ईरान की जंग का सीक्रेट कौन कर रहा लीक? ट्रंप ने टॉप जनरलों का कराया लाई डिटेक्टर टेस्ट

Lie Detector Test: स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी जारी है, लेकिन इस बीच खबर आई है कि ईरान को लेकर यूएस की सीक्रेट इंफॉर्मेशन मीडिया में लीक हुई थी, जिसका पता लगाने के लिए ट्रंप प्रशासन ने संदिग्ध कर्मचारियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराया था.

Donald Trump

डोनाल्ड ट्रंप को अपने कर्मचारियों पर शक (AI Image)

विज्ञापन

Who Is Leaking Iran War Secrets To Media: मीडिया में सीक्रेट जानकारी लीक होने के शक की जांच के तहत यूएस जॉइंट स्टाफ के साथ काम करने वाले तकरीबन 50 मिलिट्री और सिविलियन कर्मचारियों का पॉलीग्राफ टेस्ट किया गया है. ये टेस्ट अगस्त 2026 में किए गए थे, जब कई रिपोर्टों में अमेरिका के जरूरी हथियारों, जैसे लंबी दूरी की मिसाइलें और पैट्रियट एयर-डिफेंस इंटरसेप्टर की घटती सप्लाई को लेकर चिंता जताई गई थी.

मुखबिर का पता लगाने की कोशिश

इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के मुताबिक, जांचकर्ता ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या ईरान जंग से जुड़े सेंसिटिव इंफॉरमेशन जर्नलिस्ट्स के साथ शेयर की गई थी. जॉइंट स्टाफ, जो यूएस मिलिट्री के सीनियर लीडर्स की मदद करता है, में तकरीबन 1500 से 2000 अधिकारी और सिविलियन अधिकारी होते हैं.

विज्ञापन

जांच का फोकस क्या रहा?

पूछताछ किए गए लोगों में मिलिट्री अधिकारी और सिविलियन कर्मचारी दोनों शामिल थे. जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे थे कि क्या किसी ने प्रेस के सदस्यों को गोपनीय जानकारी दी थी, खासकर US के गोला-बारूद और मिसाइल स्टॉक से जुड़ी जानकारी.

ये जांच ईरान के साथ संघर्ष के बाद जरूरी हथियारों की अवेलेबिलिटी पर बढ़ते फओकस के बीच हो रही है. मीडिया रिपोर्ट्स में संभावित कमी की ओर इशारा किया गया था, जिसके बाद अधिकारियों ने इंफॉर्मेशन के सोर्सेज की जांच करने का फैसला किया.

पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पारनेल ने न्यूयॉर्क टाइम्स से बात करते हुए कहा कि विभाग इंटरनल कर्मचारियों या जांच के मामलों पर कोई कमेंट नहीं करता है. हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी के गलत तरीके सामने आने को गंभीरता से लेते हैं और ऐसे मामलों की जांच करते हैं.

विज्ञापन

शॉन पारनेल ने कहा, ‘गोपनीय जानकारी को सुरक्षित रखना अमेरिका और दुनिया भर में तैनात हमारे सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुत जरूरी है.’ इस जांच का मकसद सेंसिटिव मिलिट्री इंफॉर्मेशन और ऑपरेशनल सिक्योरिटी की हिफाजत करते हुए लीक के सोर्स का पता लगाना है.

लाइ डिटेक्टर टेस्ट क्या है?

लाइ डिटेक्टर टेस्ट को पॉलीग्राफ टेस्ट भी कहा जाता है, एक ऐसा प्रोसीजर है जिसका इस्तेमाल ये पता लगाने के लिए किया जाता है कि कोई शख्स गुमराह करने वाले जवाब तो नहीं दे रहा है. टेस्ट के दौरान, शरीर पर सेंसर लगाए जाते हैं ताकि सवालों के जवाब देते समय दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर, सांस लेने की गति और पसीना आने जैसे शारीरिक बदलावों पर नजर रखी जा सके. इसके पीछे की सोच ये है कि झूठ बोलने पर तनाव या घबराहट के कारण मापने योग्य शारीरिक बदलाव हो सकते हैं.

विज्ञापन

हालांकि पॉलीग्राफ सीधे तौर पर झूठ का पता नहीं लगाता है और इसके नतीजे डर, घबराहट या दूसरे फैक्टर्स से अफेक्ट हो सकते हैं. इसलिए, इसे आम तौर पर जांच का एक जरिया माना जाता है, न कि इस बात का पक्का सबूत कि कोई इंसान झूठ बोल रहा है. यही वजह है कि ज्यादातर देशों में इसे सुराग हासिल करने के लिए यूज किया जाता है, लेकिन कोर्ट में ये एडमिसिबल नहीं होता.

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
... और पढ़ें

/ताज़ा खबरें

विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