बच्चों को इंटरनेट के खतरों से बचाने के लिए दुनिया भर में कड़े नियम बनाए जा रहे हैं. मलेशिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाई है, लेकिन वह ऐसा करने वाला पहला देश नहीं है. जानिए ऑस्ट्रेलिया से लेकर ब्राजील तक, किन देशों में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर पहले से ही सख्त पाबंदी लागू है.
मलेशिया में क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत

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मलेशिया में सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नियम में बदलाव किया गया है. सरकार का मकसद है कि वो बच्चों को खराब कंटेंट, साइबर बुलिंग और ज्यादा समय ऑनलाइन रहने वाली आदतों से बचाए. सरकार का कहना है कि हम बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह नहीं रोक रहे, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखना चाहते हैं.
नए नियम के मुताबिक, सजा या जुर्माना

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इस नए नियम के मुताबिक, अगर बच्चे किसी तरह अकाउंट बना लेते हैं तो उनके माता-पिता को सजा नहीं दी जाएगी. सरकार के इस नियम तोड़ने वाली कंपनियों पर 25 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लग सकता है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अब ऐसी सुविधाएं बनानी होंगी जो बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाली चीजों से बचाएं. इस नियम को लागू करने के लिए उन्हें कुछ समय भी दिया गया. 16 साल से कम उम्र के बच्चों को अकाउंट बनाने से रोकना जरूरी है. इसलिए सोशल मीडिया से दूरी बनाने के लिए सरकार की तरफ से ये फैसला लिया गया है.
बच्चों को रोकने वाला ऑस्ट्रेलिया पहला देश

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सोशल मीडिया के ऐक्सेस से बच्चों की दूरी बढ़ाने के लिए दुनिया के पहले देश ऑस्ट्रेलिया ने ये फैसला पहले लिया. यहां 10 दिसंबर 2025 से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगा दिया गया. ऑस्ट्रेलिया में इस उम्र के बच्चों के इंस्टाग्राम, फेसबुक, स्नैपचैट, टिकटॉक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सभी अकाउंट्स को बंद कर दिया गया.
ब्राजील और इंडोनेशिया में भी बदलाव

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ब्राजील और इंडोनेशिया ने भी अपने यहां बच्चों के ऑनलाइन सुरक्षा मानकों में बड़ा बदलाव किया है. इन दोनों देशों में 16 साल तक के बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस को लेकर कड़े एज-वेरिफिकेशन (उम्र सत्यापन) के नियम लागू हैं. बिना उम्र की सही जांच के कोई भी बच्चा इन प्लेटफॉर्म्स पर अपनी आईडी नहीं बना सकता. यूरोप में भी बच्चों पर सोशल मीडिया के असर को लेकर गहरी चिंता है.
फ्रांस और पोलैंड में भी तैयारी

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फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने का प्रस्ताव संसद से पास हो चुका है. वहीं, पोलैंड सरकार भी इसी साल सितंबर से 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाने वाले एक नए कानून पर तेजी से काम कर रही है. इसके अलावा डेनमार्क, स्पेन, यूके और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी 15 से 16 साल की उम्र के बच्चों के लिए अपने स्तर पर इसी तरह के कड़े नियम और एज-वेरिफिकेशन सिस्टम लागू करने की तैयारी में हैं. इन सभी देशों का एकमात्र मकसद बच्चों को साइबर बुलिंग, अश्लील कंटेंट और स्क्रीन की लत से बचाना है.
मेटा की तरफ से क्या दी गई है चेतावनी?

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मेटा का कहना है कि मलेशिया और दूसरे देशों की तरफ से उठाए गए इस फैसले से बच्चे सुरक्षित ऐप्स को छोड़कर दूसरी जगह अपना अकाउंट बना सकते हैं. मेटा ने संभावना जताई है कि ऐसा हो सकता है कि बच्चे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को पूरी तरह नहीं छोड़ेंगे और बिना नियंत्रण वाले प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं. ऐसे में ऑनलाइन खतरों से उनकी दूसरी कम होने की बजाय बढ़ जाएगी.