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डोनाल्ड ट्रंप का यूटर्न, यूरोपीय देशों पर टैरिफ लिया वापस, बोले- तैयार है ग्रीनलैंड पर डील का फ्रेमवर्क

US Greenland Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने आखिरकार यूरोपीय देशों पर लगाए गए टैरिफ से पलट ही गए. नाटो देशों की ट्रेड डील सस्पेंड करने की धमकी के बाद उन्हें ऐसा करना ही पड़ा. साथ ही उन्होंने ग्रीनलैंड के लिए फ्रेमवर्क तैयार होने का दावा किया और कहा कि इसे जल्दी ही मंजूर कराकर लागू किया जाएगा.

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Edited By : Khushbu Goyal Updated: Jan 22, 2026 06:29
Donald Trump
डोनाल्ड ट्रंप किसी भी कीमत पर ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहते हैं.

Donald Trump Greenland Row: ग्रीनलैंड के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक फ्रेमवर्क तैयार कर लिया है. साथ ही उन्होंने यूरोपीय देशों पर लगाया टैरिफ भी वापस ले लिया है. अब यूरोपीय देशों को एक फरवरी 2026 से लगा 10 प्रतिशत टैरिफ अमेरिका को नहीं देना होगा. वहीं ट्रंप के तेवर नरम पड़ने का प्रमुख कारण यूरोपीय संघ है, जिसमें शामिल देशों ने अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील सस्पेंड करने का ऐलान किया था.

अगर ऐसा होता तो अमेरिका का आर्थिक नुकसान होता, इसलिए उन्होंने यूटर्न लेते हुए NATO प्रमुख मार्क रुट्टे के साथ ग्रीनलैंड पर फ्रेमवर्क डील पर सहमति जताई. स्विटजरलैंड के दावोस में चल रही विश्व आर्थिक मंच की बैठक में ट्रंप और रुट्टे की मुलाकात हुई थी, जिसमें ट्रैरिफ वापसी और ग्रीनलैंड पर डील पर सहमति बनी.

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नाटो महासचिव से दावोस में हुई थी मीटिंग

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि नाटो के महासचिव मार्क रुट्टे के साथ बहुत अच्छी मुलाकात हुई और बैठक में उनके साथ हुई बातचीत में ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र के भविष्य को लेकर डील का फ्रेमवर्क तैयार कर लिया है. अगर यह समझौता हो जाता है तो यह अमेरिका और सभी नाटो देशों के लिए बहुत फायदेमंद होगा.

इसलिए 1 फरवरी से यूरोपीय देशों पर लागू होने वाले टैरिफ नहीं लगाऊंगा. ग्रीनलैंड को लेकर चर्चा चल रही है. जैसे-जैसे चर्चा आगे बढ़ेगी और जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ डील पर चर्चा के लिए जिम्मेदार होंगे और वे सीधे मुझे रिपोर्ट करेंगे.

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नाटो महासचिव ने किया ट्रंप को आश्वस्त

नाटो के महासचिव मार्क रुट्टे ने राष्ट्रपति ट्रंप से कहा कि कल और आज आपसे एक बात सुनी. आप इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे कि अगर अमेरिका पर हमला होता है तो यूरोपीय देश उसकी मदद के लिए आगे आएंगे या नहीं. उन्होंने कहा कि मैं आपको बता दूं, वे आएंगे. जैसा कि आप जानते हैं, उन्होंने अफगानिस्तान के समय में ऐसा किया था.

हर 2 अमेरिकी सैनिकों के लिए जिन्होंने अपनी जान गंवाई, नाटो के किसी अन्य देश का सैनिक अपने परिवार के पास वापस नहीं लौट सका, नीदरलैंड और डेनमार्क से, विशेष रूप से अन्य देशों को लेकर आप पूरी तरह आश्वस्त रह सकते हैं कि अगर अमेरिका पर हमला होता है तो आपके सहयोगी आपके साथ होंगे. अगर आप ऐसा नहीं सोचते हैं तो मुझे दुख होता है.

First published on: Jan 22, 2026 06:07 AM

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