पाकिस्तान के प्रमुख अखबारों में से एक, ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ में 1 जनवरी को एक लेख छपा था. अंग्रेजी में छपे इस लेख का शीर्षक था ‘It Is Over’. कुछ ही घंटों बाद यह लेख वेबसाइट से गायब हो गया. लेकिन इंटरनेट की दुनिया में इससे भूचाल आ गया. अमेरिका में पढ़ रहे एक युवा पाकिस्तानी छात्र जोरैन निजामानी ने पाकिस्तान के ‘जेन-जी’ वर्ग पर यह लेख लिखा था. इसमें झूठी देशभक्ति के पाठ और पुराने पड़ चुके सरकारी नैरेटिव को लेकर आवाज उठाई गई थी. लेख हटने के बाद पाकिस्तान में बांग्लादेश और नेपाल जैसे हालात होते दिख रहे हैं. युवाओं में काफी आक्रोश है, सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी सरकार की दबाकर आलोचना की जा रही है. उन्होंने लेख में लिखा था कि कैसे पाकिस्तान की युवा पीढ़ी सरकार और सेना के नैरेटिव में नहीं फंस रही है. लेख के जरिए यह बताने की कोशिश की गई है कि कैसे एक बूढ़ा होता सत्ता ढांचा ‘जेन-जी’ के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहा है.
कौन हैं जोरैन निजामानी?
सबसे पहले जानिए कि जोरैन निजामानी कौन हैं. वह अमेरिका में रहकर आर्कन्सास विश्वविद्यालय से क्रिमिनोलॉजी में पीएचडी कर रहे हैं. लोकप्रिय कलाकार फजीला काजी और कैसर खान निजामानी के बेटे हैं. वह पेशे से वकील और प्रोफेसर भी हैं.
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रातों-रात बने नेशनल यूथ आइकन
लेख को कुछ ही घंटों में पाकिस्तानी सेना के आदेश पर हटा दिया गया. जिसकी वजह से जोरैन रातों-रात एक नेशनल यूथ आइकन बन गए. वेबसाइट से तो लेख हटा दिया गया, लेकिन अखबार में छपे लेख की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं. पाकिस्तान में जोरैन सोशल मीडिया पर ट्रेंड होने लगे. पाकिस्तान में लेख हटाए जाने की लगातार निंदा की जा रही है.
𝗧𝗵𝗲 𝗩𝗿𝗶𝗮𝗹 𝗭𝗼𝗿𝗮𝗶𝗻 𝗡𝗶𝘇𝗮𝗺𝗮𝗻𝗶:
— Dr Ahmad Rehan Khan (@AhmadRehanKhan) January 3, 2026
The viral Pakistani PhD scholar from the University of Arkansas, also the son of a well known celebrity couple, has now joined X to explain his Express Tribune article.#zorainNizamani I #Pakistan pic.twitter.com/zLakseDlhG
क्या था लेख में?
जोरैन ने पाकिस्तान के शासक वर्ग और युवा आबादी के बीच बढ़ती खाई के बारे में लिखा था. उन्होंने लिखा, ‘सत्ता में बैठे बुजुर्गों का समय अब पूरा हो गया. युवा पीढ़ी आपकी बातों में नहीं आने वाली है. आप स्कूलों और कॉलेजों में देशभक्ति को बढ़ावा देने के लिए चाहे कितने भी सेमिनार और डिबेट करवा लें. यह काम नहीं कर रहा है. देशभक्ति स्वाभाविक रूप से तब आती है जब समान अवसर, मजबूत बुनियादी ढांचा और कुशल तंत्र मौजूद हो.’
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बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से जूझ रहे पाकिस्तान की सरकार को आईना दिखाते हुए जोरैन ने तर्क दिया कि युवा पीढ़ी – विशेष रूप से जेन-जी और जेन अल्फा – जमीनी हकीकतों के बारे में राजनीतिक रूप से अधिक जागरूक हैं. जोरैन ने आगे कहा, ‘यूथ माइंड, जेन-जी, अल्फा, जानते हैं कि वास्तव में क्या हो रहा है. आपकी झूठी देशभक्ति के विचारों को बेचने कोशिश उन पर काम नहीं कर रही है. जनता को अनपढ़ रखने की आपकी तमाम कोशिशों में भी आप नाकाम रहे.’

‘खामोशी से देश छोड़ रहे युवा’
जोरैन ने इस बात पर जोर दिया कि आप भले ही डर और दमन से खुले विद्रोह को रोक सकते हैं, लेकिन युवा पीढ़ी खामोशी के साथ देश छोड़कर जा रही है. उन्होंने कहा, ‘युवाओं के लिए अब बहुत हो चुका है, और क्योंकि उन्होंने सीख लिया है कि वे ताकतों को चुनौती नहीं दे सकते, इसलिए वे देश छोड़ रहे हैं… वे पीछे मुड़कर देखे बिना खामोशी के साथ देश छोड़ना पसंद कर रहे हैं, क्योंकि उनके दोस्त, जिन्होंने आवाज उठाई थी, उन्हें चुप करा दिया गया.’
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साथ ही उन्होंने कहा, ‘जेन-जी तेज इंटरनेट चाहता है, सत्ता में बैठे लोग एक मजबूत फायरवॉल चाहते हैं. जेन-जी सस्ता स्मार्टफोन चाहता है, पुरानी पीढ़ी स्मार्टफोन पर टैक्स लगाना चाहती है. जेन-जी फ्रीलांसिंग में ढील चाहते हैं, वहीं बुजुर्ग फ्रीलांसिंग पर और नियम थोपना चाहते हैं. आपके बच्चे विदेश में हैं, आप हर दिन लाखों कमा रहे हैं, आप सत्ता का आनंद भोग रहे हैं, आप बेहतरीन भोजन खाते हैं और साफ पानी पीते हैं, तो आप क्यों परवाह करेंगे?’
पूरे देश में हो रही आलोचना
लेख ने तेजी से पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और वकीलों का ध्यान खींचा है. जोरैन के लेख की चारों तरफ तारीफ की जा रही है. सोशल मीडिया के जरिए जहां जोरैन के लेख की तारीफ हो रही है, वहीं उसे वेबसाइट से हटवाने के फैसले की आलोचना हो रही है. इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने भी इसको लेकर सवाल उठाया है.
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विवाद के बाद क्या बोले जोरैन
लेख पर विवाद के बीच, जोरैन ने एक लिंक्डइन पर पोस्ट कर कहा कि मेरा कोई राजनीतिक झुकाव नहीं है. उन्होंने कहा कि मैं किसी से नफरत नहीं करता, पहले से ही दुनिया में खूब नफरत है. यह लेख मेरे विचार और चीजों को देखने के मेरे नजरिए पर आधारित है. सच हमेशा विवादास्पद होता है. वहीं, जोरैन की मां, फजीला काजी ने भी एक इंस्टाग्राम पोस्ट में साफ किया कि यह लेख किसी विशिष्ट संस्थान को टारगेट करके नहीं लिखा गया, बल्कि राजनीति को युवा कैसे देखते हैं, उनके नजरिए को लेकर सामान्य टिप्पणी थी.











