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ईरान से आने वाली है बड़ी खुशखबरी! होर्मुज या पीस डील को छोड़िए, इस फैसले से भारत को होंगे 3 बंपर फायदे

इस ऐतिहासिक फैसले के सार्वजनिक होते ही वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड के दाम 3% से टूटकर 77 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए किसी बड़ी खुशखबरी से कम नहीं है.

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लंबे समय से एक-दूसरे के विरोधी रहे अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिरोध अब खात्मे की ओर बढ़ता दिख रहा है. अच्छी खबर ये है कि वाशिंगटन ने तेहरान को एक बड़ी राहत देते हुए 21 अगस्त 2026 तक कच्चे तेल के एक्सपोर्ट पर लगीं सख्त पाबंदियों को अस्थाई रूप से हटा लिया है. स्विट्जरलैंड में हुई उच्च स्तरीय वार्ता के बाद अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान को अगले 60 दिनों के लिए यह स्पेशल छूट देने का ऐलान किया है. इसके बदले में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और अपनी न्यूक्लियर साइट्स पर IAEA के निरीक्षकों की वापसी की गारंटी दी है.

इस ऐतिहासिक फैसले के सार्वजनिक होते ही वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड के दाम 3% से टूटकर 77 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए किसी बड़ी खुशखबरी से कम नहीं है. इस भू-राजनीतिक बदलाव से भारत को मुख्य रूप से तीन बड़े बंपर फायदे होने की उम्मीद है:

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  1. सस्ते तेल का नया विकल्प
    वर्ष 2018 में ईरान पर दोबारा कड़े अमेरिकी प्रतिबंध लगने से पहले भारत उसका दूसरा सबसे बड़ा खरीदार था और अपनी जरूरत का 10% तेल वहीं से मंगाता था. वर्तमान में भारत सबसे ज्यादा तेल रूस से खरीद रहा है, लेकिन हालिया भू-राजनीतिक तनाव के चलते उस पर दबाव बढ़ रहा था. ऐसे में ईरानी कच्चे तेल की बाजार में वैध वापसी से भारत को एक मजबूत विकल्प मिल गया है. जिससे घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी.
  2. 90 दिनों का बंपर क्रेडिट पीरियड
    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरानी तेल व्यापार की सबसे बड़ी खासियत इसका लचीलापन रहा है. जहां अन्य वैश्विक तेल उत्पादक देश महज 30 दिनों का समय देते हैं, वहीं ईरान, भारत को 60 से 90 दिनों का क्रेडिट पीरियड (उधारी की अवधि) देता रहा है. इसके अतिरिक्त, भारत से ईरान की भौगोलिक दूरी कम होने के कारण ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी काफी कम आता है.
  3. व्यापारिक कॉरिडोर को मिलेगी नई रफ्तार
    सामरिक दृष्टिकोण से भारत के लिए ईरान का चाबहार पोर्ट बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पाकिस्तान को बाईपास करके सीधे अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने का सीधा मार्ग प्रदान करता है. अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से अब तक कई विदेशी बैंक और बड़ी शिपिंग कंपनियां इस प्रोजेक्ट से दूरी बना रही थीं. मगर अब, जब वाशिंगटन ने बैंकिंग और शिपिंग लेनदेन को हरी झंडी दे दी है, तो चाबहार के रास्ते भारत का ‘इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ (INSTC) और मध्य एशियाई देशों के साथ व्यापारिक संबंध बेहद तीव्र गति से आगे बढ़ेंगे.

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First published on: Jun 23, 2026 09:01 PM

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