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एससीओ शिखर सम्मेलन से पहले राष्ट्रपति पुतिन ने पश्चिमी प्रतिबंधों का विरोध किया, कहा कि ये ब्रिक्स के विकास में बाधा डालते हैं और भेदभावपूर्ण हैं। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन प्रतिबंधों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।
एससीओ शिखर सम्मेलन से पहले पुतिन ने बताया कि रूस और चीन भेदभावपूर्ण प्रतिबंधों के खिलाफ एक जैसा व्यवहार रखते हैं और यह सब ब्रिक्स सदस्यों और दुनिया के सामाजिक-इकोनॉमी ग्रोथ में रुकावट डालते हैं ।
एससीओ शिखर सम्मेलन से पहले पुतिन ने इस बात पर जोर देकर कहा कि रूस और चीन के रिलेशन महान स्तर पर पहुंच गए हैं। पुतिन ने बताया कि व्यापार में अब तक चीन रूस का अग्रणी साझेदार है, जबकि पिछले साल रूस, चीन के विदेशी व्यापार साझेदारों में 5वें नंबर पर था। उन्होंने आगे बताया कि रूस और चीन के बीच लेन-देन लगभग पूरी तरह से रूबल और युआन में होता है।
पुतिन ने इब बात को भी दोहराया कि चीन तेल और गैस का सबसे बड़ा इंपोर्टर बना हुआ है। उन्होंने कहा कि दोनों ही आपस में बात करके बाइलेटरल ट्रेड में आने वाली बाधाओं को कम करने करेंगे। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि शिखर सम्मेलन हर खतरों का जवाब देने के लिए एससीओ की क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ सही व्यवस्था को आकार देने में मदद करेगा।
ब्रिक्स के बारे में पुतिन ने कहा कि रूस और चीन जरूरी प्रोजेक्ट्स पर एक्स्ट्रा ध्यान दिया जा रहा है ताकि रिसोर्स ज्यादा से ज्यादा हो पाए। रूस के राष्ट्रपति पुतिन 31 अगस्त और 1 सितम्बर को तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। वहीं, जापान की यात्रा खत्म करने के बाद पीएम मोदी तियानजिन में चीन- एससीओ शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे। इस दौरान पीएम मोदी 2 जरूरी बैठक करेंगे। पहली मुलाकात प्रधानमंत्री शी जिनपिंग के साथ और दूसरी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ होगी।
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