इजरायल की राजनीति में उथल-पुथल जारी है और बेंजामिन नेतन्याहू का तगड़ा झटका लगा है. 19 साल बाद उनके हाथ से प्रधानमंत्री की कुर्सी फिसल रही है. क्योंकि 27 अक्टूबर 2026 को संसदीय चुनाव में गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन को 48 सीटें मिली और इजरायल में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का बहुमत चाहिए. अरब पार्टियों ने आइसेनकोट गठबंधन को 19 सीटों का समर्थन दे दिया है तो अब गठबंधन के पास बहुमत यानी 67 सीटें हैं. इसके आधार पर इजरायल के राष्ट्रपति आइजक हरजोग ने आइसेनकोट गठबंधन को सरकार बनाने का न्योता दिया है, जिसे स्वीकार भी कर लिया गया है. हालांकि नई सरकार का गठन कब तक होगा, क्लीयर नहीं हुआ है, लेकिन गादी आइसेनकोट का प्रधानमंत्री बनना तय हो गया है.
अरब पार्टियों ने किन शर्तों पर दिया समर्थन?
मिली जानकारी के अनुसार, आइसेनकोट गठबंधन को अरब पार्टियों ने शर्तों पर समर्थन दिया. एक शर्त यह है कि इजरायल को यहूदी राष्ट्र माना जाएगा और लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुसार देश को चलाया जाएगा. दूसरी शर्त यह है कि हमास को आतंकी संगठन माना जाए और उसकी सैन्य ताकत को खत्म किया जाएगा. तीसरी शर्त सेना में भर्ती के लिए नियम बदलेंगे. नागरिकों के अधिकारों के लिए तय आचार संहिता का पालन किया जाएगा. इन शर्तों पर सहमति बनने के बाद अरब पार्टियों के नेता राष्ट्रपति हरजोग के पास गए और उन्हें आइसेनकोट गठबंधन को समर्थन का लेटर सौंपा. अरब पार्टियों में हदाश, ताल, बलद हैं. वहीं राएम ने अरब पार्टियों के गठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़ा था. लेकिन अरब पार्टियों ने नेतन्याहू का युग खत्म कर दिया.
नेतन्याहू का 19 साल का सफर कैसा रहा?
बता दें कि बेंजामिन नेतन्याहू पहले साल 2009 से 2021 तक लगातार 12 साल इजरायल के प्रधानमंत्री रहे. साल 2021 में गठबंधन टूटने के बाद उन्हें प्रधानमंत्री पद की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी, लेकिन दिसंबर 2022 में वे फिर से प्रधानमंत् बन गए और तब से साल 2026 तक प्रधानमंत्री बने हुए हैं. हालांकि इस बार नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 27 सीटें मिली और लिकुड पार्टी के समर्थन वाले गठबंधन को 53 सीटें मिलीं, लेकिन गठबंधन को बहुमत नहीं मिला, जबकि 120 सीटों वाली नेसेट यानी संसद पर राज करने के लिए 61 सीटों का बहुमत चाहिए. गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन को 48 सीटें मिलीं और अरब पार्टियों ने 19 सीटों का समर्थन दिया. इस आधार पर ही राष्ट्रपति ने आइसेनकोट को सरकार बनाने का न्योता दिया.