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खतरे में 1000000 लोगों की नौकरी, संकट में बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग, 1 फरवरी से सभी मिलों पर लगेगा ताला!

सरकार का कहना है कि सस्ते आयात से घरेलू मिलें तबाह हो रही हैं. गारमेंट निर्यातक भारत से कॉटन यार्न (78 प्रतिशत) और चीन से पॉलिएस्टर मंगा रहे हैं, जो स्थानीय उत्पाद से सस्ता और बेहतर है.

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बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले कपड़ा उद्योग पर अब गंभीर संकट के बादल छाने लगे हैं. हालात इतने बदतर हो गए हैं कि अगले महीने कई कारखानों पर ताला लगाने की नौबत आ गई है. बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (BTMA) ने घोषणा की कि अगर जनवरी अंत तक यार्न के ड्यूटी-फ्री आयात की सुविधा बहाल न हुई तो 1 फरवरी से देश की सभी स्पिनिंग यूनिटें उत्पादन बंद कर देंगी. राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड (NBR) ने वाणिज्य मंत्रालय की सिफारिश पर बॉन्डेड वेयरहाउस सिस्टम के तहत यह सुविधा निलंबित कर दी.

तबाह हो रही हैं घरेलू मिलें


सरकार का कहना है कि सस्ते आयात से घरेलू मिलें तबाह हो रही हैं. गारमेंट निर्यातक भारत से कॉटन यार्न (78 प्रतिशत) और चीन से पॉलिएस्टर मंगा रहे हैं, जो स्थानीय उत्पाद से सस्ता और बेहतर है. 2025 में 70 करोड़ किलो यार्न आयात पर 2 अरब डॉलर खर्च हुए. पिछले 3-4 माह के गैस संकट ने हालात बिगाड़ दिए. अनियमित आपूर्ति, ऊंची कीमतों से उत्पादन क्षमता 50 प्रतिशत गिर गई. उद्योग को 2 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है, वहीं मिल मालिकों को सब्सिडी और आर्थिक पैकेज का इंतजार है.

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खतरे में 10 लाख नौकरियां


BTMA चेयरमैन सलीम रहमान ने कहा, ‘भारतीय यार्न से बाजार डंप हो गया. 12,000 करोड़ टका का स्टॉक पड़ा है. 50 से ज्यादा मिलें बंद, हजारों बेरोजगार.’ एसोसिएशन की मांगें स्पष्ट हैं कि 10-30 काउंट कॉटन यार्न पर ड्यूटी-फ्री आयात समाप्त, गैस पर सब्सिडी व नियमित आपूर्ति, VAT में छूट, बैंक ऋणों पर ब्याज राहत, सरकार से संवाद. इस कदम से 10 लाख नौकरियां खतरे में हैं. अंतरिम सरकार को चेतावनी दी गई, लेकिन VAT राहत नहीं मिली.

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कपड़ा उद्योग पर निर्भर 40 लाख कर्मचारी


मिलर्स और बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) के बीच विवाद तेज. मिलर्स दावा करते हैं कि घरेलू क्षमता मांग पूरी कर सकती है. भारत के यार्न निर्यातक अमित सोती ने कहा, ‘बॉन्डेड सुविधा हटने से बांग्लादेशी गारमेंट्स प्रभावित होंगे.’ गौरतलब है कि कपड़ा क्षेत्र बांग्लादेश अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, 80 प्रतिशत निर्यात और 40 लाख रोजगार इसी क्षेत्र से लोगों को मिलता है. गैस संकट, आयात निर्भरता और नीतिगत अनिश्चितता ने इसे कमजोर किया. अगर 1 फरवरी को मिलों पर ताले लगे तो आर्थिक मंदी और सामाजिक अशांति बढ़ सकती है.

First published on: Jan 25, 2026 11:37 PM

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About the Author

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला ने India.com (ZEE Media), 'नवोदय टाइम्स' (पंजाब केसरी ग्रुप), 'ओपेरा न्यूज' और 'वनइंडिया' (डेली हंट) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करके अपनी व्यापक पत्रकारिता क्षमता का परिचय दिया। उनकी विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी अनुभव है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

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आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला ने India.com (ZEE Media), 'नवोदय टाइम्स' (पंजाब केसरी ग्रुप), 'ओपेरा न्यूज' और 'वनइंडिया' (डेली हंट) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करके अपनी व्यापक पत्रकारिता क्षमता का परिचय दिया। उनकी विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी अनुभव है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

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