Gaurav Pandey
लिखने-पढ़ने का शौक है। राजनीति में दूर-दूर से रुचि है। अखबार की दुनिया के बाद अब डिजिटल के मैदान में हूं। आठ साल से ज्यादा समय से देश-विदेश की खबरें लिख रहा हूं। दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे संस्थानों में सेवाएं दी हैं।
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उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के कूरेभार इलाके में जूते-चप्पलों की मरम्मत का काम करने वाले मोची चेतनाम का नाम इस समय हर ओर छाया हुआ है। राहुल गांधी का उनकी दुकान में पहुंचना और वहां बैठकर अपने हाथों से चप्पल सिलना, चेतराम की किस्मत बदल गया है। बता दें कि राहुल ने अपने हाथ से जो चप्पल सिली थी, कई लोग उसे खरीदना चाहते हैं। एक शख्स तो उस चप्पल के लिए चेतराम को 10 लाख रुपये देने की पेशकश भी कर चुका है। हालांकि, चेतराम ने ऐसे किसी भी ऑफर को स्वीकार करने से मना किया है। इस बीच न्यूज24 की टीम पहुंची मोची चेतराम के पास और उनसे बातचीत की।
रामचेत की दुकान अब एक तरह से यहां का सेंटर ऑफ अट्रैक्शन बन गई है। बड़ी संख्या में लोग यहां सेल्फी लेने के लिए पहुंच रहे हैं। आम आदमी तो आम आदमी नेता-कारोबारी भी उनसे मिलने आ रहे हैं। राहुल गांधी ने जो चप्पल सिली थी वह उन्होंने अभी भी अपने पास रखी है। वह इसे सुरक्षित रखने के लिए शीशे का फ्रेम भी बनवाने की तैयारी कर रहे हैं। इसे लेकर न्यूज24 से बात करते हुए रामचेत ने कहा कि इस चप्पल के लिए कई ऑफर आ रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि ये चप्पल हमें दे दो हम भर-भर कर पैसा देंगे। लेकिन रामचेत इस स्पेशल चप्पल को किसी भी कीमत पर किसी को देने के लिए तैयार नहीं हैं।
जिस शख्स की यह चप्पल थी यानी जो व्यक्ति चप्पल मरम्मत के लिए रामचेत की दुकान पर छोड़ गया था अब रामचेत उसे उसकी ही चप्पल नहीं दे रहे हैं। उनका कहना है कि मैं चप्पल की कीमत देने के लिए तैयार हूं। हम साढ़े तीन घंटे गुम रहे, सामान ढूंढकर लाए और अजनबी जगह बैठकर 2 जोड़ी जूते तैयार किए। रामचेत कहते हैं कि अब प्रशासन के लोग मेरी झोपड़ी देखते हैं, मेरी समस्याएं सुनते हैं। कभी हमने प्रधान से कॉलोनी के लिए कहा था लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद मैंने कहना ही बंद कर दिया। लेकिन अब स्थिति बहुत बदल गई है। अब प्रधान से लेकर प्रशासन तक सब लोग पूछने आ रहे हैं।
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