ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता को अचानक निलंबित कर दिया है. इस फैसले की मुख्य वजह इजरायल द्वारा लेबनान पर लगातार किए जा रहे सैन्य हमले बताए गए हैं. ईरानी मीडिया के मुताबिक, तेल अवीव की कार्रवाइयों को लेकर ईरान ने सख्त रुख अपनाते हुए बातचीत प्रक्रिया पर ब्रेक लगा दिया है. ईरानी न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरान ने स्पष्ट शर्त रखी है कि गाजा और लेबनान में इजरायली सैन्य अभियानों को तुरंत रोका जाए और लेबनान से इजरायली सेना की पूर्ण वापसी हो. इन शर्तों को पूरा किए बिना वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी.
पाकिस्तान के जरिये भी बातचीत बंद
पाकिस्तान के माध्यम से दोनों देशों के बीच शांति वार्ता भी फिलहाल बंद कर दी गई है. ईरान का ये फैसला मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को और गहरा करने वाला माना जा रहा है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इस फैसले पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर विस्तार से लिखा. उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच हुआ युद्धविराम सभी मोर्चों पर लागू होता है, जिसमें लेबनान भी शामिल है. अरागची ने चेतावनी देते हुए लिखा, 'यदि किसी एक मोर्चे पर युद्धविराम का उल्लंघन होता है तो उसे सभी मोर्चों पर उल्लंघन माना जाएगा.'
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अमेरिका और इजरायल को दी चेतावनी
उन्होंने आगे कहा कि किसी भी उल्लंघन के परिणामों की पूरी जिम्मेदारी अमेरिका और इजरायल पर होगी. विदेश मंत्री के इस बयान से साफ है कि ईरान पूरे क्षेत्र में इजरायल की कार्रवाइयों को एक साथ देख रहा है और उसे अलग-अलग मोर्चों पर बांटकर नहीं देखना चाहता. ईरान का मानना है कि लेबनान पर हमले युद्धविराम समझौते का सीधा उल्लंघन हैं. विश्लेषकों का कहना है कि ईरान का यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा और अपनी सहयोगी ताकतों खासकर लेबनान के हिजबुल्लाह के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाने का प्रयास है. पिछले कुछ सप्ताहों में इजरायल ने लेबनान में अपने अभियान तेज कर दिए थे, जिसके चलते कई नागरिक हताहत हुए हैं.
ईरान के तेवर पर डोनाल्ड ट्रंप का आया जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस तेवर पर कहा कि उन्हें ईरान से ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली कि उसने अमेरिका के साथ बातचीत रोक दी है लेकिन अगर यह सच भी है तो ठीक है. ट्रंप ने कहा कि हमने बहुत ज्यादा बातचीत कर ली है और अब चुप्पी अच्छी होगी. लेकिन उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि चुप्पी का मतलब ये नहीं कि हम बमबारी शुरू कर देंगे. ट्रंप के अनुसार नाकेबंदी जारी रखी जाएगी और देखा जायेगा कि ईरान कितने दिन तक होर्मुज को बंद रख पाता है, क्योंकि उन्हें जबरदस्त नुकसान हो रहा है.
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ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता हाल ही में शुरू हुई थी, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिबंधों जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही थी. लेकिन लेबनान संकट ने इस प्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया है. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों पक्षों के बीच वार्ता कब तक रुकी रहेगी.
ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता को अचानक निलंबित कर दिया है. इस फैसले की मुख्य वजह इजरायल द्वारा लेबनान पर लगातार किए जा रहे सैन्य हमले बताए गए हैं. ईरानी मीडिया के मुताबिक, तेल अवीव की कार्रवाइयों को लेकर ईरान ने सख्त रुख अपनाते हुए बातचीत प्रक्रिया पर ब्रेक लगा दिया है. ईरानी न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरान ने स्पष्ट शर्त रखी है कि गाजा और लेबनान में इजरायली सैन्य अभियानों को तुरंत रोका जाए और लेबनान से इजरायली सेना की पूर्ण वापसी हो. इन शर्तों को पूरा किए बिना वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी.
पाकिस्तान के जरिये भी बातचीत बंद
पाकिस्तान के माध्यम से दोनों देशों के बीच शांति वार्ता भी फिलहाल बंद कर दी गई है. ईरान का ये फैसला मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को और गहरा करने वाला माना जा रहा है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इस फैसले पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर विस्तार से लिखा. उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच हुआ युद्धविराम सभी मोर्चों पर लागू होता है, जिसमें लेबनान भी शामिल है. अरागची ने चेतावनी देते हुए लिखा, ‘यदि किसी एक मोर्चे पर युद्धविराम का उल्लंघन होता है तो उसे सभी मोर्चों पर उल्लंघन माना जाएगा.’
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अमेरिका और इजरायल को दी चेतावनी
उन्होंने आगे कहा कि किसी भी उल्लंघन के परिणामों की पूरी जिम्मेदारी अमेरिका और इजरायल पर होगी. विदेश मंत्री के इस बयान से साफ है कि ईरान पूरे क्षेत्र में इजरायल की कार्रवाइयों को एक साथ देख रहा है और उसे अलग-अलग मोर्चों पर बांटकर नहीं देखना चाहता. ईरान का मानना है कि लेबनान पर हमले युद्धविराम समझौते का सीधा उल्लंघन हैं. विश्लेषकों का कहना है कि ईरान का यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा और अपनी सहयोगी ताकतों खासकर लेबनान के हिजबुल्लाह के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाने का प्रयास है. पिछले कुछ सप्ताहों में इजरायल ने लेबनान में अपने अभियान तेज कर दिए थे, जिसके चलते कई नागरिक हताहत हुए हैं.
ईरान के तेवर पर डोनाल्ड ट्रंप का आया जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस तेवर पर कहा कि उन्हें ईरान से ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली कि उसने अमेरिका के साथ बातचीत रोक दी है लेकिन अगर यह सच भी है तो ठीक है. ट्रंप ने कहा कि हमने बहुत ज्यादा बातचीत कर ली है और अब चुप्पी अच्छी होगी. लेकिन उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि चुप्पी का मतलब ये नहीं कि हम बमबारी शुरू कर देंगे. ट्रंप के अनुसार नाकेबंदी जारी रखी जाएगी और देखा जायेगा कि ईरान कितने दिन तक होर्मुज को बंद रख पाता है, क्योंकि उन्हें जबरदस्त नुकसान हो रहा है.
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ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता हाल ही में शुरू हुई थी, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिबंधों जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही थी. लेकिन लेबनान संकट ने इस प्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया है. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों पक्षों के बीच वार्ता कब तक रुकी रहेगी.