भारत में BRICS शिखर सम्मेलन जारी है, जहां रूस, चीन और ईरान के राष्ट्रपति सहित कई सहयोगी देशों के राष्ट्राध्यक्ष पहुंच हैं. शनिवार को ब्रिक्स बैठक में नई दिल्ली के डिक्लेरेशन में कई प्रस्तावों पर बिक्स देशों ने सहमति जाहिर की. ब्रिक्स सदस्य देश ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी भारत दौरे पर हैं, इस दौरान उन्होंने अमेरिका और इजरायल संग जारी युद्ध को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान झुकने वाला नहीं है. मसूद पेजेशकियान के इस बयान के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडिल ईस्ट युद्ध को लेकर बड़ा दावा किया है.
ईरान जंग को लेकर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि यह युद्ध नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिड-टर्म चुनाव के बाद खत्म हो सकता है. आयरलैंड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान जानबूझकर संघर्ष को चुनाव तक खींचने की कोशिश कर रहा है, जिससे अमेरिका में होने वाले चुनाव पर इसका असर डाला जा सके. ट्रंप ने कहा कि चुनाव के बाद हालात बदल सकते हैं और युद्ध समाप्त होने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है. ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल मचा दी है.
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युद्ध नहीं चाहता ईरान
वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने नई दिल्ली में BRICS सम्मेलन से इतर मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया की सुरक्षा को लेकर ईरान का रुख स्पष्ट किया. पेजेशकियन ने कहा कि पश्चिम एशिया को अमेरिका की ओर से किसी क्षेत्रीय पुलिसकर्मी की जरूरत नहीं है. उनके मुताबिक, क्षेत्र की सुरक्षा और देशों की सीमाओं की रक्षा की जिम्मेदारी इसी क्षेत्र के देशों और वहां की प्रमुख ताकतों की होनी चाहिए. ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता और न ही संघर्ष को आगे बढ़ाने की इच्छा रखता है.
100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल
मिडिल ईस्ट में जारी जंग का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है. इस सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई. लंबे समय तक संघर्ष जारी रहने पर तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव की आशंका बनी हुई है. हालांकि, जून में दोनों पक्षों के बीच एक समझौते की कोशिश हुई थी, लेकिन यह ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी इसके बाद बातचीत में कोई बड़ी प्रगति नहीं हुई.
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