नेपाल में पिछले कुछ वर्षों से लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. जेन जी (Gen Z) प्रोटेस्ट की वजह से केपी ओली की सरकार तक गिर गई. हिंदी राष्ट्र के लिए विरोध प्रदर्शन हो या अब भारतीय सेना में भर्ती के लिए, नेपाल आज भी विरोध प्रदर्शनों से उबल रहा है. नेपाल में इन दिनों भारतीय सेना की अग्निवीर भर्ती दोबारा शुरू करने की मांग तेज हो गई है. पोखरा में पूर्व गोरखा सैनिकों और उनके समर्थकों ने प्रदर्शन कर नेपाल सरकार से युवाओं के लिए भारतीय सेना में भर्ती का रास्ता खोलने की मांग की.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भारतीय सेना में गोरखा युवाओं की भर्ती केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सैन्य संबंधों की महत्वपूर्ण कड़ी है. गौरतलब है कि यह प्रदर्शन भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की 16 अगस्त से शुरू होने वाली पांच दिवसीय नेपाल यात्रा से ठीक पहले हुआ है. इंडियन एक्स-सर्विसमेन गोरखा ब्रिगेड नेपाल पोखरा की ओर से आयोजित प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन कार्यालय के जरिए संघीय सरकार को दो मांगो वाली चिट्ठी सौंपी गई है.
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2020 से ही प्रभावित है नेपाली गोरखाओं की भर्ती
लेटर में भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की भर्ती तत्काल शुरू करने और पूर्व सैनिक ग्रुप्स के नाम में ‘सैनिक’ शब्द के इस्तेमाल से जुड़े अपग्रेड की मांग कई गई है. भारतीय सेना में नेपाली गोरखाओं की भर्ती कोविड-19 महामारी के दौरान करीब 2020 से बाधित हुई थी. आपको जानकर हैरानी होगी कि नेपाली युवाओं की भारतीय सेना में भर्ती की परंपरा करीब 207 वर्षों से चली आ रही है, जिसे 1816 की सुगौली संधि कहा जाता है. ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के राजा के बीच आंग्ल-नेपाली युद्ध के बाद इस संधि को साइन किया गया था.
क्या है 200 साल पुरानी सुगौली संधि
इस संधि के तहत भारत-नेपाल की आधुनिक सीमाओं को तय किया गया. साथ ही इसी संधि के तहत गोरखा सैनिकों को ब्रिटिश और फिर आजादी के बाद भारतीय सेना में शामिल करने की शुरुआत हुई. प्रदर्शनकारी लोगों का कहना है कि अग्निपथ योजना लागू होने के बाद यह ऐतिहासिक व्यवस्था प्रभावित हुई है. प्रदर्शनकारियों ने तर्क दिया कि अग्निवीर योजना के तहत युवाओं को चार साल की सेवा के दौरान वेतन और अन्य सुविधाएं मिल सकती हैं, जो उनके लिए विदेश जाकर कम वेतन वाली कठिन नौकरियां करने की तुलना में बेहतर विकल्प है.
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