मुख्य बिंदु
- अहम रेलवे कॉरिडोर पर 2,490 रूट किलोमीटर में 'कवच 4.0' शुरू किया गया.
- 11,253 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर और 1,668 टेलीकॉम टावर लगाए गए.
- ये सिस्टम तेज रफ्तार और टक्कर को रोकने के लिए अपने-आप ब्रेक लगाता है.
- बड़े रेलवे नेटवर्क के 24,427 रूट किलोमीटर पर काम चल रहा है.
- जून 2026 तक 'कवच' को लागू करने पर 3,874.90 करोड़ रुपये खर्च किए गए.
Indian Railways Expands Kavach 4.0 Safety System: भारतीय रेलवे ने दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे ज्यादा ट्रैफिक वाले रेलवे कॉरिडोर पर 2,490 रूट किलोमीटर में अपने स्वदेशी 'कवच 4.0' ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम को लागू करके इसका दायरा काफी बढ़ा दिया है. ये नया कदम देश के सबसे बिजी रेल रूटों पर रेलवे सुरक्षा को बेहतर बनाने और दुर्घटनाओं को रोकने की दिशा में एक और अहम पहल है.
ऑप्टिकल फाइबर से होगी मदद
इस एडवांस्ड सेफ्टी नेटवर्क को सपोर्ट करने के लिए, भारतीय रेलवे ने बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का काम पूरा किया है. इसमें 11,253 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल, 1,668 टेलीकॉम टावर और 958 स्टेशन डेटा सेंटर लगाना शामिल है. ये सुविधाएं ट्रेनों, स्टेशनों और सिग्नलिंग इक्विपमेंट के बीच लगातार कम्युनिकेशन को मुमकिन बनाती हैं, जिससे 'कवच' सिस्टम ठीक से काम कर पाता है.
क्या है ये सिस्टम?
'कवच 4.0' भारत में विकसित एक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन टेक्नोलॉजी है. इसे ट्रेन की स्पीड पर नजर रखने और जब भी लोकोमोटिव पायलट वॉर्निंग सिग्नल पर रिएक्शन न दे, तो अपने-आप ब्रेक लगाने के लिए डिजाइन किया गया है. ये सिस्टम ये एनश्योर करने में मदद करता है कि ट्रेनें तय स्पीड लिमिट के अंदर चलें, जिससे टक्कर और तेज स्पीड से जुड़ी घटनाओं का खतरा कम हो जाता है.
यह भी करें- अब रेलवे की बेडशीट में AI कैमरा खोजेगा दाग-धब्बे, इन 3 डिवीजन में पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च
खराब मौसम में भी करेगा काम
इस टेक्नोलॉजी का एक और अहम फायदा खराब मौसम, खासकर घने कोहरे और कम विजिबिलिटी के दौरान ट्रेन ऑपरेशन को बेहतर बनाने की क्षमता है. इस सिस्टम को 'सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4' (SIL-4) सर्टिफिकेशन मिला है, जो रेलवे सिग्नलिंग सिस्टम के लिए इंटरनेशनल लेवल पर मान्यता प्राप्त सबसे हाई सेफ्टी स्टैंडर्ड है.
यह भी पढ़ें- भारत में 3,215 रेलवे स्टेशन पर CCTV कैमरे लगाने का ऐलान, 13409 कोच की सिक्योरिटी भी होगी टाइट
इतने रूट्स पर हो चुका है काम
रेलवे मंत्रालय ने बताया कि ट्रैक के किनारे 'कवच' इक्विपमेंट पहले ही 7,721 रूट किलोमीटर पर लगाए जा चुके हैं, जबकि गोल्डन क्वाड्रिलैटरल, गोल्डन डायगोनल और दूसरे हाई-डेंसिटी नेटवर्क सेक्शन को कवर करते हुए 24,427 रूट किलोमीटर पर इसे लागू करने का काम चल रहा है. साथ ही, मंत्रालय 7,435 लोकोमोटिव और 1,200 EMU/MEMU ट्रेन सेट को 'कवच' टेक्नोलॉजी से लैस कर रहा है.
कितने रेलवे कर्मचारियों की हुई ट्रेनिंग?
