Nepal Customs Duty : भारत से नेपाल जाकर खरीदारी करने वाले लोगों और सीमावर्ती इलाकों के निवासियों के लिए एक परेशान करने वाली खबर है. नेपाल सरकार ने भारत से आने वाले सामान पर कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) के नियमों को बेहद सख्त कर दिया है. अब यदि आप भारत से मात्र 100 नेपाली रुपये (करीब 63 भारतीय रुपये) से ज्यादा का सामान लेकर नेपाल की सीमा में प्रवेश करते हैं, तो आपको उस पर टैक्स देना होगा. फैसले के खिलाफ नेपाल के बीरगंज शहर में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है. बीरगंज और उसके आसपास के भारतीय सीमा से लगे इलाकों में तनाव का माहौल है.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 100 रुपये की सीमा इतनी कम है कि एक किलो चीनी या राशन का मामूली सामान लाने पर भी उन्हें टैक्स चुकाना पड़ रहा है. स्थानीय लोग इसे ‘अघोषित नाकेबंदी’ करार दे रहे हैं, क्योंकि इससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और सदियों पुराने सीमा व्यापार पर गहरा असर पड़ा है.
Crazy visuals from Indo-Nepal border as Nepali forces SNATCH even small packets from citizens & TAX them 🤯
— The Analyzer (News Updates🗞️) (@Indian_Analyzer) April 20, 2026
Balen Shah Govt has imposed a custom duty on every item, even as small as ₹100.
– Thousands of Indian traders in Bihar & Uttarakhand are also hit. Bad signs! pic.twitter.com/7DgZNHcXSw
क्यों लिया गया यह फैसला?
नेपाल सरकार और सशस्त्र पुलिस बल (APF) के अधिकारियों का कहना है कि यह कोई नया कानून नहीं है, बल्कि पुराने नियमों को अब सख्ती से लागू किया जा रहा है. सरकार का तर्क है कि बिना टैक्स दिए बड़ी मात्रा में सामान नेपाल ले जाने से सरकार को आर्थिक नुकसान हो रहा था. सीमा पर होने वाली तस्करी और अनौपचारिक व्यापार को रोकने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है.
रोजमर्रा की जरूरतों पर संकट
नेपाल-भारत सीमा पर रहने वाले लोग अक्सर रोटी-बेटी के रिश्तों और सस्ते सामान की वजह से भारतीय बाजारों पर निर्भर रहते हैं. प्रदर्शनकारियों का न्यूज एजेंसी ANI से कहना है कि जन्म से लेकर मृत्यु तक के संस्कारों का सामान और खेती के लिए खाद तक वे भारत से ही लाते हैं. अब सीमा पर पुलिस की कड़ी चेकिंग और टैक्स की मार ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है. बीरगंज बॉर्डर पर चेकिंग की वजह से लंबी कतारें लग रही हैं और व्यापारियों के साथ-साथ आम यात्रियों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.










