TMC बागियों का बढ़ता कुनबा! क्या ममता की बेहद करीबी सयानी भी हो गईं बागी? जानिए- क्यों हो रही उनकी चर्चा

सयानी घोष का बागियों के खेमें में शामिल होना टीएमसी के लिए एक बड़ा झटका है. क्योंकि वह ममता बनर्जी की सबसे मुखर समर्थकों में से एक रही हैं.

Saayoni Ghosh

ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी स्थापना के बाद से अब तक की सबसे बड़ी बगावत का सामना कर रही है. पहले बंगाल में विधायकों ने ममता बनर्जी से बगावत की. इसके बाद सांसदों ने भी बगावत का बिगुल फूंक दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीएमसी के 20 सांसदों ने पार्टी से बगावत कर दी है. इन बागी सांसदों का नेतृत्व काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं. अब इन सांसदों में नया नाम जुड़ा है टीएमसी की मुखर सांसद सयानी घोष. सयानी घोष को मुखर वक्ता, विपक्ष पर तीखे हमला करने वाली सांसद के तौर पर जाना जाता है. इसके अलावा उनकी गिनती ममता बनर्जी के करीबियों में भी होती है.

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अगर सयानी घोष बागी सांसदों के साथ जाती हैं तो यह ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका साबित होगा. हालांकि, सयानी घोष ने इस मामले को लेकर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से सयानी घोष के बागी सांसदों के साथ जाने की बात कही है.

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बता दें, काकोली घोष के नेतृत्व में टीएमसी के 20 सांसदों ने सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को पत्र लिखकर कहा था कि वे एनडीए का समर्थन करते हैं.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, सयानी ने काकोली घोष से संपर्क किया है और वे भी बागियों के खेमे में जाना चाहती हैं. सूत्रों के मुताबिक, सयानी अभी कोलकाता में नहीं हैं, उनके दिल्ली में होने की संभावना जताई जा रही है, जहां बागी सांसदों ने ढेरा डाला हुआ है. इनके अलावा ममता बनर्जी की एक और करीबी सांसद माला रॉय भी दिल्ली आकर बागियों में शामिल हो गईं.

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सयानी का जाना कितना बड़ा झटका?

सयानी घोष का बागियों के खेमें में शामिल होना टीएमसी के लिए एक बड़ा झटका है. क्योंकि वह ममता बनर्जी की सबसे मुखर समर्थकों में से एक रही हैं. उन्हें पार्टी की यूथ विंग का चीफ भी बनाया गया था. हाल ही हुए विधानसभा चुनाव से उन्होंने ममता बनर्जी को भविष्य का प्रधानमंत्री भी बताया था. सयानी के बागियों के साथ जाने की खबर इसलिए चौंका रही है, क्योंकि वह लगातार एनडीए पर निशाना साधती रही हैं. वह हमेशा भाजपा की राजनीति की आलोचना करती रही हैं. उन्होंने हाल ही महिला आरक्षण बिल का पुरजोर विरोध किया था. उनके निशाने पर चुनाव आयोग भी रहा है और उन्होंने भाजपा के खिलाफ वोट चोरी का भी आरोप लगाया था.

विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद सयानी ने दावा किया था कि ममता बनर्जी ‘वोट चोरी’ की वजह से हारी हैं और पार्टी चुनाव नहीं हारी है. उन्होंने कहा था, ‘हम हारे नहीं हैं, लेकिन ममता बनर्जी वोटों की चोरी और लूट की वजह से हार गई हैं. साल 2029 में बंगाल के लोग और पूरे देश के लोग और साल 2031 में पश्चिम बंगाल के लोग करारा जवाब देंगे.’

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कौन हैं सयानी घोष?

सयानी ने साल 2021 में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी में शामिल होकर सियासत शुरू की थीं. सियासत से पहले वे बंगाल की प्रसिद्ध अभिनेत्री और गायक भी रही हैं. साउथ प्वाइंट हाई स्कूल से स्कूलिंग पूरी करने के बाद उन्होंने कोलकाता यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया. 2021 में टीएमसी में शामिल होने के बाद उन्होंने आसनसोल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत दर्ज नहीं कर पाईं. इसके बाद साल 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने जाधवपुर सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. ममता बनर्जी की करीबी सयानी का स्टाइल भी ममता बनर्जी से मिलता जुलता है. वह ममता बनर्जी की तरह ही साड़ी पहनती हैं और कई बार उन्हें सभाओं में चप्पल पहने हुए भी देखा गया है. जिस तरह सादगी से ममता बनर्जी रहती हैं, वैसा ही स्टाइल अपनाने की कोशिश सयानी घोष करती हैं.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

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आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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