दुनिया के सबसे ऊंचे डैम का रिकॉर्ड अब चीन के नाम, हर साल बनेगी 7.7 अरब यूनिट बिजली, जानिए कहां बनाया?

पहाड़ों के बीच और बेहद दुर्गम और ठंडे इलाके में स्थित होने के कारण इस प्रोजेक्ट को पूरा करना इंजीनियरों के लिए एक बड़ी चुनौती था. कड़ाके की ठंड और गहरी नदी के तेज बहाव से निपटने के लिए चीनी इंजीनियरों ने अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लिया.

China tallest dam

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इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में चीन ने एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया है. चीन ने दुनिया के सबसे ऊंचे बांध (डैम) वाले ‘शुआंगजियांगकोउ हाइड्रोपावर स्टेशन’ की पहली यूनिट को सफलतापूर्वक बिजली ग्रिड से जोड़ दिया है. यह ऐतिहासिक उपलब्धि चीन के सिचुआन प्रांत में हासिल की गई है. इस विशालकाय बांध की ऊंचाई 315 मीटर है, जिसके साथ ही इसने दुनिया के सबसे ऊंचे डैम का नया वैश्विक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है.

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4.6 करोड़ क्यूबिक मीटर सामान से तैयार हुआ महाकाय ढांचा


शुआंगजियांगकोउ जलविद्युत परियोजना के निर्माण की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे तैयार करने में 4.6 करोड़ क्यूबिक मीटर से अधिक निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया है. आपको जानकर हैरानी होगी कि यह मात्रा इतनी विशाल है कि इससे पूरी पृथ्वी की भूमध्य रेखा (इक्वेटर) के चारों ओर करीब एक मीटर ऊंची दीवार आसानी से खड़ी की जा सकती है.

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बेहद मुश्किल हालात में इंजीनियरिंग का कमाल


पहाड़ों के बीच और बेहद दुर्गम और ठंडे इलाके में स्थित होने के कारण इस प्रोजेक्ट को पूरा करना इंजीनियरों के लिए एक बड़ी चुनौती था. कड़ाके की ठंड और गहरी नदी के तेज बहाव से निपटने के लिए चीनी इंजीनियरों ने अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लिया. इसमें मुख्य रूप से ‘हेलियोस्टैट बेस्ड सरफेस हीटिंग’ और पूरी तरह से बंद ‘एयर-सपोर्टेड मेम्ब्रेन सिस्टम’ जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया, जिसने निर्माण कार्य को प्रतिकूल मौसम में भी सुचारू रखा.

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7.7 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन


इस नए हाइड्रोपावर स्टेशन की कुल स्थापित क्षमता 20 लाख किलोवॉट (2,000 मेगावाट) है. जब यह परियोजना पूरी तरह से अपनी क्षमता के साथ काम करना शुरू कर देगी, तब इससे हर साल औसतन 7.7 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन होगा. चीन के ऊर्जा क्षेत्र के लिए यह प्रोजेक्ट गेम-चेंजर साबित होने वाला है. इस प्लांट से होने वाले भारी बिजली उत्पादन के कारण न केवल स्वच्छ और हरित ऊर्जा (क्लीन एनर्जी) की आपूर्ति बढ़ेगी, बल्कि बिजली बनाने के लिए कोयले जैसे पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर चीन की निर्भरता में भी उल्लेखनीय कमी आएगी. यह कदम कार्बन उत्सर्जन को घटाने के वैश्विक प्रयासों में भी मददगार साबित होगा.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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