आर्थिक बदहाली और भारी कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान के लिए मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. एक तरफ मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने वैश्विक अस्थिरता बढ़ा दी है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के सबसे करीबी माने जाने वाले मित्र देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपने 3.5 अरब डॉलर के कर्ज तुरंत चुकाने के लिए बोला है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के कारण खाड़ी क्षेत्र में पैदा हुए तनावपूर्ण हालातों के बीच UAE ने अपनी आर्थिक स्थिति को सुरक्षित करने के लिए पाकिस्तान को दिए गए कर्ज को वापस मांगा है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार के एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री ने पुष्टि की है कि इस्लामाबाद इस पूरे कर्ज को इसी महीने यानी अप्रैल 2026 के अंत तक चुका देगा.
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इस महीने चुकाएगा कर्ज
11 अप्रैल को 450 मिलियन डॉलर वापस किए जाएंगे. यह कर्ज 1996-97 में लिया गया था, जिसे 29 साल बाद चुकाया जा रहा है. इसके बाद 17 अप्रैल को 2 बिलियन डॉलर और 23 अप्रैल 1 बिलियन डॉलर का कर्ज लौटाया जाएगा.
इसके अलावा, पाकिस्तान को 8 अप्रैल को 1.3 अरब डॉलर का यूरोबॉन्ड भी चुकाना है. यानी कुल मिलाकर पाकिस्तान को इस महीने लगभग 4.8 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि बाहर भेजनी होगी.
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खाली हो जाएगा विदेशी मुद्रा भंडार?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी रकम की निकासी से पाकिस्तान के रिजर्व पर भारी दबाव पड़ेगा. हालांकि, शहबाज सरकार का दावा है कि स्थिति सुविधाजनक है, लेकिन असलियत यह है कि पाकिस्तान का अधिकांश भंडार मित्र देशों जैसे चीन, सऊदी अरब, UAE की जमा राशि पर टिका है. खुद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में स्वीकार किया था कि विदेशों से मदद मांगते समय उन्हें 'शर्मिंदगी' महसूस होती है.
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लड़खड़ाती इकॉनमी
पाकिस्तान की मुश्किलें सिर्फ कर्ज तक सीमित नहीं हैं. चालू वित्त वर्ष के पहले 9 महीनों में देश का निर्यात 8% गिर गया है. विदेशी निवेश में भी भारी गिरावट आई है. UAE ने पहले पाकिस्तान को 3% ब्याज पर कर्ज दिया था, जिसे पिछले साल बढ़ाकर 6.5% कर दिया गया, जिससे कर्ज का बोझ और बढ़ गया है.
आर्थिक बदहाली और भारी कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान के लिए मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. एक तरफ मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने वैश्विक अस्थिरता बढ़ा दी है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के सबसे करीबी माने जाने वाले मित्र देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपने 3.5 अरब डॉलर के कर्ज तुरंत चुकाने के लिए बोला है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के कारण खाड़ी क्षेत्र में पैदा हुए तनावपूर्ण हालातों के बीच UAE ने अपनी आर्थिक स्थिति को सुरक्षित करने के लिए पाकिस्तान को दिए गए कर्ज को वापस मांगा है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार के एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री ने पुष्टि की है कि इस्लामाबाद इस पूरे कर्ज को इसी महीने यानी अप्रैल 2026 के अंत तक चुका देगा.
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इस महीने चुकाएगा कर्ज
11 अप्रैल को 450 मिलियन डॉलर वापस किए जाएंगे. यह कर्ज 1996-97 में लिया गया था, जिसे 29 साल बाद चुकाया जा रहा है. इसके बाद 17 अप्रैल को 2 बिलियन डॉलर और 23 अप्रैल 1 बिलियन डॉलर का कर्ज लौटाया जाएगा.
इसके अलावा, पाकिस्तान को 8 अप्रैल को 1.3 अरब डॉलर का यूरोबॉन्ड भी चुकाना है. यानी कुल मिलाकर पाकिस्तान को इस महीने लगभग 4.8 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि बाहर भेजनी होगी.
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खाली हो जाएगा विदेशी मुद्रा भंडार?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी रकम की निकासी से पाकिस्तान के रिजर्व पर भारी दबाव पड़ेगा. हालांकि, शहबाज सरकार का दावा है कि स्थिति सुविधाजनक है, लेकिन असलियत यह है कि पाकिस्तान का अधिकांश भंडार मित्र देशों जैसे चीन, सऊदी अरब, UAE की जमा राशि पर टिका है. खुद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में स्वीकार किया था कि विदेशों से मदद मांगते समय उन्हें ‘शर्मिंदगी’ महसूस होती है.
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लड़खड़ाती इकॉनमी
पाकिस्तान की मुश्किलें सिर्फ कर्ज तक सीमित नहीं हैं. चालू वित्त वर्ष के पहले 9 महीनों में देश का निर्यात 8% गिर गया है. विदेशी निवेश में भी भारी गिरावट आई है. UAE ने पहले पाकिस्तान को 3% ब्याज पर कर्ज दिया था, जिसे पिछले साल बढ़ाकर 6.5% कर दिया गया, जिससे कर्ज का बोझ और बढ़ गया है.