पूर्व सेना चीफ, मोरक्को से फैमिली रिलेशन, कौन हैं इजरायल के 'अगले प्रधानमंत्री' गादी आइसेनकोट?

गादी आइसेनकोट इजरायल के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं, क्योंकि उनको 61 के मैजिक नंबर से ज्यादा सांसदों का समर्थन हासिल हो गया है. गादी का राजनेता बनने का सफर मुश्किलों भरा रहा है, लेकिन आज वो सत्ता के टॉप पर काबिज होने के करीब हैं.

Gadi Eisenkot @gadi_eisenkot

गादी आइसेनकोट (X/@gadi_eisenkot)

Who Is Gadi Eisenkot: इजरायल की राजनीति में एक अहम मोड़ आ गया है. राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने इजरायल डिफेंस फोर्सेज के पूर्व प्रमुख गादी आइसेनकोट को देश की अगली सरकार बनाने की कोशिश करने के लिए चुना है. य फैसला 27 अक्टूबर को हुए उस चुनाव के बाद आया है, जिसका कोई स्पष्ट नतीजा नहीं निकला था. इस कदम से प्रधानमंत्री के रूप में बेंजामिन नेतन्याहू का लंबा कार्यकाल खत्म हो सकता है. ‘याशर’ पार्टी के 66 साल के नेता को रविवार, 8 नवंबर 2028 को औपचारिक रूप से सरकार बनाने का जनादेश मिलेगा. उन्हें गठबंधन बनाने के लिए 28 दिन का समय दिया जाएगा, जिसे जरूरत पड़ने पर 14 दिन और बढ़ाया जा सकता है.

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चुनाव के आंकड़े एक बड़ी चुनौती हैं

120 सदस्यों वाली संसद (नेसेट) में आइसेनकोट के विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं, जबकि नेतन्याहू के खेमे को 53 सीटें हासिल हुई हैं. बाकी 19 सीटें अरब पार्टियों के पास हैं, जो सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं. संसदीय बहुमत के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है. हालांकि, विचार-विमर्श के दौरान 67 सांसदों को रिप्रेजेंट करने वाले गुटों ने आइसेनकोट के नाम का समर्थन किया था, लेकिन गठबंधन बनाने के लिए उनका समर्थन हासिल करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है.

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सैन्य कमांडर से राजनीतिक नेता तक का सफर

1960 में तिबेरियास में जन्मे आइसेनकोट के माता-पिता मोरक्को से आकर इजरायल में बसे थे. उन्होंने इजरायली सेना में लगभग 4 दशक बिताए. 1978 में वे गोलानी ब्रिगेड में शामिल हुए और 2015 में IDF के चीफ ऑफ स्टाफ बने, जिस पद पर वे 2019 तक रहे.

2022 में वे पूर्व सैन्य कमांडर बेनी गैंट्ज़ के साथ राजनीति में आए. 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद, आइसेनकोट एक ऑब्जर्वर के तौर पर नेतन्याहू की आपातकालीन युद्ध कैबिनेट में शामिल हुए. हालांकि जून 2024 में उन्होंने गैंट्ज़ के साथ इस्तीफा दे दिया. उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि युद्ध और बंधकों की बातचीत को लेकर सरकार के पास कोई साफ रणनीति नहीं है. इसके बाद उन्होंने ‘याशर’ पार्टी बनाई और नेतन्याहू के सामने एक प्रमुख चुनौती बनकर उभरे.

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छोटे बेटे और 2 भतीजों की मौत

गाजा युद्ध आइसेनकोट के लिए एक निजी त्रासदी लेकर आया. दिसंबर 2023 में सैन्य अभियानों के दौरान उनके सबसे छोटे बेटे, गैल की मौत हो गई. इस संघर्ष में उनके 2 भतीजों की भी जान चली गई. राजनीतिक रूप से, आइसेनकोट 7 अक्टूबर की सुरक्षा नाकामियों की जांच और सैन्य सेवा नियमों में बदलाव का समर्थन करते हैं. इन बदलावों में अति-रूढ़िवादी यहूदियों और अरब नागरिकों की ज्यादा भागीदारी शामिल है. फिलिस्तीनी मुद्दों पर, वो ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ का विरोध करते हैं और चाहते हैं कि गाजा में हमास को सत्ता से हटा दिया जाए. हालांकि उन्होंने कब्जे वाले वेस्ट बैंक को आधिकारिक तौर पर इजरायल में मिलाने का विरोध किया है.

क्या आइसेनकोट नेतन्याहू की जगह ले सकते हैं?

आइसेनकोट को गठबंधन बनाने के लिए मुश्किल बातचीत का सामना करना पड़ रहा है. इसमें शामिल पार्टियों के सुरक्षा और अरब सांसदों के साथ सहयोग को लेकर अलग-अलग विचार हैं. अगर वो तय समय के भीतर सरकार बनाने में नाकाम रहते हैं, तो किसी अन्य उम्मीदवार, शायद नेतन्याहू को मौका मिल सकता है. उनका चुना जाना एक अहम राजनीतिक घटना है, लेकिन उनके इजरायल का अगला प्रधानमंत्री बनने की कोई पक्की गारंटी नहीं है.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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