---विज्ञापन---

दुनिया

ईरान युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट में फंसे 2000 जहाज, 20000 नाविक के खाने पीने का सामान हो रहा खत्म

ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बीते लंबे समय से लगातार युद्ध जारी है और ये युद्ध अभी भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. इस युद्ध के कारण पूरी दुनिया में संकट छाया हुआ है. मिली जानकारी के अनुसार, 2,000 जहाज, 20,000 नाविक, खाने-पीने का सामान और पानी खत्म होता जा रहा है, और नाकाबंदी का कोई अंत नजर नहीं आ रहा है. जैसे-जैसे मध्य-पूर्व में युद्ध अपने पांचवें हफ्ते में पहुंच रहा है और ईरान की धमकियों के कारण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में आवाजाही ठप हो रही है, हजारों नाविकों की जान दांव पर लगी हुई है.

ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बीते लंबे समय से लगातार युद्ध जारी है और ये युद्ध अभी भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. इस युद्ध के कारण पूरी दुनिया में संकट छाया हुआ है. मिली जानकारी के अनुसार, 2,000 जहाज, 20,000 नाविक, खाने-पीने का सामान और पानी खत्म होता जा रहा है, और नाकाबंदी का कोई अंत नजर नहीं आ रहा है. जैसे-जैसे मध्य-पूर्व में युद्ध अपने पांचवें हफ्ते में पहुंच रहा है और ईरान की धमकियों के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में आवाजाही ठप हो रही है, हजारों नाविकों की जान दांव पर लगी हुई है. ये नाविक फंसे होने के कारण मदद के लिए गुहार लगा रहे हैं; वे न सिर्फ नाकाबंदी की वजह से फंसे हैं, बल्कि समुद्री कानूनों के एक जटिल जाल में भी उलझे हुए हैं. ये कानून जहां एक तरफ वैश्विक व्यापार को सुचारू रूप से चलाने में मदद करते हैं, वहीं दूसरी तरफ नाविकों को ऐसी मुश्किल परिस्थितियों में फंसा देते हैं.

मदद के लिए पुकार

न्यूज एजेंसी AFP की एक रिपोर्ट के अनुसार, नाविकों के लिए बनी हेल्पलाइन पर खाड़ी क्षेत्र में फंसे क्रू सदस्यों के संदेशों की बाढ़ आ गई है. इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन (ITF) की सीफेरर सपोर्ट टीम को भेजे गए एक संदेश में लिखा था, ‘क्रू को जिंदा रखने के लिए तुरंत भोजन, पीने का पानी और रोजमर्रा की जरूरी चीजों की सप्लाई की जरूरत है.’

---विज्ञापन---

ITF के अरब जगत और ईरान के नेटवर्क कोऑर्डिनेटर मोहम्मद अराचेदी, जो नाविकों की तरफ से आने वाली डिमांड को संभालने का काम देखते हैं, उन्होंने कहा, ‘यह एक बहुत ही असाधारण स्थिति है, हर तरफ बहुत ज्यादा घबराहट फैली हुई है.’

अराचेदी ने AFP को बताया, ‘मुझे नाविकों के फोन सुबह दो बजे, तीन बजे भी आते हैं. जैसे ही उन्हें इंटरनेट की सुविधा मिलती है, वे तुरंत मुझे फोन करते हैं.’ उन्होंने आगे बताया, ‘एक नाविक ने तो बहुत ज्यादा घबराकर फोन किया और कहा- ‘हम पर यहां बमबारी हो रही है. हम मरना नहीं चाहते. प्लीज मेरी मदद कीजिए, सर. प्लीज हमें यहां से निकालिए.’

---विज्ञापन---

नाविक जहाज क्यों नहीं छोड़ सकते

टकराव शुरू होने के बाद, इंटरनेशनल बारगेनिंग फोरम ने होर्मुज स्ट्रेट के आस-पास के इलाके को ‘युद्ध क्षेत्र’ घोषित कर दिया. ऐसी स्थिति में, नाविकों को कंपनी के खर्च पर अपने देश लौटने का अधिकार होता है, और जो लोग काम कर रहे हैं, उन्हें दोगुनी सैलरी मिलती है.

लेकिन कई नाविक ऐसे जहाजों पर हैं जिनके साथ ये समझौते नहीं हैं, और होर्मुज की नाकेबंदी का सबसे बुरा असर उन्हीं पर पड़ा है. 18 मार्च के एक ईमेल में, एक नाविक ने बताया कि जहाज का ऑपरेटर, क्रू के जहाज छोड़ने के अनुरोधों को नजरअंदाज कर रहा है. ईमेल में लिखा था, ‘वे हमें माल ढोने का काम (cargo operations) और STS (एक जहाज से दूसरे जहाज पर सामान ले जाने का काम) जारी रखने के लिए मजबूर कर रहे हैं, जबकि हम अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जता चुके हैं और हम एक युद्ध जैसे इलाके में मौजूद हैं. उन्होंने हमें ऐसी स्थिति में फंसा दिया है जहां हमारे पास कोई और विकल्प नहीं बचा है.’

---विज्ञापन---

10 नाविकों की मौत

इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से जहाजों से जुड़ी 19 घटनाओं की पुष्टि हुई है और इन घटनाओं में 10 नाविकों की मौत हो गई है.

ईरान ने उन जहाजों पर हमला करने की धमकी दी है जो इस होर्मुज स्ट्रेट को पार करने की कोशिश करेंगे; इससे दुनिया की तेल और गैस आपूर्ति का पांचवां हिस्सा रुक जाएगा और भारत तथा चीन जैसे एशियाई बाजारों में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ जाएंगी.

---विज्ञापन---

इस होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी के कारण पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ रही है और अमेरिका पर दबाव बढ़ता जा रहा है, जिसने 28 फरवरी को इजरायल के साथ मिलकर ईरान को निशाना बनाया था.

First published on: Apr 01, 2026 09:59 PM

End of Article
संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.
Sponsored Links by Taboola