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मीट, दूध, घी… पाकिस्तानियों की थाली से हो रही ये चीजें गायब, भूखमरी की कगार पर पूरा देश, खाने के पड़े लाले

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में खाद्य असुरक्षा भी तेजी से बढ़ी है. यानी लोगों को स्वस्थ जीवन जीने के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन नहीं मिल पा रहा.

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पाकिस्तान में खाने के सामान की खपत में भारी गिरावट दर्ज की गई है. (Image- ANI)

पाकिस्तान में गंभीर आर्थिक संकट और बेतहाशा महंगाई का सीधा असर अब आम जनता की थाली पर दिखने लगा है. पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के आंकड़ों पर बेस्ड पाकिस्तानी अखबार पाकिस्तान टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले छह वर्षों में देश के गांव और शहरी इलाकों में खाने के सामान की खपत में भारी गिरावट दर्ज की गई है.

बढ़ती महंगाई की वजह से लोग दूध, मीट, गेहूं, चावल और यहां तक कि चाय की खपत में भी भारी कटौती करने को मजबूर हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में खाद्य असुरक्षा भी तेजी से बढ़ी है. यानी लोगों को स्वस्थ जीवन जीने के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन नहीं मिल पा रहा.

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यह भी पढ़ें : ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पाकिस्तान को रुलाने वाली S-400 मिसाइल फिर खरीदेगा भारत? रूस ने दिया बड़ा ऑफर

सस्ते ऑप्शन टटोल रहे लोग

आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान में लोग प्रोटीन और महंगे पोषक तत्वों वाले खाने के सामान जैसे दूध और मीट से दूरी बना रहे हैं. पाकिस्तानी लोगों के घरों में अब मीट उतना नहीं बनता, जितना पहले बनता था. इतना ही नहीं, अनाजों की खपत भी घटी है. वहीं, वनस्पति घी की मंथली खपत में 81 फीसदी का उछाल आया है. पहले यह प्रति परिवार 690 ग्राम था, जो अब बढ़कर 1.25 किलोग्राम हो गया. इससे साफ जाहिर है कि पाकिस्तान के लोग पेट भरने के लिए सस्ते और अधिक कैलोरी वाले ऑप्शन टटोल रहे हैं.

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पाकिस्तानी घरों के बजट पर जैसे-जैसे दबाव बढ़ रहा है, लोग ना केवल खाने की मात्रा कम कर दे रहे हैं, बल्कि खान-पान में शामिल चीजें भी बदल दे रहे हैं.

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क्यों पड़े खाने के लाले?

पाकिस्तान खुद को कृषि प्रधान इकॉनमी मानता है, लेकिन 2021 से वह दूसरे देशों से खाने का सामान आयात करने के लिए मजबूर है. महंगाई की वजह से लोगों की खरीद क्षमता पर असर पड़ा है. मंडियों में अनाज मौजूद होने के बावजूद आम जनता की जेब खाली है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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