Afghanistan Pakistan Peace Talk: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच आज दूसरे दौर की शांति वार्ता इस्तांबुल में होगी, जिसकी मेजबानी तुर्की सरकार के प्रतिनिधि करेंगे. वहीं तालिबान सरकार के उप गृह मंत्री हाजी नजीब इस्तांबुल जा रहे प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल की जानकारी सामने नहीं आई है. आज इस्तांबुल में होने वाली बैठक में स्थायी युद्धविराम और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी.
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क्यों छिड़ा है दोनों देशों में संघर्ष?
बता दें कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर तहरीक-ए-पाकिस्तान तालिबान आतंकी संगठन को पनाह देने का आरोप लगाया, जिसके चलते 10 अक्टूबर की रात को पाकिस्तान ने काबुल समेत कई शहरों में हवाई हमले किए. अफगानिस्तान ने भी पाकिस्तान पर ISIS आतंकियों और लड़ाकों को समर्थन देने का आरोप लगाया और जवाबी कार्रवाई की. करीब 5 दिन तक डूरंड लाइन पर दोनों देशों की सेनाओं में खूनी टकराव हुआ, जिसमें सैनिकों के साथ लोग भी मारे गए. दोनों देशों ने एक दूसरे की चौकियों पर कब्जा किया.
कतर और तुर्की कर रहे हैं मध्यस्थता
हवाई हमलों और फायरिंग में सबसे ज्यादा नुकसान पाकिस्तान के चमन और अफगानिस्तान के स्पिन बोल्डाक क्षेत्र में हुआ, जहां पाकिस्तान के हवाई हमले में अफगान क्रिकेटर्स भी मारे गए. इस बीच 15 अक्टूबर को कतर के दोहा में बातचीत के बाद दोनों देशों में 48 घंटे का अस्थायी युद्धविराम हुआ. 19 अक्टूबर को कतर और तुर्की की मध्यस्थता से स्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी. अफगान रक्षा मंत्री मुल्ला मुहम्मद याकूब और पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए.
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डूरंड लाइन पर क्यों छिड़ा है विवाद?
बता दें कि दोनों देशों के बीच संघर्ष 1893 में खींची गई डूरंड लाइन को लेकर है. पाकिस्तान इस सीमा को अपनी अंतर्राष्ट्रीय सीमा कहता है, लेकिन अफगानिस्तान को इस पर आपत्ति है. साल 2021 में तालिबान में काबुल पर कब्जा कर लिया तो बॉर्डर पर तनाव बढ़ गया, क्योंकि पाकिस्तान में TTP के आतंकियों ने दहशत फैला रखी है. पाकिस्तान के TTP आतंकियों के पनाह देने के दावे को अफगानिस्तान तालिबान ने खारिज किया. अफगानिस्तान के ISIS-K को समर्थन देने के आरोप को पाकिस्तान ने निराधार बताया.
संघर्ष और हिंसा से क्या पड़ा असर?
ताजा संघर्ष के बाद पाकिस्तान ने डूरंड लाइन को बंद करने के मकसद से बार्ड लगाने की कोशिश की तो सैनिकों और लोगों में हिंसक झड़पें हुईं. अब डूरंड लाइन बंद है तो अफगानिस्तान के ‘चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री’ के अनुसार व्यापारियों को रोजाना लाखों डॉलर का नुकसान हो रहा है. सीमा बंद होने से हजारों लोग प्रभावित हुए हैं और वे बेघर हो गए हैं. सीमा बंद होने से व्यापार मार्ग बंद हुआ, जिस वजह से दोनों देशों के व्यापार रुक गए हैं और व्यापारियों को आर्थिक हानि उठानी पड़ रही है.
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