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पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में काउंटिंग से पहले सियासी घमासान, बीजेपी की 2 मई को अहम बैठक

पश्चिम बंगाल में मतगणना से पहले सियासी माहौल गरम है. बीजेपी ने 2 मई को कोलकाता में अहम बैठक बुलाई है, जबकि तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच ईवीएम सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ गया है.

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Written By: Kumar Gaurav Updated: May 1, 2026 20:10

पश्चिम बंगाल में मतगणना से पहले सियासी तापमान उबाल पर है. स्ट्रॉन्ग रूम अब सिर्फ सुरक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि सियासी शक, रणनीति और सतर्कता का नया रणक्षेत्र बन चुका है. बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस—दोनों जीत को लेकर आश्वस्त भी हैं और आशंकित भी. हाल ये है कि ईवीएम से ज्यादा निगरानी अब एक-दूसरे पर रखी जा रही है.

4 मई को होने वाली मतगणना से पहले बीजेपी पूरी तरह एक्शन मोड में है. 2 मई को कोलकाता में पार्टी की एक अहम रणनीतिक बैठक बुलाई गई है. इस हाई-लेवल बैठक में केंद्रीय नेतृत्व की ओर से सुनील बंसल और भूपेंद्र यादव शामिल होंगे.

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बैठक का एजेंडा साफ है-काउंटिंग डे पर कोई चूक नहीं, कोई ढील नहीं. बूथ स्तर से लेकर मतगणना केंद्रों तक हर व्यवस्था की बारीकी से समीक्षा होगी. कौन कहां तैनात रहेगा, किसकी क्या जिम्मेदारी होगी और हर राउंड पर कैसे नजर रखी जाएगी—इस पर अंतिम रणनीति तैयार की जाएगी. क्योंकि बंगाल में जीत सिर्फ सीटों से नहीं, सतर्कता से भी तय होती है.

लेकिन काउंटिंग से पहले बंगाल में सियासी बवाल भी अपने चरम पर है. बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस, दोनों एक-दूसरे पर स्ट्रॉन्ग रूम में ईवीएम से छेड़छाड़ की आशंका जता रहे हैं. यानी भरोसा चुनाव आयोग पर है, लेकिन नजर विपक्ष पर.

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बीजेपी का आरोप है कि सुरक्षा में कहीं कोई ढिलाई न हो. वहीं टीएमसी ने अपने कार्यकर्ताओं को स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर चौबीसों घंटे डटे रहने का निर्देश दिया है. ममता बनर्जी ने भी साफ संदेश दिया है—जब तक आखिरी वोट की गिनती न हो जाए, चौकसी कम नहीं होनी चाहिए.

दरअसल, मुकाबला इतना करीबी है कि यहां हर राउंड दिल की धड़कन बढ़ाएगा. टीएमसी को अपनी योजनाओं पर भरोसा है, तो बीजेपी को बदलाव की लहर पर. और दोनों दलों को सबसे ज्यादा भरोसा… अपने-अपने एजेंटों की जागती आंखों पर है.

ऐसे में 4 मई की मतगणना सिर्फ वोटों की गिनती नहीं होगी, बल्कि दावों, आरोपों और रणनीतियों की भी असली परीक्षा होगी. हर राउंड पर नजर होगी, हर टेबल पर निगरानी होगी और हर आंकड़े पर सियासी गणित लगाया जाएगा.

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बंगाल में इस वक्त हालत कुछ ऐसी है—नतीजे अभी आए नहीं हैं, लेकिन सियासी धड़कनें पहले ही तेज हो चुकी हैं. अब देखना यह है कि जनता का जनादेश किसके सिर ताज सजाता है और किसकी उम्मीदों का गणित बिगाड़ता है.

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First published on: May 01, 2026 07:41 PM

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