बिना, तेजी से यह काम कर दिखाया। अपनी तारीफ करते हुए कहा कि इतिहास में मेरे अलावा किसी और को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। किसी और ने युद्धों को इस तरह समाप्त नहीं कराया। राष्ट्रपति पुतिन ने मुझे फोन किया और उन 2 युद्धों का जिक्र किया जिन्हें वह 10 सालों से रोकना चाहते थे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यहां आए और उन्होंने सार्वजनिक बयान दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान और भारत से जुड़े 1 करोड़ लोगों की जान बचाई और यह युद्ध और भी भयंकर होने वाला था।










