BRICS Summit in India: मिडिल ईस्ट की जंग में ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) दुश्मनों की तरह लड़ रहे हैं, लेकिन तीनो दोस्त भी हैं, जिसका सबूत अगले महीने भारत में देखने को मिलेगा। दरअसल, ईरान ने अमेरिका के हमलों के जवाब में सऊदी अरब और UAE में अमेरिकी ठिकानों पर हमले करके तबाही मचाई। इस वजह से दोनों देश ईरान के विरोधी बन गए हैं। UAE तो अब ईरान के खिलाफ जंग में उतरने की प्लानिंग कर रहा है और अमेरिका का साथ देने का ऐलान कर चुका है।
‘ईरान ने सीजफायर का किया अनुरोध’, ट्रंप का एक और दावा; तेहरान से भी तुरंत आया जवाब
ब्रिक्स के सदस्य देश ईरान-UAE और सऊदी अरब
दरअसल, मामला यह है कि युद्ध के मैदान में एक दूसरे के आमने-सामने होने के बावजूद तीनों देश एक टेबल पर बैठकर दोस्तों की तरह चर्चा करने भी दिखेंगे। कहने का मतलब यह है कि बेशक तीनों देशों में अभी तनाव बना हुआ है, लेकिन असल में वे दोस्त हैं और एक इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन के मेंबर हैं, जिसकी बैठक अगले महीने भारत में होने जा रही है। जी हां, भारत में 14-15 मई को 17वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन होने जा रहा है, जिसके मेंबर ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी हैं।
14 और 15 मई को नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट 2026
बता दें कि भारत 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करेगा। नई दिल्ली में 14-15 मई को सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक होगी। भारत की ओर से सदस्य देशों रूस, ईरान, UAE, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका को निमंत्रण भेज दिया गया है। ब्रिक्स ग्रुप के फाउंडर मेंबर ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका है। वहीं साल 2024 में मिस्र, इथोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) एवं साल 2025 में इंडोनेशिया को भी ब्रिक्स ग्रुप का मेंबर बनाया गया था।
ईरान के खिलाफ UAE का बड़ा ऐलान, जंग में अमेरिका का देगा साथ, कहा- होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल बदलना चाहिए
ईरान की ब्रिक्स से युद्ध का विरोध करने की अपील
बता दें कि ब्रिक्स के सदस्य देशों की कुल अनुमानित जनसंख्या 3.9 अरब है, जो वैश्विक जनसंख्या का 48 प्रतिशत है। रूस की ओर से विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव बैठक में भाग लेंगे, इसकी पुष्टि हो चुकी है। गत 14 मार्च को ईरान की अपील के बाद भारत ने बयान जारी किया कि मिडिल ईस्ट के युद्ध पर ब्रिक्स देशों का जॉइंट स्टेटमेंट आना मुश्किल होगा। हालांकि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यह भी कहा कि ब्रिक्स के कुछ देश युद्ध का हिस्सा हैं, इसलिए युद्ध के खिलाफ संयुक्त बयान करना संभव भी नहींं हैं।
BRICS Summit in India: मिडिल ईस्ट की जंग में ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) दुश्मनों की तरह लड़ रहे हैं, लेकिन तीनो दोस्त भी हैं, जिसका सबूत अगले महीने भारत में देखने को मिलेगा। दरअसल, ईरान ने अमेरिका के हमलों के जवाब में सऊदी अरब और UAE में अमेरिकी ठिकानों पर हमले करके तबाही मचाई। इस वजह से दोनों देश ईरान के विरोधी बन गए हैं। UAE तो अब ईरान के खिलाफ जंग में उतरने की प्लानिंग कर रहा है और अमेरिका का साथ देने का ऐलान कर चुका है।
‘ईरान ने सीजफायर का किया अनुरोध’, ट्रंप का एक और दावा; तेहरान से भी तुरंत आया जवाब
ब्रिक्स के सदस्य देश ईरान-UAE और सऊदी अरब
दरअसल, मामला यह है कि युद्ध के मैदान में एक दूसरे के आमने-सामने होने के बावजूद तीनों देश एक टेबल पर बैठकर दोस्तों की तरह चर्चा करने भी दिखेंगे। कहने का मतलब यह है कि बेशक तीनों देशों में अभी तनाव बना हुआ है, लेकिन असल में वे दोस्त हैं और एक इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन के मेंबर हैं, जिसकी बैठक अगले महीने भारत में होने जा रही है। जी हां, भारत में 14-15 मई को 17वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन होने जा रहा है, जिसके मेंबर ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी हैं।
14 और 15 मई को नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट 2026
बता दें कि भारत 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करेगा। नई दिल्ली में 14-15 मई को सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक होगी। भारत की ओर से सदस्य देशों रूस, ईरान, UAE, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका को निमंत्रण भेज दिया गया है। ब्रिक्स ग्रुप के फाउंडर मेंबर ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका है। वहीं साल 2024 में मिस्र, इथोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) एवं साल 2025 में इंडोनेशिया को भी ब्रिक्स ग्रुप का मेंबर बनाया गया था।
ईरान के खिलाफ UAE का बड़ा ऐलान, जंग में अमेरिका का देगा साथ, कहा- होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल बदलना चाहिए
ईरान की ब्रिक्स से युद्ध का विरोध करने की अपील
बता दें कि ब्रिक्स के सदस्य देशों की कुल अनुमानित जनसंख्या 3.9 अरब है, जो वैश्विक जनसंख्या का 48 प्रतिशत है। रूस की ओर से विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव बैठक में भाग लेंगे, इसकी पुष्टि हो चुकी है। गत 14 मार्च को ईरान की अपील के बाद भारत ने बयान जारी किया कि मिडिल ईस्ट के युद्ध पर ब्रिक्स देशों का जॉइंट स्टेटमेंट आना मुश्किल होगा। हालांकि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यह भी कहा कि ब्रिक्स के कुछ देश युद्ध का हिस्सा हैं, इसलिए युद्ध के खिलाफ संयुक्त बयान करना संभव भी नहींं हैं।