इसे आसानी से लागू करने के लिए, 94,000 से ज्यादा रेलवे कर्मचारियों ने 'कवच' की खास ट्रेनिंग ली है. इसमें तकरीबन 57,000 लोकोमोटिव पायलट और असिस्टेंट लोकोमोटिव पायलट के साथ-साथ इंजीनियर, टेक्नीशियन और सिस्टम के रखरखाव और ऑपरेशन के लिए जिम्मेदार ऑपरेशन स्टाफ शामिल हैं.
यह भी पढ़ें- क्या ट्रेन के ऊपर सोलर पैनल लगाने से डिब्बे को मिल सकती है बिजली? जानिए इस तकनीक की क्या हैं चुनौतियां
कितना होता है खर्च?
सरकार का अनुमान है कि 'कवच' ट्रैकसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर लगाने में प्रति किलोमीटर तकरीबन 50 लाख रुपये का खर्च आता है, जबकि एक लोकोमोटिव को इससे लैस करने में लगभग 80 लाख रुपये का इंवेस्टमेंट करना पड़ता है. जून 2026 तक, भारतीय रेलवे ने इसे पूरे देश में लागू करने पर 3,874.90 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जो एडवांस्ड स्वदेशी तकनीक के जरिए रेलवे सुरक्षा को बेहतर बनाने के प्रति उसकी लॉन्ग टर्म कमिटमेंट को दिखाता है.
निष्कर्ष
'कवच 4.0' का एक्सपैंशन एक सेफ रेल नेटवर्क के लिए एडवांस्ड सेफ्टी तकनीकों को अपनाने पर भारतीय रेलवे के मजबूत फोकस को दिखाता है. मेजर कॉरिडोर पर बड़े पैमाने पर इसे लगाने, मॉडर्न कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टाफ की एक्सटेंसिव ट्रेनिंग के साथ, इस सिस्टम से ऑपरेशनल रिस्क कम होने और ट्रेन सुरक्षा बेहतर होने की उम्मीद है. जैसे-जैसे ज्यादा रूट और लोकोमोटिव पर इसे लागू किया जाएगा, 'कवच' भारत के रेलवे मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम के सबसे अहम हिस्सों में से एक बन जाएगा, जिससे पैसेंजर्स का भरोसा और ऑपरेशनल रिलायबिलिटी बढ़ेगी.
मुख्य बिंदु
- अहम रेलवे कॉरिडोर पर 2,490 रूट किलोमीटर में ‘कवच 4.0’ शुरू किया गया.
- 11,253 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर और 1,668 टेलीकॉम टावर लगाए गए.
- ये सिस्टम तेज रफ्तार और टक्कर को रोकने के लिए अपने-आप ब्रेक लगाता है.
- बड़े रेलवे नेटवर्क के 24,427 रूट किलोमीटर पर काम चल रहा है.
- जून 2026 तक ‘कवच’ को लागू करने पर 3,874.90 करोड़ रुपये खर्च किए गए.
Indian Railways Expands Kavach 4.0 Safety System: भारतीय रेलवे ने दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे ज्यादा ट्रैफिक वाले रेलवे कॉरिडोर पर 2,490 रूट किलोमीटर में अपने स्वदेशी ‘कवच 4.0’ ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम को लागू करके इसका दायरा काफी बढ़ा दिया है. ये नया कदम देश के सबसे बिजी रेल रूटों पर रेलवे सुरक्षा को बेहतर बनाने और दुर्घटनाओं को रोकने की दिशा में एक और अहम पहल है.
ऑप्टिकल फाइबर से होगी मदद
इस एडवांस्ड सेफ्टी नेटवर्क को सपोर्ट करने के लिए, भारतीय रेलवे ने बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का काम पूरा किया है. इसमें 11,253 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल, 1,668 टेलीकॉम टावर और 958 स्टेशन डेटा सेंटर लगाना शामिल है. ये सुविधाएं ट्रेनों, स्टेशनों और सिग्नलिंग इक्विपमेंट के बीच लगातार कम्युनिकेशन को मुमकिन बनाती हैं, जिससे ‘कवच’ सिस्टम ठीक से काम कर पाता है.
क्या है ये सिस्टम?
‘कवच 4.0’ भारत में विकसित एक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन टेक्नोलॉजी है. इसे ट्रेन की स्पीड पर नजर रखने और जब भी लोकोमोटिव पायलट वॉर्निंग सिग्नल पर रिएक्शन न दे, तो अपने-आप ब्रेक लगाने के लिए डिजाइन किया गया है. ये सिस्टम ये एनश्योर करने में मदद करता है कि ट्रेनें तय स्पीड लिमिट के अंदर चलें, जिससे टक्कर और तेज स्पीड से जुड़ी घटनाओं का खतरा कम हो जाता है.
