ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी स्थापना के बाद से अब तक की सबसे बड़ी बगावत का सामना कर रही है. पहले बंगाल में विधायकों ने ममता बनर्जी से बगावत की. इसके बाद सांसदों ने भी बगावत का बिगुल फूंक दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीएमसी के 20 सांसदों ने पार्टी से बगावत कर दी है. इन बागी सांसदों का नेतृत्व काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं. अब इन सांसदों में नया नाम जुड़ा है टीएमसी की मुखर सांसद सयानी घोष. सयानी घोष को मुखर वक्ता, विपक्ष पर तीखे हमला करने वाली सांसद के तौर पर जाना जाता है. इसके अलावा उनकी गिनती ममता बनर्जी के करीबियों में भी होती है.
अगर सयानी घोष बागी सांसदों के साथ जाती हैं तो यह ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका साबित होगा. हालांकि, सयानी घोष ने इस मामले को लेकर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से सयानी घोष के बागी सांसदों के साथ जाने की बात कही है.
बता दें, काकोली घोष के नेतृत्व में टीएमसी के 20 सांसदों ने सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को पत्र लिखकर कहा था कि वे एनडीए का समर्थन करते हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सयानी ने काकोली घोष से संपर्क किया है और वे भी बागियों के खेमे में जाना चाहती हैं. सूत्रों के मुताबिक, सयानी अभी कोलकाता में नहीं हैं, उनके दिल्ली में होने की संभावना जताई जा रही है, जहां बागी सांसदों ने ढेरा डाला हुआ है. इनके अलावा ममता बनर्जी की एक और करीबी सांसद माला रॉय भी दिल्ली आकर बागियों में शामिल हो गईं.
सयानी घोष का बागियों के खेमें में शामिल होना टीएमसी के लिए एक बड़ा झटका है. क्योंकि वह ममता बनर्जी की सबसे मुखर समर्थकों में से एक रही हैं. उन्हें पार्टी की यूथ विंग का चीफ भी बनाया गया था. हाल ही हुए विधानसभा चुनाव से उन्होंने ममता बनर्जी को भविष्य का प्रधानमंत्री भी बताया था. सयानी के बागियों के साथ जाने की खबर इसलिए चौंका रही है, क्योंकि वह लगातार एनडीए पर निशाना साधती रही हैं. वह हमेशा भाजपा की राजनीति की आलोचना करती रही हैं. उन्होंने हाल ही महिला आरक्षण बिल का पुरजोर विरोध किया था. उनके निशाने पर चुनाव आयोग भी रहा है और उन्होंने भाजपा के खिलाफ वोट चोरी का भी आरोप लगाया था.
विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद सयानी ने दावा किया था कि ममता बनर्जी 'वोट चोरी' की वजह से हारी हैं और पार्टी चुनाव नहीं हारी है. उन्होंने कहा था, 'हम हारे नहीं हैं, लेकिन ममता बनर्जी वोटों की चोरी और लूट की वजह से हार गई हैं. साल 2029 में बंगाल के लोग और पूरे देश के लोग और साल 2031 में पश्चिम बंगाल के लोग करारा जवाब देंगे.'
सयानी ने साल 2021 में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी में शामिल होकर सियासत शुरू की थीं. सियासत से पहले वे बंगाल की प्रसिद्ध अभिनेत्री और गायक भी रही हैं. साउथ प्वाइंट हाई स्कूल से स्कूलिंग पूरी करने के बाद उन्होंने कोलकाता यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया. 2021 में टीएमसी में शामिल होने के बाद उन्होंने आसनसोल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत दर्ज नहीं कर पाईं. इसके बाद साल 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने जाधवपुर सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. ममता बनर्जी की करीबी सयानी का स्टाइल भी ममता बनर्जी से मिलता जुलता है. वह ममता बनर्जी की तरह ही साड़ी पहनती हैं और कई बार उन्हें सभाओं में चप्पल पहने हुए भी देखा गया है. जिस तरह सादगी से ममता बनर्जी रहती हैं, वैसा ही स्टाइल अपनाने की कोशिश सयानी घोष करती हैं.
ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी स्थापना के बाद से अब तक की सबसे बड़ी बगावत का सामना कर रही है. पहले बंगाल में विधायकों ने ममता बनर्जी से बगावत की. इसके बाद सांसदों ने भी बगावत का बिगुल फूंक दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीएमसी के 20 सांसदों ने पार्टी से बगावत कर दी है. इन बागी सांसदों का नेतृत्व काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं. अब इन सांसदों में नया नाम जुड़ा है टीएमसी की मुखर सांसद सयानी घोष. सयानी घोष को मुखर वक्ता, विपक्ष पर तीखे हमला करने वाली सांसद के तौर पर जाना जाता है. इसके अलावा उनकी गिनती ममता बनर्जी के करीबियों में भी होती है.
अगर सयानी घोष बागी सांसदों के साथ जाती हैं तो यह ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका साबित होगा. हालांकि, सयानी घोष ने इस मामले को लेकर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से सयानी घोष के बागी सांसदों के साथ जाने की बात कही है.
बता दें, काकोली घोष के नेतृत्व में टीएमसी के 20 सांसदों ने सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को पत्र लिखकर कहा था कि वे एनडीए का समर्थन करते हैं.
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, सयानी ने काकोली घोष से संपर्क किया है और वे भी बागियों के खेमे में जाना चाहती हैं. सूत्रों के मुताबिक, सयानी अभी कोलकाता में नहीं हैं, उनके दिल्ली में होने की संभावना जताई जा रही है, जहां बागी सांसदों ने ढेरा डाला हुआ है. इनके अलावा ममता बनर्जी की एक और करीबी सांसद माला रॉय भी दिल्ली आकर बागियों में शामिल हो गईं.
सयानी घोष का बागियों के खेमें में शामिल होना टीएमसी के लिए एक बड़ा झटका है. क्योंकि वह ममता बनर्जी की सबसे मुखर समर्थकों में से एक रही हैं. उन्हें पार्टी की यूथ विंग का चीफ भी बनाया गया था. हाल ही हुए विधानसभा चुनाव से उन्होंने ममता बनर्जी को भविष्य का प्रधानमंत्री भी बताया था. सयानी के बागियों के साथ जाने की खबर इसलिए चौंका रही है, क्योंकि वह लगातार एनडीए पर निशाना साधती रही हैं. वह हमेशा भाजपा की राजनीति की आलोचना करती रही हैं. उन्होंने हाल ही महिला आरक्षण बिल का पुरजोर विरोध किया था. उनके निशाने पर चुनाव आयोग भी रहा है और उन्होंने भाजपा के खिलाफ वोट चोरी का भी आरोप लगाया था.
विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद सयानी ने दावा किया था कि ममता बनर्जी ‘वोट चोरी’ की वजह से हारी हैं और पार्टी चुनाव नहीं हारी है. उन्होंने कहा था, ‘हम हारे नहीं हैं, लेकिन ममता बनर्जी वोटों की चोरी और लूट की वजह से हार गई हैं. साल 2029 में बंगाल के लोग और पूरे देश के लोग और साल 2031 में पश्चिम बंगाल के लोग करारा जवाब देंगे.’
सयानी ने साल 2021 में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी में शामिल होकर सियासत शुरू की थीं. सियासत से पहले वे बंगाल की प्रसिद्ध अभिनेत्री और गायक भी रही हैं. साउथ प्वाइंट हाई स्कूल से स्कूलिंग पूरी करने के बाद उन्होंने कोलकाता यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया. 2021 में टीएमसी में शामिल होने के बाद उन्होंने आसनसोल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत दर्ज नहीं कर पाईं. इसके बाद साल 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने जाधवपुर सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. ममता बनर्जी की करीबी सयानी का स्टाइल भी ममता बनर्जी से मिलता जुलता है. वह ममता बनर्जी की तरह ही साड़ी पहनती हैं और कई बार उन्हें सभाओं में चप्पल पहने हुए भी देखा गया है. जिस तरह सादगी से ममता बनर्जी रहती हैं, वैसा ही स्टाइल अपनाने की कोशिश सयानी घोष करती हैं.