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अंतरिक्ष में शुरू होने वाला है चीन का राज! ISS के महान युग का हो जाएगा अंत

2030 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के खत्म होने के बाद अंतरिक्ष में चीन का दबदबा बढ़ सकता है. हालांकि, इसरो ने 2035 तक अपना स्वदेशी स्पेस स्टेशन बनाने की तैयारी तेज कर दी है.

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Written By: Raja Alam Updated: Feb 7, 2026 15:59

पिछले 25 सालों से इंसानों का घर रहा अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) अब अपनी अंतिम यात्रा की ओर बढ़ रहा है. साल 2030 में यह विशाल प्रयोगशाला पृथ्वी पर वापस लौट आएगी. नासा ने इसके लिए एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स को जिम्मेदारी दी है, जो एक विशेष यान के जरिए इसे प्रशांत महासागर के ‘पॉइंट नेमो’ नामक इलाके में गिराएगी. यह वही जगह है जो जमीन और इंसानों से सबसे दूर है. ISS का खत्म होना केवल एक मशीन का अंत नहीं है, बल्कि उस शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सहयोग के दौर का समापन है जिसने दुनिया के वैज्ञानिकों को एक साथ जोड़कर रखा था.

अंतरिक्ष में कैसे बढ़ेगा चीन का दबदबा?

ISS के हटने के बाद पृथ्वी की कक्षा में चीन का ‘तियांगोंग’ एकमात्र एक्टिव सरकारी स्पेस स्टेशन रह जाएगा. हालांकि अमेरिका अब पूरी तरह निजी कंपनियों पर भरोसा कर रहा है. जेफ बेजोस की ‘ब्लू ओरिजिन’ और ‘एक्सिओम स्पेस’ जैसी कंपनियां अपने खुद के स्टेशन बनाने में जुटी हैं. आने वाले समय में अंतरिक्ष स्टेशन एक बिजनेस मॉडल की तरह काम करेंगे, जहाँ सरकारें केवल अपने यात्रियों को भेजने के लिए सेवाएं लेंगी. इसके साथ ही अब दुनिया का ध्यान चंद्रमा पर बेस कैंप बनाने की ओर भी तेजी से बढ़ रहा है, जहाँ अमेरिका और चीन के बीच बड़ी होड़ देखने को मिल सकती है.

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क्या है इसरो की बड़ी तैयारी?

चीन के दबदबे को चुनौती देने के लिए भारत भी पूरी तरह तैयार है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 2035 तक अपना खुद का ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ बनाने का लक्ष्य रखा है. इसकी शुरुआत 2028 में पहले मॉड्यूल (BAS-1) के लॉन्च के साथ होगी. शुरुआत में यह स्टेशन करीब 20 से 25 टन का होगा, जिसमें 2 से 4 अंतरिक्ष यात्री एक साथ रहकर रिसर्च कर सकेंगे. भारत इसके लिए ‘स्पेस डॉकिंग’ जैसी जटिल तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है, जिससे दो यान अंतरिक्ष में आपस में जुड़ सकें. यह भारत के अंतरिक्ष इतिहास का सबसे बड़ा और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट होने वाला है.

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आत्मनिर्भर होगा भारत का मिशन

भारत का अपना स्टेशन होने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हमें किसी भी प्रयोग के लिए दूसरे देशों का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा. यह प्रोजेक्ट न केवल गगनयान मिशन को मजबूती देगा, बल्कि 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय यात्री को भेजने के सपने की नींव भी रखेगा. भारत का यह स्टेशन पूरी तरह स्वदेशी होगा और इसे हमारे सबसे ताकतवर रॉकेट LVM3 के नए वर्जन से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. इस कदम के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा हो जाएगा, जिनके पास अंतरिक्ष में अपनी खुद की जमीन और पहचान होगी.

First published on: Feb 07, 2026 03:59 PM

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