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दुनिया

‘अमेरिका के इशारों पर चलता है नाटो, लेकिन ब्रिक्स…’ रूस के विदेश मंत्री लावरोव का US पर हमला

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि ब्रिक्स देशों में फैसले आपसी सहमति से होते हैं, जबकि नाटो में अमेरिका की चलती है. उन्होंने पश्चिमी देशों पर दबाव की राजनीति करने का आरोप लगाया.

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Written By: Varsha Sikri Updated: Feb 12, 2026 12:46
Russia’s Lavrov Attacks America on NATO
Credit: News24

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पश्चिमी देशों और नाटो (NATO) पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि ब्रिक्स (BRICS) संगठन आपसी सहमति से फैसले लेता है, जबकि नाटो पूरी तरह अमेरिका के निर्देशों पर चलता है. लावरोव का ये बयान ऐसे समय आया है, जब दुनिया में पश्चिम और गैर-पश्चिमी देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक तनाव बढ़ता जा रहा है. लावरोव ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और इसी तरह के बाकी मंचों पर किसी एक देश का दबदबा नहीं होता. यहां सभी सदस्य देशों की राय को बराबर महत्व दिया जाता है और फैसले तभी लिए जाते हैं जब सभी देश सहमत हों. उन्होंने कहा कि यही वजह है कि इन संगठनों में भरोसा और सहयोग बना रहता है.

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‘NATO अमेरिका के हाथों की कठपुतली’

इसके उलट लावरोव ने नाटो को लेकर कड़ी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि नाटो में अमेरिका जो कहता है, बाकी देश वही मान लेते हैं. लावरोव के मुताबिक, कई बार यूरोपीय देश अपनी इच्छा के खिलाफ भी अमेरिका के फैसलों का समर्थन करने को मजबूर होते हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नाटो में चर्चा कम और आदेश ज्यादा होते हैं. रूसी विदेश मंत्री ने यूरोपीय संघ पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि यूरोप की कई सरकारें अपने लोगों के हितों से ज्यादा ब्रसेल्स और वॉशिंगटन के दबाव में फैसले लेती हैं. इससे लोकतंत्र कमजोर होता है और आम जनता को नुकसान उठाना पड़ता है.

‘ब्रिक्स किसी के खिलाफ नहीं’

लावरोव ने ये भी साफ किया कि ब्रिक्स किसी के खिलाफ नहीं है. इसका मकसद सिर्फ इतना है कि दुनिया में एक ऐसा मंच हो, जहां सभी देशों को बराबरी का सम्मान मिले और फैसले दबाव में नहीं, बल्कि बातचीत से हों. उन्होंने कहा कि आज कई देश पश्चिमी दबाव से परेशान हैं और इसलिए ब्रिक्स जैसे संगठनों की ओर देख रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि लावरोव का बयान बदलती वैश्विक राजनीति की ओर इशारा करता है, जहां कई देश अमेरिका और पश्चिम के प्रभुत्व से अलग एक संतुलित व्यवस्था चाहते हैं.

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First published on: Feb 12, 2026 12:45 PM

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