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भारत का तुर्की पर पलटवार, उठाया ये बड़ा कदम; अब क्या करेगा पाकिस्तान का ‘दोस्त’ तुर्किये?

Turkey India Relations: भारत लगातार तुर्की पर नजर रखे हुए है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की ने जिस तरह अपने ड्रोन और युद्धपोत देकर पाकिस्तान की मदद की है, इसके बाद भारत ने उससे ट्रेड और राजनीतिक स्तर पर दूरी बनानी शुरू कर दी है। अब केंद्र सरकार ने इंडिया में तुर्की के राजदूत का इंट्रोडक्शन कार्यक्रम रद्द कर दिया है। आइए आपको बताते हैं कि ये इंट्रोडक्शन होता क्या है? और किसी देश का राजनयिक भारत में अपने देश का कितना दखल रखता है।

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Turkey India Relations: तुर्किये के दुश्मन देश पाकिस्तान के साथ खुलकर खड़े होने के बाद भारत ने उससे व्यापारिक, सामाजिक और आर्थिक हर पहलुओं पर दूरी बनानी शुरू कर दी है। इसका ताज अपडेट ये है कि विदेश मंत्रालय ने राष्ट्रपति भवन में होने वाले परिचय पत्र कार्यक्रम (इंट्रोडक्शन) रद्द कर दिया है।

राजनायिक के परिचय पत्र प्रस्तुत करने का क्या मतलब है?

दरअसल, इस कार्यक्रम में तुर्की के राजदूत अली मूरत एर्सॉय (ali murat ersoy) को भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना परिचय प्रस्तुत करना था। जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने ये कार्यक्रम अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया है। बता दें ये परिचय-पत्र एक औपचारिक दस्तावेज होता है जो किसी राजनयिक को किसी अन्य संप्रभु राज्य में राजदूत या उच्चायुक्त नियुक्त करता है। अब देखने ये होगा कि बिना परिचय प्रस्तुत पेश किए तुर्की के राजदूत इंडिया में कितने दिन रुक पाएंगे, क्या उन्हें वापस भेजा जाएगा?

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राजदूत और उच्चायुक्त में क्या अंतर होता है

दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए देशों के प्रतिनिधि नियुक्त किए जाते हैं। इन्हें आमतौर पर राजनयिक प्रतिनिधि कहा जाता है। इनमें से दो प्रमुख पद होते हैं राजदूत (Ambassador) और उच्चायुक्त (High Commissioner)। किसी भी देश के राजदूत और उच्चायुक्त दोनों ही राजनयिक होते हैं, लेकिन उनके कार्यक्षेत्र अलग-अलग होते हैं। राजदूत को गैर-राष्ट्रमंडल देशों में भेजा जाता है, जबकि उच्चायुक्त को राष्ट्रमंडल देशों के बीच नियुक्त किया जाता है। दोनों किसी दूसरे देश में अपने देश को रिप्रेजेंटेट करते हैं।

राजदूत होता है दूतावास का प्रमुख

राजदूत वह शीर्ष स्तर का राजनयिक होता है जिसे एक देश दूसरे गैर-कॉमनवेल्थ (Non-Commonwealth) देश में नियुक्त करता है। यह व्यक्ति अपने देश का पूर्ण प्रतिनिधित्व करता है और संबंधित देश की राजधानी में स्थित दूतावास (Embassy) का प्रमुख होता है।

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उच्चायुक्त केवल उच्चायुक्तालय कार्यालय का प्रमुख होता है

उच्चायुक्त वह राजनयिक होता है जिसे एक कॉमनवेल्थ (Commonwealth) देश दूसरे कॉमनवेल्थ देश में नियुक्त करता है। यह भी अपने देश का शीर्ष प्रतिनिधि होता है, लेकिन वह उच्चायुक्तालय (High Commission) नामक कार्यालय का प्रमुख होता है।

