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सोमवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं के साथ होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट को दोबारा शेयर किया, जिसमें कहा गया है कि यूक्रेन को रूस को कुछ जमीन दे देनी चाहिए। इस पोस्ट के मुताबिक, अगर जंग लंबी चली तो यूक्रेन और ज्यादा जमीन खो सकता है।
ट्रंप की यह बात तब सामने आई है जब उनकी टीम को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन को जंग रोकने (ceasefire) के लिए तैयार न कर पाने की आलोचना झेलनी पड़ रही है। कई लोग मानते हैं कि ट्रंप अब जंग को पूरी तरह खत्म करने की बात कर रहे हैं, न कि सिर्फ अस्थायी रूप से रुकवाने की। उनका यह कदम उनकी नई रणनीति का हिस्सा लगता है, जिसमें वे यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि जंग रोकने का समझौता सही नहीं है। सोमवार की बैठक में ट्रंप यूरोपीय नेताओं और जेलेंस्की के साथ इस मुद्दे पर क्या फैसला लेते हैं, यह देखना होगा।
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी ट्रंप के बयान का समर्थन किया है। रुबियो ने कहा कि जंग रोकने के समझौते पर हर दिन नजर रखनी होगी, ताकि हालात बिगड़ने न पाएं। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद का उदाहरण दिया, जहां शांति बनाए रखने के लिए लगातार कोशिश करनी पड़ती है। रुबियो का कहना है कि यूक्रेन और रूस के मामले में भी ऐसा ही करना होगा, वरना हालात और खराब हो सकते हैं।
ट्रंप के इस बयान पर लोगों की अलग-अलग राय है। कुछ लोग इसे समझदारी भरा कदम मानते हैं। उनका कहना है कि अगर यूक्रेन कुछ जमीन देकर जंग रोक देता है, तो लाखों लोगों की जान बच सकती है और तबाही से बचा जा सकता है। दूसरी ओर, कई लोग इसे रूस के आगे झुकना कह रहे हैं। उनका मानना है कि ऐसा करना यूक्रेन की आजादी और सम्मान के खिलाफ होगा। यूक्रेन के लोग भी इस बात से नाराज हैं कि उनकी जमीन को लेकर बिना पूछे फैसले लिए जा रहे हैं।
सोमवार की बैठक बहुत अहम है, क्योंकि इसमें यूक्रेन, यूरोप और अमेरिका के नेता मिलकर भविष्य की योजना बनाएंगे। यूरोपीय देश यूक्रेन का साथ दे रहे हैं और वे नहीं चाहते कि रूस को कोई फायदा हो, लेकिन ट्रंप का रुख कुछ अलग है, जो इस बैठक में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन सकता है। अब ट्रंप अपने विचारों को लागू कर पाएंगे या यूरोपीय नेताओं के दबाव में आ जाएंगे, यह समय बताएगा।
यह जंग पिछले कई महीनों से चल रही है और इससे दोनों देशों को भारी नुकसान हुआ है। लाखों लोग बेघर हुए हैं और अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है। अगर ट्रंप की सलाह मानी जाती है, तो शायद जंग जल्दी खत्म हो जाए, लेकिन इसका असर यूक्रेन की राजनीति और भविष्य पर लंबे समय तक रहेगा। दूसरी ओर, अगर जंग जारी रही तो और जान-माल का नुकसान होगा। ऐसे में सोमवार की बैठक से निकलने वाला फैसला दुनियाभर की नजरों में होगा।

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