भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले भारत में इसे लेकर सियासी बहस तेज हो गई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने हाल में हुए BRICS सम्मेलनों के परिणामों पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि उन्हें इस मंच से भारत को कोई ठोस फायदा नजर नहीं आया. उनके बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस की कूटनीति और विदेश नीति को लेकर सवाल खड़े किए हैं.

चिदंबरम ने कहा कि भारत BRICS के साथ-साथ शंघाई सहयोग संगठन (SCO), G20 और क्वाड जैसे कई बहुपक्षीय मंचों का हिस्सा है. इसके बावजूद यह देखना जरूरी है कि इन संगठनों में सक्रिय भागीदारी से देश को जमीन पर कितना फायदा मिल रहा है. उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों में उन्हें ऐसे ठोस नतीजे दिखाई नहीं दिए, जिन्हें भारत के लिए प्रत्यक्ष उपलब्धि कहा जा सके. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि पहले के BRICS सम्मेलनों से कुछ महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए थे.

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BJP ने भी किया पलटवार

पी. चिदंबरम की इस टिप्पणी पर BJP ने भी पलटवार किया है. पार्टी नेता नलिन कोहली ने कहा, 'पी. चिदंबरम और कांग्रेस पार्टी का बयान हैरान करने वाला है, खासकर ऐसे समय में जब भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम की मेजबानी कर रहा है. इस सम्मेलन में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख आएंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इन नेताओं के साथ सीधी बातचीत (वन-ऑन-वन ​​मीटिंग) भी होगी. कांग्रेस पार्टी का मकसद क्या है? क्या कूटनीति को सिर्फ लेन-देन के नजरिए से देखा जाना चाहिए, जैसा कि कांग्रेस पार्टी दिखा रही है?'

BJP ने यह भी सवाल उठाया कि क्या विदेश नीति को सिर्फ मिलने वाले फायदे के नजरिए से देखा जाना चाहिए? पार्टी ने चिदंबरम के बयान को BRICS जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आयोजन पर राजनीति करने की कोशिश बताया है.

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भारत करने जा रहा BRICS समिट की अध्यक्षता

दरअसल, भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में शिखर सम्मेलन आयोजित होना है. भारत ने 1 जनवरी 2026 को BRICS की अध्यक्षता संभाली थी. इस साल की अध्यक्षता के लिए 'Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability' थीम तय की गई है.

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कई देशों के राष्ट्रपति होंगे शामिल

BRICS में फिलहाल 11 देश शामिल हैं, जिनमें भारत, चीन, रूस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, ईरान, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं. समूह के सदस्य देश मिलकर दुनिया की करीब 49 प्रतिशत आबादी और लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं. ऐसे में भारत की मेजबानी में होने वाली बैठक को आर्थिक और रणनीतिक, दोनों नजरिए से अहम माना जा रहा है.

इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा समेत कई प्रमुख नेताओं के सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है.

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