होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है. इस बार वजह सिर्फ तेल या समुद्री व्यापार नहीं, बल्कि नया ट्रांजिट रूट है, जिसे लेकर ईरान और ओमान के बीच टेंशन बढ़ रही है. हालात ऐसे बन रहे हैं कि लोग ये सवाल पूछने लगे हैं कि क्या दोनों पड़ोसी देशों के रिश्तों में नई खटास आ सकती है. दरअसल, हाल के महीनों में होर्मुज में सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के कारण कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई. इसके बाद ओमान और कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक वैकल्पिक ट्रांजिट रूट का प्रस्ताव रखा. इस नए मार्ग का मकसद समुद्री व्यापार को जारी रखना और जोखिम कम करना बताया गया.
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ईरान ने जताया विरोध
ईरान ने इस प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताया है. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े किसी भी नए समुद्री मार्ग या ट्रांजिट व्यवस्था पर उसकी सहमति जरूरी है. उनका दावा है कि ये इलाका उसकी समुद्री सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, इसलिए किसी भी नए रूट को उसकी मंजूरी के बिना लागू नहीं किया जा सकता. दूसरी ओर, ओमान की ओर से इस रूट को समुद्री सुरक्षा और ग्लोबव व्यापार के लिए उठाया गया कदम माना जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों का भी मानना है कि अगर जहाजों को सुरक्षित विकल्प मिलते हैं तो तेल और बाकी जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है. वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर सीधा असर डाल सकता है.
किसके पास कितनी ताकत?
ईरान के पास काफी ताकतवर सेना है, जो दुनिया में 14वें नंबर पर आती है. ईरान के पास करीब 6.10 लाख एक्टिव सैनिक हैं ऍर 3.50 लाख रिजर्व हैं. ईरान की पैरामिलिट्री फोर्स यानी IRGC भी काफी ताकतवर है. ईरान के पास बड़ी मात्रा में बैलिस्टिक मिसाइलें, ड्रोन और एंटी-शिप मिसाइलें हैं. एयरफोर्स में 188 फाइटर जेट्स हैं. वहीं, ओमान की अगर बात करें तो उसके पास काफी छोटी सेना है. ओमान के पास करीब 50 हजार से 1 लाख एक्टिव सैनिक हैं. कुल मिलाकर अगर ईरान ओमान से कहीं ज्यादा ताकतवर है. अगर दोनों में युद्ध होता है तो ओमान में भारी तबाही हो सकती है. एक अच्छी बात ये है कि ओमान अमेरिका, ब्रिटेन और GCC देशों का सहयोगी है, इसलिए युद्ध के वक्त उसे मदद मिल सकती है.
ये भी पढ़ें: ‘US-ईरान की सुलह कराने गए आसिम मुनीर को मारने की फिराक में था मोसाद…’, पत्रकार के दावे से हड़कंप
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है. इस बार वजह सिर्फ तेल या समुद्री व्यापार नहीं, बल्कि नया ट्रांजिट रूट है, जिसे लेकर ईरान और ओमान के बीच टेंशन बढ़ रही है. हालात ऐसे बन रहे हैं कि लोग ये सवाल पूछने लगे हैं कि क्या दोनों पड़ोसी देशों के रिश्तों में नई खटास आ सकती है. दरअसल, हाल के महीनों में होर्मुज में सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के कारण कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई. इसके बाद ओमान और कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक वैकल्पिक ट्रांजिट रूट का प्रस्ताव रखा. इस नए मार्ग का मकसद समुद्री व्यापार को जारी रखना और जोखिम कम करना बताया गया.
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ईरान ने जताया विरोध
ईरान ने इस प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताया है. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े किसी भी नए समुद्री मार्ग या ट्रांजिट व्यवस्था पर उसकी सहमति जरूरी है. उनका दावा है कि ये इलाका उसकी समुद्री सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, इसलिए किसी भी नए रूट को उसकी मंजूरी के बिना लागू नहीं किया जा सकता. दूसरी ओर, ओमान की ओर से इस रूट को समुद्री सुरक्षा और ग्लोबव व्यापार के लिए उठाया गया कदम माना जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों का भी मानना है कि अगर जहाजों को सुरक्षित विकल्प मिलते हैं तो तेल और बाकी जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है. वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर सीधा असर डाल सकता है.
किसके पास कितनी ताकत?
ईरान के पास काफी ताकतवर सेना है, जो दुनिया में 14वें नंबर पर आती है. ईरान के पास करीब 6.10 लाख एक्टिव सैनिक हैं ऍर 3.50 लाख रिजर्व हैं. ईरान की पैरामिलिट्री फोर्स यानी IRGC भी काफी ताकतवर है. ईरान के पास बड़ी मात्रा में बैलिस्टिक मिसाइलें, ड्रोन और एंटी-शिप मिसाइलें हैं. एयरफोर्स में 188 फाइटर जेट्स हैं. वहीं, ओमान की अगर बात करें तो उसके पास काफी छोटी सेना है. ओमान के पास करीब 50 हजार से 1 लाख एक्टिव सैनिक हैं. कुल मिलाकर अगर ईरान ओमान से कहीं ज्यादा ताकतवर है. अगर दोनों में युद्ध होता है तो ओमान में भारी तबाही हो सकती है. एक अच्छी बात ये है कि ओमान अमेरिका, ब्रिटेन और GCC देशों का सहयोगी है, इसलिए युद्ध के वक्त उसे मदद मिल सकती है.
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