ईरान युद्ध के बीच UAE-कतर की ऑयल फैसिलिटी पर हमला, भारत के लिए क्यों है ये बुरी खबर?

ईरान ने कतर के रास लाफ्फान एलएनजी संयंत्र, यूएई के हाबशान गैस संयंत्र और बाब तेल क्षेत्र को निशाना बनाया. ज्यादातर मिसाइलें हवा में मार गिराई गईं, लेकिन यूएई ने इसे ‘आतंकी हमला’ करार दिया. सऊदी की यंबू बंदरगाह पर अरामको रिफाइनरी को नुकसान पहुंचा.

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तीन सप्ताह पहले जब इजरायल की पहली मिसाइल ईरान की जमीन पर गिरी, तो दुनिया को एक और युद्ध का सामना करना पड़ा. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुई सैन्य टक्कर अब पूरी तरह से जंग में बदल चुकी है. पिछले 24 घंटों में इस जंग का रूप अब ‘तेल युद्ध’ में बदल चुका है. बुधवार को दोनों पक्षों ने पहली बार फॉसिल फ्यूल प्रोडक्शन से जुड़ी फैसिलिटिज पर हमले किए, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मच गया. ईरान के खिलाफ जंग में अब ऊर्जा युद्ध का हथियार बन चुका है.

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‘तेल युद्ध’ में बदली मिडिल इस्ट की जंग


17 मार्च तक अमेरिका और इजरायल ने खाड़ी क्षेत्र में ईरान की ऊर्जा उत्पादन इकाइयों को निशाना बनाने से परहेज किया था. यहां तक कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के 90 प्रतिशत तेल निर्यातक खार्ग द्वीप पर हमले में भी केवल सैन्य ठिकानों को लक्षित किया गया. लेकिन बुधवार को इजरायल ने साउथ पार्स गैसफील्ड पर हमला कर दिया, जो ईरान और कतर के बीच साझा है. जवाब में ईरान ने सऊदी अरब की अरामको की सांरेफ रिफाइनरी, कतर और यूएई की गैस सुविधाओं पर ड्रोन और मिसाइलें दागीं.

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क्या खास है साउथ पार्स?


ईरान-इजरायल युद्ध के बीच साउथ पार्स की अहमियत समझना जरूरी है. दुनिया का सबसे बड़ा गैसफील्ड होने के बावजूद यह वैश्विक एलएनजी आपूर्ति का रीढ़ है, जिसमें भारत का बड़ा हिस्सा शामिल है. इजरायली हमले के बाद तेल-गैस की कीमतें अचानक बढ़ गईं. रॉयटर्स के अनुसार, इसमें 1,800 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस भंडार है, जो दुनिया की जरूरतों को 12-13 साल पूरा कर सकता है. ईरान के लिए यह बिजली उत्पादन का मुख्य स्रोत है क्योंकि 80 प्रतिशत बिजली यहीं से आती है. कतर का हिस्सा ‘नॉर्थ फील्ड’ कहलाता है, जो दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यातक है.

यूएई और कतर के तेल संयंत्रों पर हमला


ईरान ने कतर के रास लाफ्फान एलएनजी संयंत्र, यूएई के हाबशान गैस संयंत्र और बाब तेल क्षेत्र को निशाना बनाया. ज्यादातर मिसाइलें हवा में मार गिराई गईं, लेकिन यूएई ने इसे ‘आतंकी हमला’ करार दिया. सऊदी की यंबू बंदरगाह पर अरामको रिफाइनरी को नुकसान पहुंचा, जो होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के बाद वैकल्पिक निर्यात मार्ग है. कुवैत की मिना अल-अहमदी रिफाइनरी में भी आग लगी, हालांकि नुकसान सीमित रहा. पहले ही अबू धाबी के शाह गैसफील्ड पर ड्रोन हमले से उत्पादन रुका, जो वैश्विक सल्फर का 8 प्रतिशत आपूर्ति करता है.

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भारत के लिए क्यों है बुरी खबर?


भारत के लिए यह बुरी खबर है क्योंकि दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी खरीदार होने के नाते भारत कतर पर 80-85 प्रतिशत एलपीजी के लिए निर्भर है. फर्टलाइजर प्लान्ट और सिटी गैस नेटवर्क (पीएनजी-सीएनजी) प्रभावित होंगे. ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, गैस कीमतें 6 प्रतिशत चढ़ीं. विश्लेषक सॉल कावोनिक का कहना है कि एलएनजी सुविधाओं की मरम्मत में वर्ष लगेंगे, जैसा 2003 के इराक युद्ध में हुआ.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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