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क्या AI क्रांति का ‘ऑक्सीजन’ खत्म होने वाला है? जानिए क्या है ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ कनेक्शन

कोरियाई बाजार में आए भूचाल ने महज दो दिनों में 270 अरब डॉलर साफ कर दिए. हालत यह थी कि 576 दिनों में पहली बार 'सर्किट ब्रेकर' लगाकर ट्रेडिंग रोकनी पड़ी.

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पूरी दुनिया की नजरें इस वक्त खाड़ी देशों और होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी हैं, लेकिन असली खतरे की घंटी दक्षिण कोरिया से बज रही है. दक्षिण कोरियाई शेयर बाजार (KOSPI) में पिछले 48 घंटों में आई 15% की गिरावट ने एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य को बदल सकता है. सवाल यह है कि क्या एआई क्रांति के लिए सबसे बड़ा जोखिम चिप्स या सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि वह ईंधन (Fossil Fuel) है जो इन्हें बनाने वाली फैक्ट्रियों को चलाता है?

48 घंटों में 270 अरब डॉलर स्वाहा

कोरियाई बाजार में आए इस भूचाल ने महज दो दिनों में 270 अरब डॉलर साफ कर दिए. हालत यह थी कि 576 दिनों में पहली बार ‘सर्किट ब्रेकर’ लगाकर ट्रेडिंग रोकनी पड़ी. दिग्गज कंपनी सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स 10% और एसके हाइनिक्स (SK Hynix) 12% तक टूट गए.

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एआई का ‘ऑक्सीजन’ खतरे में

एआई सिस्टम को चलाने के लिए एनवीडिया (NVIDIA) जैसे शक्तिशाली चिप्स की जरूरत होती है, लेकिन इन चिप्स को डेटा फीड करने के लिए ‘हाई बैंडविड्थ मेमोरी’ (HBM) चाहिए. दुनिया की 80% HBM सप्लाई अकेले सैमसंग और एसके हाइनिक्स के पास है.

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दिक्कत यह है कि इन मेमोरी चिप्स को बनाने वाली दक्षिण कोरियाई फैक्ट्रियां अपनी 97% ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं. उनकी ऊर्जा का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है. अगर खाड़ी में तनाव के कारण तेल और गैस की सप्लाई रुकी, तो एआई चिप्स का उत्पादन ठप होना तय है.

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कोई ‘बफर’ स्टॉक नहीं

चिंता की बात यह है कि दुनिया के पास मेमोरी चिप्स का स्टोरेज बहुत कम है. अनुमान के मुताबिक, ग्लोबल DRAM इन्वेंट्री सिर्फ 2-3 हफ्ते और NAND फ्लैश इन्वेंट्री 3-4 हफ्ते की है. अगर होर्मुज संकट एक महीने से ज्यादा खिंचा, तो उत्पादन में भारी कटौती करनी पड़ेगी.

First published on: Mar 04, 2026 06:29 PM

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About the Author

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.

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