यह भी करें- अब रेलवे की बेडशीट में AI कैमरा खोजेगा दाग-धब्बे, इन 3 डिवीजन में पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च
खराब मौसम में भी करेगा काम
इस टेक्नोलॉजी का एक और अहम फायदा खराब मौसम, खासकर घने कोहरे और कम विजिबिलिटी के दौरान ट्रेन ऑपरेशन को बेहतर बनाने की क्षमता है. इस सिस्टम को ‘सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4’ (SIL-4) सर्टिफिकेशन मिला है, जो रेलवे सिग्नलिंग सिस्टम के लिए इंटरनेशनल लेवल पर मान्यता प्राप्त सबसे हाई सेफ्टी स्टैंडर्ड है.
यह भी पढ़ें- भारत में 3,215 रेलवे स्टेशन पर CCTV कैमरे लगाने का ऐलान, 13409 कोच की सिक्योरिटी भी होगी टाइट
इतने रूट्स पर हो चुका है काम
रेलवे मंत्रालय ने बताया कि ट्रैक के किनारे ‘कवच’ इक्विपमेंट पहले ही 7,721 रूट किलोमीटर पर लगाए जा चुके हैं, जबकि गोल्डन क्वाड्रिलैटरल, गोल्डन डायगोनल और दूसरे हाई-डेंसिटी नेटवर्क सेक्शन को कवर करते हुए 24,427 रूट किलोमीटर पर इसे लागू करने का काम चल रहा है. साथ ही, मंत्रालय 7,435 लोकोमोटिव और 1,200 EMU/MEMU ट्रेन सेट को ‘कवच’ टेक्नोलॉजी से लैस कर रहा है.
कितने रेलवे कर्मचारियों की हुई ट्रेनिंग?
इसे आसानी से लागू करने के लिए, 94,000 से ज्यादा रेलवे कर्मचारियों ने ‘कवच’ की खास ट्रेनिंग ली है. इसमें तकरीबन 57,000 लोकोमोटिव पायलट और असिस्टेंट लोकोमोटिव पायलट के साथ-साथ इंजीनियर, टेक्नीशियन और सिस्टम के रखरखाव और ऑपरेशन के लिए जिम्मेदार ऑपरेशन स्टाफ शामिल हैं.
यह भी पढ़ें- क्या ट्रेन के ऊपर सोलर पैनल लगाने से डिब्बे को मिल सकती है बिजली? जानिए इस तकनीक की क्या हैं चुनौतियां
कितना होता है खर्च?
सरकार का अनुमान है कि ‘कवच’ ट्रैकसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर लगाने में प्रति किलोमीटर तकरीबन 50 लाख रुपये का खर्च आता है, जबकि एक लोकोमोटिव को इससे लैस करने में लगभग 80 लाख रुपये का इंवेस्टमेंट करना पड़ता है. जून 2026 तक, भारतीय रेलवे ने इसे पूरे देश में लागू करने पर 3,874.90 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जो एडवांस्ड स्वदेशी तकनीक के जरिए रेलवे सुरक्षा को बेहतर बनाने के प्रति उसकी लॉन्ग टर्म कमिटमेंट को दिखाता है.
निष्कर्ष
‘कवच 4.0’ का एक्सपैंशन एक सेफ रेल नेटवर्क के लिए एडवांस्ड सेफ्टी तकनीकों को अपनाने पर भारतीय रेलवे के मजबूत फोकस को दिखाता है. मेजर कॉरिडोर पर बड़े पैमाने पर इसे लगाने, मॉडर्न कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टाफ की एक्सटेंसिव ट्रेनिंग के साथ, इस सिस्टम से ऑपरेशनल रिस्क कम होने और ट्रेन सुरक्षा बेहतर होने की उम्मीद है. जैसे-जैसे ज्यादा रूट और लोकोमोटिव पर इसे लागू किया जाएगा, ‘कवच’ भारत के रेलवे मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम के सबसे अहम हिस्सों में से एक बन जाएगा, जिससे पैसेंजर्स का भरोसा और ऑपरेशनल रिलायबिलिटी बढ़ेगी.