बांग्लादेश की राजनीति एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है. चुनाव में तारिक रहमान की BNP की शानदार जीत के बाद देश के केयरटेकर प्रधानमंत्री रहे मोहम्मद यूनुस को अब अपनी कुर्सी छोड़नी होगी. उनके जाने के साथ ही ये सवाल उठने लगा है कि अब वो आगे क्या करेंगे और बांग्लादेश की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी. मोहम्मद यूनुस आज के चुनाव के बाद जुलाई नेशनल चार्टर-2025 को लागू करवाने की कोशिश करेंगे, जिसका फैसला भी आज ही होना है. अगर लोगों का वोट 'हां' में मिलता है तो इसके जरिए कुछ कानूनी सुधार पैकेज लागू करने की कोशिश होगी. जैसे शेख हसीना के खिलाफ हुए प्रदर्शन को संवैधानिक मान्यता देना, दो सदनों वाली संसद बनाना, PMO के लिए शक्तियों की सीमा तय करना
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युनूस का कार्यकाल कैसा रहा?
राजनीतिक संकट और बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद बांग्लादेश में अंतरिम सरकार बनाई गई थी. उस समय मोहम्मद यूनुस को केयरटेकर प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. उनका मकसद देश में स्थिरता लाना और निष्पक्ष चुनाव कराना था. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित अर्थशास्त्री होने की वजह से उन्हें एक निष्पक्ष चेहरा माना गया. केयरटेकर प्रधानमंत्री के रूप में यूनुस ने प्रशासनिक सुधारों पर जोर दिया. उन्होंने कहा था कि बांग्लादेश को भ्रष्टाचार-मुक्त और जवाबदेह शासन की जरूरत है. हालांकि, उनके कार्यकाल में राजनीतिक दलों के बीच तनाव बना रहा और कई फैसलों को लेकर विवाद भी हुए। इसके बावजूद, चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता रही.
यूनुस अब क्या करेंगे?
पद छोड़ने के बाद यूनुस के राजनीति से पूरी तरह दूर जाने की संभावना जताई जा रही है. माना जा रहा है कि वो फिर से सामाजिक सुधार, शिक्षा और गरीबी उन्मूलन से जुड़े कामों पर ध्यान देंगे. यूनुस पहले ही साफ कर चुके हैं कि वो सत्ता की राजनीति में लंबे समय तक बने रहने के पक्ष में नहीं हैं. यूनुस के हटने के बाद अब चर्चा का केंद्र बन गए हैं तारिक रहमान. उन्हें बांग्लादेश की अगली राजनीतिक व्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाला नेता माना जा रहा है. उनके समर्थकों का कहना है कि अब देश को स्थायी और मजबूत सरकार की जरूरत है, जो केवल चुनाव से चुनी गई सरकार ही दे सकती है. अब बांग्लादेश के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना और आर्थिक हालात को मजबूत करना है. आने वाले महीने देश के भविष्य के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं.
ये भी पढ़ें: कौन हैं तारिक रहमान? राजनीति में डेब्यू करते ही बनेंगे बांग्लादेश के नए ‘कैप्टन’
बांग्लादेश की राजनीति एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है. चुनाव में तारिक रहमान की BNP की शानदार जीत के बाद देश के केयरटेकर प्रधानमंत्री रहे मोहम्मद यूनुस को अब अपनी कुर्सी छोड़नी होगी. उनके जाने के साथ ही ये सवाल उठने लगा है कि अब वो आगे क्या करेंगे और बांग्लादेश की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी. मोहम्मद यूनुस आज के चुनाव के बाद जुलाई नेशनल चार्टर-2025 को लागू करवाने की कोशिश करेंगे, जिसका फैसला भी आज ही होना है. अगर लोगों का वोट ‘हां’ में मिलता है तो इसके जरिए कुछ कानूनी सुधार पैकेज लागू करने की कोशिश होगी. जैसे शेख हसीना के खिलाफ हुए प्रदर्शन को संवैधानिक मान्यता देना, दो सदनों वाली संसद बनाना, PMO के लिए शक्तियों की सीमा तय करना
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युनूस का कार्यकाल कैसा रहा?
राजनीतिक संकट और बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद बांग्लादेश में अंतरिम सरकार बनाई गई थी. उस समय मोहम्मद यूनुस को केयरटेकर प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. उनका मकसद देश में स्थिरता लाना और निष्पक्ष चुनाव कराना था. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित अर्थशास्त्री होने की वजह से उन्हें एक निष्पक्ष चेहरा माना गया. केयरटेकर प्रधानमंत्री के रूप में यूनुस ने प्रशासनिक सुधारों पर जोर दिया. उन्होंने कहा था कि बांग्लादेश को भ्रष्टाचार-मुक्त और जवाबदेह शासन की जरूरत है. हालांकि, उनके कार्यकाल में राजनीतिक दलों के बीच तनाव बना रहा और कई फैसलों को लेकर विवाद भी हुए। इसके बावजूद, चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता रही.
यूनुस अब क्या करेंगे?
पद छोड़ने के बाद यूनुस के राजनीति से पूरी तरह दूर जाने की संभावना जताई जा रही है. माना जा रहा है कि वो फिर से सामाजिक सुधार, शिक्षा और गरीबी उन्मूलन से जुड़े कामों पर ध्यान देंगे. यूनुस पहले ही साफ कर चुके हैं कि वो सत्ता की राजनीति में लंबे समय तक बने रहने के पक्ष में नहीं हैं. यूनुस के हटने के बाद अब चर्चा का केंद्र बन गए हैं तारिक रहमान. उन्हें बांग्लादेश की अगली राजनीतिक व्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाला नेता माना जा रहा है. उनके समर्थकों का कहना है कि अब देश को स्थायी और मजबूत सरकार की जरूरत है, जो केवल चुनाव से चुनी गई सरकार ही दे सकती है. अब बांग्लादेश के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना और आर्थिक हालात को मजबूत करना है. आने वाले महीने देश के भविष्य के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं.
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