अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग अब उस खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है जहां एक छोटी सी गलती भी पूरी दुनिया के लिए कयामत साबित हो सकती है. ईरान के बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हुए ताजा हमलों ने खाड़ी देशों की धड़कनें बढ़ा दी हैं क्योंकि एक महीने में इस न्यूक्लियर प्लांट को चौथी बार निशाना बनाया गया है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर बुशेहर पर सीधा प्रहार होता है, तो उससे निकलने वाला रेडियोधर्मी रेडिएशन केवल तेहरान तक सीमित नहीं रहेगा. समुद्री हवाओं और जलधाराओं के जरिए यह घातक प्रभाव खाड़ी के तमाम पड़ोसी देशों की राजधानियों तक फैल सकता है, जिससे लाखों लोगों की जान को खतरा पैदा हो जाएगा.
रेडिएशन का डर और वैश्विक संस्थाओं की चिंता
परमाणु ऊर्जा संगठन ने इस गंभीर स्थिति पर इंटरनेशनल एटॉमिक एजेंसी यानी आईएईए की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं, हालांकि एजेंसी ने पुष्टि की है कि फिलहाल रेडिएशन के स्तर में कोई बढ़ोत्तरी दर्ज नहीं हुई है. आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि युद्ध के दौरान कभी भी न्यूक्लियर साइट्स को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए क्योंकि रेडियोधर्मी रिसाव किसी सीमा को नहीं मानता. विशेषज्ञों का मानना है कि असली खतरा परमाणु बम से ज्यादा किसी मिसाइल के गलती से रिएक्टर कोर या कूलिंग सिस्टम पर गिरने से है. अगर ऐसा हुआ तो चेरनोबिल जैसा बड़ा हादसा हो सकता है जो पूरे क्षेत्र की पारिस्थितिकी और समुद्री जीवन को हमेशा के लिए तबाह कर देगा.
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इजराइल के डिमोना प्लांट पर भी मंडराता खतरा
जंग की यह आग केवल ईरान तक सीमित नहीं है क्योंकि ईरान भी जवाबी कार्रवाई में इजराइल के डिमोना न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर को लगातार टारगेट कर रहा है. मार्च के आखिरी हफ्ते में ईरानी मिसाइलें नेगेव रेगिस्तान के उस इलाके में गिरीं जो डिमोना प्लांट से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. माना जाता है कि इजराइल ने डिमोना प्लांट में 90 से ज्यादा परमाणु बम रखे हैं और अगर किसी ईरानी मिसाइल ने वहां सीधा प्रहार किया, तो होने वाली तबाही हिरोशिमा और नागासाकी से 100 गुना ज्यादा बड़ी हो सकती है. यह स्थिति न केवल इजराइल और ईरान बल्कि पूरे मध्य पूर्व के अस्तित्व को मिटाने की ताकत रखती है, जो दुनिया के लिए सबसे डरावना मंजर होगा.
यूक्रेन से तुलना और भविष्य की भयावह तस्वीर
ईरानी विदेश मंत्री ने बुशेहर पर हो रहे हमलों की तुलना यूक्रेन के जेपोरेजिया न्यूक्लियर पावर प्लांट यानी जेडएनपीपी पर हो रहे हमलों से की है, जहां युद्ध के दौरान कई बार मिसाइलें और ड्रोन गिर चुके हैं. युद्ध के मैदान में न्यूक्लियर प्लांट का ढाल या हथियार के रूप में इस्तेमाल होना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है. टीवी9 की ग्राउंड रिपोर्ट में भी यह देखा गया था कि कैसे परमाणु संयंत्रों के पास मिसाइलों के टुकड़े बिखरे पड़े हैं जो किसी भी वक्त बड़ी तबाही को न्योता दे सकते हैं. फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इन संवेदनशील इलाकों पर टिकी हैं क्योंकि यहां होने वाली एक भी चूक का मतलब होगा सदियों तक रहने वाला जहरीला रेडिएशन और बेगुनाह इंसानों की सामूहिक मौत.










