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Watch: ममता बनर्जी के भतीजे पर हुआ हमला, अंडे-जूते फेके… फाड़े कपड़े; क्या अभिषेक पर फूटा आम आदमी का गुस्सा?

टीएमसी ने आगे कहा कि हिंसा, धमकी और राजनीतिक गुंडागर्दी भाजपा शासन की पहचान बन चुकी है. आज जो लोग राजनीतिक संरक्षण का आनंद ले रहे हैं, वे हमेशा के लिए जवाबदेही से नहीं बच सकते. बंगाल देख रहा है. भारत देख रहा है. पूरी दुनिया देख रही है.

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पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा और राजनीतिक तनाव का नया अध्याय शुरू हो गया है. टीएमसी सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर शनिवार शाम सोनारपुर के कमराबाद इलाके में हमला कर दिया गया. प्रदर्शनकारियों ने उन पर कच्चे अंडे फेंके, जूते चलाए और उनके कपड़े फाड़ दिए. सुरक्षा बलों ने तुरंत हेलमेट पहनाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला.

कब हुआ हमला?


घटना तब हुई जब अभिषेक बनर्जी अपनी पार्टी के एक मृतक कार्यकर्ता के घर पहुंचे थे. करीब साढ़े चार बजे वह बाइक पर इलाके में प्रवेश कर रहे थे, तभी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने उन्हें रोक लिया. भीड़ में महिलाएं भी शामिल थीं, जिन्होंने अंडे फेंके. नारेबाजी के बीच कुछ लोगों ने उनकी गाड़ी के पास दो मोटरसाइकिलें भी उलट दीं. अफरा-तफरी का माहौल बन गया.

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स्थानीय लोगों का गुस्सा


स्थानीय निवासियों ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया. उनका कहना था कि पिछले 15 साल से इस इलाके में कोई विकास नहीं हुआ है. सड़कें खस्ताहाल हैं, बारिश में पानी भर जाता है और पीने का साफ पानी तक उपलब्ध नहीं है. एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया, ‘हमारे माता-पिता बूढ़े हैं, बेटा विकलांग है, लेकिन किसी नेता ने कभी हमारी सुध नहीं ली.’ कई लोगों ने आरोप लगाया कि जबकि आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है, उधर अभिषेक बनर्जी ने अपने लिए 17 घर बना लिए हैं. यही गुस्सा इस हमले के रूप में सामने आया.

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अभिषेक ने हमले को लेकर क्या कहा?


अभिषेक बनर्जी खुद पर हुए हमले को लेकर कहा, ‘वे मुझे मारना चाहते थे. पूरी घटना कैमरे में कैद है. हम इसकी जानकारी निश्चित रूप से हाई कोर्ट को देंगे. हम गवर्नर को भी इसकी जानकारी देंगे. मैं निश्चित रूप से कोर्ट जाऊंगा, यह सब भाजपा द्वारा प्रायोजित है. देखिए उन्होंने मेरा क्या हाल किया है. यही उनका लोकतंत्र है. अभी एक महीना भी नहीं हुआ है और पुलिस कहीं नजर नहीं आ रही है. किसी तरह मेरा सिर बच गया, सौभाग्य से मैं हेलमेट पहने हुए था. उन्होंने मेरे कपड़े फाड़ दिए और चश्मा तोड़ दिया.’

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उन्होंने आगे कहा, ‘घटना स्थल पर पुलिस की कोई मौजूदगी नहीं है. वे हमें मारना चाहते हैं, मार दें. यहां से मेरी लाश ही बरामद हो, लेकिन मैं इस इलाके को नहीं छोडूंगा. अतिरिक्त बल पहुंचने तक मैं संजू के बूढ़े माता-पिता को इस हालत में अकेला नहीं छोडूंगा. मैं एक बार फिर अपने प्रतिनिधियों से कहूंगा कि वे पुलिस से संपर्क करें.’

TMC ने बीजेपी पर साधा निशाना


इस मामले पर टीएमसी की तरफ से जारी बयान में कहा गया, ‘आज हमारे राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले ने एक बार फिर याद दिला दिया है कि इस बेशर्म सरकार में कानून-व्यवस्था कितनी तेजी से बिगड़ चुकी है. अगर एक निर्वाचित विपक्षी सांसद पर दिन-दहाड़े हमला किया जा सकता है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की क्या उम्मीद की जा सकती है? क्या यही भाजपा का लोकतंत्र है? क्या यही ‘अच्छा शासन’ है जिसका दावा प्रधानमंत्री मोदी लगातार करते रहते हैं?

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टीएमसी ने आगे कहा कि हिंसा, धमकी और राजनीतिक गुंडागर्दी भाजपा शासन की पहचान बन चुकी है. आज जो लोग राजनीतिक संरक्षण का आनंद ले रहे हैं, वे हमेशा के लिए जवाबदेही से नहीं बच सकते. बंगाल देख रहा है. भारत देख रहा है. पूरी दुनिया देख रही है.

First published on: May 30, 2026 06:19 PM

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About the Author

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला की विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी ज्ञान है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

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आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला की विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी ज्ञान है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

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