कुर्द कौन हैं? जिनका इस्तेमाल कर ईरान को तोड़ने की फिराक में है अमेरिका

अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी रणनीति में कुर्द लड़ाकों का सहारा लेने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान की क्रांतिकारी गार्ड्स (IRGC) ने इन पर जोरदार हमले तेज कर दिए हैं. जानें कुर्द कौन हैं? जिनका इस्तेमाल कर ईरान को तोड़ने की फिराक में है अमेरिका

who is Kurdish
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मिडिल ईस्ट में ईरान ही नहीं कई अन्य देश कुर्दों को अलगाववादी समूह की तरह देखते हैं, जिनपर आरोप है कि यह देश की स्थिरता को नुकसान पहुंचा रहे हैं. कुर्द क्षेत्र लंबे समय से ईरान में प्रतिरोध का केंद्र रहे हैं और सरकार इन्हें विदेशी ताकतों का एजेंट बताकर निशाना बना रही है. ईरान को लगता है कि इजरायल की मोसाद कुर्द समूहों के जरिए ईरान के भीतर जासूसी कर रही है. अमेरिका इन समूहों को समर्थन देकर ईरान को अंदरूनी मोर्चे पर उलझाए रखना चाहता है. ऐसे में IRGC के हमले केवल कुर्दों पर नहीं, बल्कि अमेरिका और इजरायल के लिए एक सीधा संदेश हैं.

कुर्द कौन हैं? इनका इतिहास

कुर्द हजारों साल पुराना एक जातीय समुदाय है, जो तुर्की, इराक, सीरिया, ईरान और आर्मेनिया की सीमाओं पर फैले पहाड़ी इलाकों में रहता है. इनकी आबादी लगभग 3 करोड़ से 4.5 करोड़ के बीच बताई जाती है और इन्हें दुनिया का सबसे बड़ा राज्यविहीन जातीय समूह माना जाता है. कुर्द मेसोपोटामिया के मूल निवासी हैं. प्रथम विश्व युद्ध के बाद 1920 की सेवरस संधि में कुर्द राज्य का प्रस्ताव था, लेकिन लागू नहीं हुआ. कुर्दों का अपना अलग देश “कुर्दिस्तान” आज तक नहीं बन सका, जिसके लिए वे दशकों से संघर्ष कर रहे हैं. ईरान में कुर्द आबादी कुल जनसंख्या का लगभग 10 प्रतिशत है. अधिकांश कुर्द सुन्नी मुस्लिम हैं, लेकिन इनमें शिया, ईसाई और यजीदी अल्पसंख्यक भी शामिल हैं. इनकी संस्कृति काफी समृद्ध है, जिसमें संगीत, नृत्य और पारंपरिक पहनावे का बड़ा महत्व है.

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ईरान के साथ कुर्दों की दुश्मनी

1979 की इस्लामी क्रांति के बाद कुर्दों ने शुरू में समर्थन किया, लेकिन फारसी-शिया बहुल शासन ने उनकी स्वायत्तता, भाषा और सांस्कृतिक अधिकारों की मांगों को कुचल दिया. कुर्द विद्रोहों को भारी दमन का सामना करना पड़ा. कई नेता इराक भाग गए. 2004 में कुर्दिस्तान फ्री लाइफ पार्टी (PJAK) ने ईरान के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष शुरू किया, जो आज भी जारी है.

अमेरिका की रणनीति और कुर्दों का इस्तेमाल

अरब मुस्लिम जगत में आरोप लगता रहा है कि अमेरिका अपनी साम्राज्यवादी नीतियों के लिए कुर्दों का इस्तेमाल करता है –चाहे आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई हो या ईरान में विद्रोह भड़काना. हाल के संघर्ष में रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ईरान में जनविद्रोह हवा देने के लिए इराक स्थित ईरानी कुर्द मिलिशिया से संपर्क में है. हथियार, सैन्य सहयोग और पश्चिमी ईरान में हमलों की योजना पर बात चल रही है. ट्रंप प्रशासन के तहत यह चर्चा तेज हुई है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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