Gaurav Pandey
लिखने-पढ़ने का शौक है। राजनीति में दूर-दूर से रुचि है। अखबार की दुनिया के बाद अब डिजिटल के मैदान में हूं। आठ साल से ज्यादा समय से देश-विदेश की खबरें लिख रहा हूं। दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे संस्थानों में सेवाएं दी हैं।
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यूक्रेन के खिलाफ लंबे समय से आक्रामक रुख दिखाने वाला रूस इस युद्ध में उन यूक्रेनी सैनिकों की लाशों को भी नहीं बख्श रहा है जिन्हें उसने कैद किया है। डेलीमेल की एक रिपोर्ट के अनुसार यूक्रेन के एक प्रिजनर ऑफ वॉर (युद्ध बंदी) की पत्नी ने दावा किया है कि रूस मृत कैदियों के अंग निकालकर बेच रहा है। दरअसल, हाल ही में सामने आया है कि व्लादिमीर पुतिन की सेना ने यूक्रेन के मृत सैनिकों के शव लौटाए थे और इन शवों में कई महत्वपूर्ण अंग गायब थे।
ऐसे ही एक प्रिजनर ऑफ वॉर की पत्नी और ‘फ्रीडम टू डिफेंडर्स ऑफ मारियूपोल’ संगठन की अध्यक्ष लेरिसा सलाएवा ने कहा कि यह सबको मालूम हो चुका है कि बॉडी एक्सचेंज के दौरान हमें जो शव मिले थे उन्हें टॉर्चर किया गया था। लेकिन, इन शवों में कई अंग ही नहीं हैं। सलाएवा ने कहा कि मैं मानती हूं कि रूस में ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन के लिए ब्लैक मार्केट एक्टिव है और यह घटना मेरे विश्वास को और मजबूत करती है। दुर्भाग्य से ऐसा हमारे युद्ध बंदियों के साथ हो रहा है।
The bodies of Ukrainian prisoners of war are being returned to Ukraine without internal organs…they could be used for organ transplants in Russia. https://t.co/QIa7RWlVkZ
— Kateryna Yushchenko 🌻 🇺🇦 (@KatyaYushchenko) July 25, 2024
वह अंकारा में प्रिजनर्स ऑफ वॉर और तुर्की के लिए यूक्रेन के राजदूत वेसिल बोडनार के बीच एक बैठक को संबोधित कर रही थीं। सलाएवा ने कहा कि यह बहुत जरूरी है कि पूरी दुनिया को इसके बारे में पता चले ताकि इस अपराध पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने तुर्की सरकार से अपील की कि एक मेडिकल कमीशन का गठन किया जाए जो यूक्रेन और रूस दोनों देशों के युद्ध बंदियों के हेल्थ स्टेटस की निगरानी करे। ऐसे मामलों में तुर्की को मध्यस्थ के रोल में आना चाहिए।
Do you want to learn about russia? I’d avoid Dostoyevsky or watching the Bolshoi. Instead, read about how they torture prisoners and harvest organs pic.twitter.com/JWgVGCfJEm
— Тетяна Denford 🇺🇦🔱 (@TetyanaUkrainka) July 25, 2024
बता दें कि जेनेवा कन्वेंशन के तहत शव और युद्ध बंदियों का एक्सचेंज सिर्फ युद्ध समाप्त होने के बाद ही होता है। लेकिन, रूस और यूक्रेन के बीच लड़ाई में यह एक्सचेंज विवाद की शुरुआत होने के 6 महीने बाद ही शुरू हो गया था। हालांकि, अंग चोरी करने के इन आरोपों को रूस के सूत्रों ने खारिज किया है और आरोप लगाया है कि यूक्रेन के लोग व्लादिमीर पुतिन की छवि को खराब करने के लिए इस तरह के दावे कर रहे हैं। हालांकि, सच क्या है यह समय ही बताएगा।
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