Parliament News : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण के कई हिस्सों को हटा दिया गया है। इसे लेकर विपक्ष में आक्रोश है। कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियां राहुल के पूरे भाषण को संसद की कार्यवाही में शामिल करने की मांग कर रही हैं। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर कौन सा नियम है जिसके तहत राहुल गांधी के भाषण के हिस्से को हटाने का फैसला किया गया। दरअसल, लोकसभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन के नियमों के तहत नियम 380 के अनुसार अगर अध्यक्ष का मानना है कि बहस के दौरान ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है जो अशोभनीय या अपमानजनक या असंसदीय हैं तो अध्यक्ष अपने विवेक से ऐसे शब्दों को सदन की कार्यवाही से निकालने का आदेश दे सकता है। इस प्रक्रिया को एक्सपंक्शन कहते हैं।
अगर सत्ताधारी पार्टी ऐतराज जताते हुए स्पीकर का ध्यान इस पर लाती है तो भी स्पीकर यह कदम उठा सकता है। हालांकि, संविधान के अनुच्छेद 105 के खंड 2 के अनुसार किसी भी सदन में कही गई बात पर कोर्ट में कार्यवाही नहीं हो सकती है। सांसद को केवल उसकी या विपक्षी पार्टी लताड़ लगा सकती है। कारण बताओ नोटिस जारी किया जा सकता है। उचित कारण न मिलने पर नेता के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। बता दें कि भाषण के हिस्से को हटाए गए हिस्से को वापस लाने के लिए नेता स्पीकर से अनुरोध कर सकता है और अपना पक्ष रख सकता है कि क्यों वह हिस्सा असंसदीय नहीं था। हालांकि, इस तरह के मामले में अदालती रुख नहीं अपनाया जा सकता। पूरे मामले को विस्तार से समझने के लिए देखिए ये खास वीडियो स्टोरी।