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राजदूत और उच्चायुक्त की क्या होती हैं जिम्मेदारियां

चाहे वह राजदूत हो या उच्चायुक्त, दोनों का मुख्य उद्देश्य अपने देश और मेजबान देश के बीच बेहतर संबंध बनाए रखना होता है। इसमें राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और सुरक्षा से जुड़े मामलों का समन्वय शामिल होता है। यहां बता दें कि भारत का अमेरिका में जो प्रमुख प्रतिनिधि है, वह राजदूत कहलाता है, जबकि भारत का श्रीलंका या कनाडा में जो प्रमुख प्रतिनिधि होता है, वह उच्चायुक्त कहलाता है। सिर्फ इसलिए क्योंकि अमेरिका कॉमनवेल्थ का हिस्सा नहीं है और श्रीलंका व कनाडा हैं। राजदूत और उच्चायुक्त दोनों ही देशों के शीर्ष राजनयिक होते हैं, और इनकी शक्तियां और भूमिका लगभग समान होती हैं। दोनों में अंतर केवल ऐतिहासिक और संगठनात्मक कारणों से नाम और तैनाती के देशों के आधार पर होता है।

कॉमनवेल्थ देश कौन से होते हैं?

कॉमनवेल्थ ऑफ नेशंस (Commonwealth of Nations) एक स्वैच्छिक संगठन है जिसमें मुख्यतः वे देश शामिल हैं जो कभी ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा थे। भारत, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, बांग्लादेश, श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका आदि इसके सदस्य हैं।

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गैर-कॉमनवेल्थ देश क्या होता है?

गैर-कॉमनवेल्थ देश वह देश होता है जो कॉमनवेल्थ ऑफ नेशंस (Commonwealth of Nations) का सदस्य नहीं है। जैसे अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, जर्मनी, जापान ब्राजील, सऊदी अरब, इटली और नेपाल आदि। बता दें ये सभी देश कभी ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा नहीं रहे हैं।

ये भी पढ़ें: भारत ने तुर्की की Celebi Aviation पर कसा शिकंजा, कंपनी ने राष्ट्रपति एर्दोगन की बेटी से कनेक्शन पर दिया ये जवाब

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First published on: May 16, 2025 01:47 PM

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About the Author

Amit Kasana

अमित कसाना: पत्रकारिता की दुनिया में एक सिद्धहस्त कहानीकार अमित कसाना सिर्फ खबरें नहीं लिखते बल्कि उन्हें बारीकी से संवारते हैं ताकि पाठकों तक सटीक, ताजा और प्रभावी जानकारी पहुंचे. News 24 में न्यूज एडिटर के रूप में उनकी भूमिका समाचारों को प्रस्तुत करने से कहीं अधिक है, वह उन्हें संदर्भ और दृष्टिकोण के साथ गढ़ते हैं. 2008 में 'दैनिक जागरण' से अपनी यात्रा शुरू करने वाले अमित ने 'दैनिक भास्कर' और 'हिंदुस्तान' जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों में भी अपनी पहचान बनाई. 17 वर्षों के लंबे अनुभव के साथ उन्होंने पत्रकारिता के हर पहलू को बारीकी से समझा, चाहे वह प्रिंट, टेलीविजन या डिजिटल मीडिया हो. राजनीति, अपराध, खेल, मनोरंजन, कानून, ऑटोमोबाइल, लाइफस्टाइल और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग में उनकी गहरी पकड़ है. ब्रेकिंग न्यूज की रोमांचक दुनिया, खोजी पत्रकारिता की गहराई और तथ्यपूर्ण रिपोर्टिंग का संयोजन अमित की कार्यशैली की पहचान है. News 24 में उनका लक्ष्य स्पष्ट है समाचारों को त्वरितता और सटीकता के साथ प्रस्तुत करना ताकि पाठकों को भरोसेमंद और सार्थक जानकारी मिल सके.

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