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दुनिया

कितनी खतरनाक है रूसी मिसाइल 9M729? जानें खूबियां और हथियार को लेकर अमेरिका से विवाद की वजह

Russia Cruise Missile 9M729: रूस पर यूक्रेन के खिलाफ विवादित मिसाइल को इस्तेमाल करने का आरोप लगा है, जिसे नाटो और यूरोपीय देशों के खिलाफ खतरे की घंटी कहा जा रहा है. इस मिसाइल के कारण ही अमेरिका ने खुद को संधि से बाहर कर लिया था और अब इसी मिसाइल के कारण अमेरिका ने परमाणु परीक्षण करने का ऐलान किया है.

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Written By: News24 हिंदी Updated: Nov 2, 2025 13:14
Russia Ukraine War | Cruise Missile | Nuclear Warhead
रूस पर यूक्रेन के खिलाफ विवादित मिसाइल इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं.

Cruise Missile 9m729 Qualities: रूस ने यूक्रेन के खिलाफ विवादास्पद, लेकिन सबसे खतरनाक हथियार 9M729 क्रूज मिसाइल को तैनात किया है और इससे हमला भी किया है. यह दावा यूक्रेन की ओर से किया गया है. यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के अनुसार, अगस्त 2025 से अब तक रूस क्रूज मिसाल को 23 बार इस्तेमाल कर चुका है. 5 अक्टूबर 2025 को भी रूस ने यूक्रेन के खिलाफ इस मिसाइल को लॉन्च किया था, जिसने 600 किलोमीटर दूर लापाइवका गांव को टारगेट किया था.

इसका मलबा जहां गिरा था, वहां 9M729 मार्क मिला, वहीं हमले से 4 लोगों की मौत भी हुई थी. यूक्रेन ने दावा किया है कि रूस ने इस मिसाइल का इस्तेमाल यूक्रेन पर दबाव बढ़ाने और यूरोप को चेतावनी देने के लिए किया है, क्योंकि ब्रायंस्क से लॉन्च होने के बाद यह मिसाइल यूरोपीय देशों स्वीडन, फिनलैंड, ब्रिटेन तक हमला कर सकती है.

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मिसाइल को लेकर अमेरिका से विवाद क्यों?

बता दें कि रूस की क्रूज मिसाइल 9M729 का नाटो में कोडनेम SSC-8 या ‘स्क्रूड्राइवर’ है, जो जमीन से मार करने वाली ग्राउंड लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल (GLCM) है. इस मिसाइल को NPO नोवेटर (येकातेरिनबर्ग) द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है, लेकिन यह मिसाइल इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज (INF) संधि का उल्लंघन है, क्योंकि अमेरिका ने दावा किया है कि इस मिसाइल की मारक क्षमता 2500 किलोमीटर की दूरी तक है.

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जबकि रूस का दावा है कि यह मिसाइल 480 किलोमीटर की दूरी तक ही हमला कर सकती है. हालांकि रूस ने भी अमेरिका पर संधि का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है, लेकिन अमेरिका ने रूस की मिसाइल की मारक क्षमता से जुड़े सबूत होने का दावा करते हुए साल 2019 में खुद को संधि से बाहर कर लिया था. यूक्रेन युद्ध में इस मिसाइल का इस्तेमाल किया जाना यूरोप के लिए खतरे की घंटी है.

रूस की यूक्रेन युद्ध लंबा खींचने की तैयारी

युद्ध विशेषज्ञों का कहना है कि यह मिसाइल रूस को रणनीतिक रूप से मजबूत बनाती है, क्योंकि यह मिसाइल न्यूक्लियर वारहेड के साथ हमला करने में भी सक्षम है. यूक्रेन के खिलाफ इस मिसाइल के इस्तेमाल को देखते हुए ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फिर से न्यूक्लियर टेस्टिंग शुरू करने का आदेश दिया. यह मिसाइल यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को लंबा खींचने की तैयारी और NATO के साथ-साथ यूक्रेन का साथ देने के लिए यूरोपीय देशों को धमकाने का हथियार है.

रूस ने हमेशा इस मिसाइल की रेंज को 500 किलोमीटर तक सीमित बताया है, जबकि हाल ही में इस मिसाइल ने 600 किलोमीटर दूर यूक्रेन के एक गांव को टारगेट किया था, जो रूस के दावे को झूठा साबित करता है. ऐसे में अमेरिका अब परमाणु परीक्षण करके रूस समेत सभी देशों को अपनी ताकत का अहसास कराना चाहता है, ताकि अगर जंग के हालात बनें तो सोच-समझकर फैसला लिया जा सके.

रूस की क्रूज मिसाइल की विशेषताएं

बता दें कि रूस की क्रूज मिसाइल 9M729 की लंबाई 6 से 8 मीटर है और इसका व्यास 0.514 मीटर है. मिसाइल में TRDD P-95-300 या RDK-300 टर्बोजेट इंजन है, जो मिसाइल के अंदर फिक्स है और इसे रडार से बचाने में सक्षम हैं. यह मिसाइल 50 मीटर की ऊंचाई तक फ्लाई कर सकती है, जिस वजह से इसे इंटरसेप्ट करना मुश्किल है. मिसाइल में INS (इनर्शियल नेविगेशन) वाला गाइडेंस सिस्टम, GPS/GLONASS, डिजिटल सीन मैपिंग (DSMCM) सिस्टम है.

500 किलोग्राम कन्वेंशनल या न्यूक्लियर वारहेड की क्षमता वाली मिसाइल का लॉन्चर 9K720 इस्कैंडर TEL (ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर) है. एक लॉन्चर से 4 मिसाइलें दागी जा सकती हैं और इसकी रेंज 2500 किलोमीटर की दूरी है. यह मिसाइल 9M728 (SSC-7) का मॉडर्न और रूसी नेवी की कलिब्र (3M-14) क्रूज मिसाइल का लैंड-वर्जन है। यह सुपरसोनिक नहीं, बल्कि सबसोनिक मिसाइल है.

इस मिसाइल का परीक्षण 2008 में किया गया था, जो साल 2014 तक चला. 2016 में रूस ने इस मिसाइल को बनाना शुरू किया था, लेकिन साल 2017 में अमेरिका ने मिसाइल को लेकर रूस पर आरोप लगाए. साल 2017 तक रूस मिसाइल की 2 बटालियन यानी करीब 64 मिसाइलें तैनात कर चुका था, लेकिन विवाद के चलते साल 2019 में संधि से अमेरिका के बाहर होने के बाद रूस ने मिसाइल का इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन अब अचानक मिसाइल के इस्तेमाल को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.

First published on: Nov 02, 2025 01:06 PM

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