Written By: Shariqul Hoda|Updated: Jul 29, 2026 19:11
Edited By : Shariqul Hoda|Updated: Jul 29, 2026 19:11
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ITR Deadline (AI Image)
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What Will Happen If You Miss ITR Deadline: जिन टैक्सपेयर्स ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) अभी तक फाइल नहीं किया है, उन्हें जल्द हरकत में आ जाना चाहिए, क्योंकि ज्यादातर सैलरी पाने वाले लोगों के लिए डेडलाइन 31 जुलाई 2026 है. जिन लोगों की इनकम बिजनेस या प्रोफेशन से होती है, उनके लिए डेडलाइन अलग हो सकती है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि उनके अकाउंट्स का ऑडिट जरूरी है या नहीं.
किन लोगों को ITR फाइल करना जरूरी?
अगर आपकी टैक्सेबल इनकम बेसिक छूट सीमा से ज्यादा है, तो ITR फाइल करना जरूरी है. नई टैक्स रिजीम के तहत, 4 लाख रुपये तक की इनकम पर छूट है, जबकि पुरानी व्यवस्था में ये सीमा 2.5 लाख रुपये है. कुछ मामलों में, इन सीमाओं से कम इनकम होने पर भी फाइलिंग जरूरी होती है, जैसे कि कुछ खास फाइनेंशियल क्राइटेरिया को पूरा करने वाले लोगों के लिए, जिसमें ज्यादा बिजली बिल या विदेश यात्रा का बड़ा खर्च शामिल है.
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डेडलाइन मिस करने पर लेट फाइन
अगर 31 जुलाई की डेडलाइन छूट जाती है, तो भी टैक्सपेयर्स 31 दिसंबर, 2026 तक ‘बिलेटेड रिटर्न’ (देरी से भरा गया रिटर्न) जमा कर सकते हैं. हालांकि इसके लिए 5,000 रुपये तक की लेट फाइलिंग फीस लग सकती है, या 5 लाख रुपये तक की इनकम वाले लोगों के लिए ये फीस 1,000 रुपये हो सकती है. ओरिजिनल डेडलाइन से पेमेंट होने तक बकाया टैक्स पर हर महीने 1% के हिसाब से ब्याज भी लग सकता है.
कितना लेट फाइन देना होगा?
असेसमेंट ईयर की खत्म होने से
बकाया टैक्स और ब्याज पर एडिशनल इनकम टैक्स
12 महीने तक
25%
12 महीने के बाद, लेकिन 24 महीने से पहले
50%
24 महीने के बाद, लेकिन 36 महीने से पहले
60%
36 महीने के बाद, लेकिन 48 महीने से पहले
70%
होगा ऐसा नुकसान
देर से फाइलिंग करने पर टैक्स से जुड़े जरूरी फायदे भी खो सकते हैं. कुछ नुकसान (हाउस प्रॉपर्टी से होने वाले नुकसान को छोड़कर) को आगे नहीं ले जाया जा सकता है, और टैक्सपेयर्स पुरानी और नई टैक्स रिजीम के बीच चुनने का ऑप्शन भी खो सकते हैं क्योंकि देरी से भरे गए रिटर्न आमतौर पर नए सिस्मत के तहत प्रोसेस किए जाते हैं.
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एडिशनल टैक्स कब देना पड़ेगा?
फाइनेंस एक्ट 2026 टैक्सपेयर्स को लागू फीस का भुगतान करने के बाद 31 मार्च 2027 तक ओरिजिनल या बिलेटेड रिटर्न को रिवाइज करने की इजाजत देता है. जो लोग फिर भी फाइल नहीं कर पाते हैं, वो तय समय के अंदर देरी के आधार पर एडिशनल टैक्स का भुगतान करके ‘अपडेटेड रिटर्न’ (ITR-U) जमा कर सकते हैं.
IT डिपार्टमेंट का नोटिस
कानूनी रूप से जरूरी होने पर आईटीआर फाइल न करने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस मिल सकता है, टीडीएस रिफंड का नुकसान हो सकता है, री-असेसमेंट की प्रोसीडिंग हो सकती है, ‘बेस्ट जजमेंट असेसमेंट’ हो सकता है, और जानबूझकर नियमों का पालन न करने के मामलों में जुर्माना और जेल की सजा भी हो सकती है. फॉरेन एसेट्स रखने वाले रेजिडेंट्स को भी रिटर्न फाइल करना होगा, भले ही उनकी कोई टैक्सेबल इनकम न हो, वरना उन्हें ‘ब्लैक मनी एक्ट’ के तहत कड़े जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है.