मालदा में गंगा का कहर, 175 साल पुराना शिव मंदिर नदी में समाया; 62 गांव जलमग्न; देखें VIDEO
पश्चिम बंगाल के मालदा में गंगा नदी में तेज कटाव और बाढ़ का कहर देखने को मिल रहा है. बाढ़ के कारण 175 साल पुराना शिव मंदिर भी बह गया. रतुआ के मुनीरामटोला में ऐतिहासिक मंदिर नदी में समा गया, जबकि भूतनी द्वीप के 62 गांव जलमग्न हैं और हजारों लोग राहत शिविरों में पहुंचाए जा रहे हैं.
Edited By : Versha Singh|Updated: Sep 11, 2026 12:48
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मालदा जिले में गंगा के बढ़ते जलस्तर और तेज नदी कटाव के कारण सालों पुराना शिव मंदिर नदी में समा गया. (फोटो- X)
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पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में गंगा के बढ़ते जलस्तर और तेज नदी कटाव ने तबाही मचा दी है. मिली जानकारी के अनुसार, रतुआ इलाके के मुनीरामटोला में करीब 175 साल पुराना शिव मंदिर रविवार को गंगा की तेज धारा में समा गया. लंबे समय से यह ऐतिहासिक मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की सामाजिक पहचान का भी अहम हिस्सा था.
स्थानीय लोगों के मुताबिक, मंदिर पिछले साल से ही खतरे में था. इसे बचाने के लिए अस्थायी स्तर पर सुरक्षा उपाय भी किए गए थे, लेकिन बीते दिनों नदी में तेज बहाव और पानी का स्तर बढ़ने के साथ हालात तेजी से बिगड़ गए. शनिवार को मंदिर के आस-पास नदी का बड़ा हिस्सा कटकर बह गया. इसके बाद रविवार शाम गंगा की धारा ने मंदिर को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया.
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पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के रतुआ क्षेत्र में गंगा नदी के भीषण कटाव के कारण एक ऐतिहासिक शिव मंदिर नदी में समा गया. मंदिर सैकड़ों साल पुराना था. फरक्का से लगभग 12,00,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है,जिससे इस क्षेत्र में जलस्तर बढ़ता चला गया. गंगा की लगभग सभी प्रमुख सहायक नदियाँ एक… pic.twitter.com/3EMxNjd4oO
स्थानीय शिक्षक आलोक मंडल ने बताया कि उनके बचपन के समय गंगा नदी मंदिर से करीब 15 किलोमीटर दूर थी. मंदिर के आस-पास साप्ताहिक बाजार लगता था, जहां आस-पास के इलाकों के अलावा बिहार से भी लोग पहुंचते थे. ऐसे में मंदिर का नदी में बह जाना स्थानीय समुदाय के लिए केवल एक धार्मिक स्थल के खत्म होने की घटना नहीं, बल्कि सालों पुरानी यादों के मिटने जैसा है.
6.5 करोड़ रुपये का तटबंध टूटा
क्षतिग्रस्त तटबंध का निर्माण 2025 में लगभग 6.5 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था. इसके टूटने पर स्थानीय विधायक गौर मंडल ने आलोचना की है. उन्होंने खराब निर्माण को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और बुनियादी ढांचे की इस विफलता के लिए पिछली TMC सरकार पर आरोप लगाए.
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इसके अलावा, जन शिक्षा विस्तार और पुस्तकालय सेवाओं के प्रभारी मंत्री गौरी शंकर घोष ने राहत कार्यों का जायजा लिया और भूतनी क्षेत्र का दौरा किया. घोष ने कहा, ‘बेघर हुए लोगों के लिए दो राहत केंद्र बनाए गए हैं और तटबंध के बचे हुए हिस्सों पर शरण लेने वालों को खाना दिया जा रहा है.’ उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान नया तटबंध बनाना मुमकिन नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद एक नई योजना तैयार की जाएगी.
बुठनी द्वीप सबसे ज्यादा प्रभावित
माणिकचक ब्लॉक के तहत आने वाले बुठनी द्वीप पर भी बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है. तीन पंचायतों के कम से कम 62 गांव जलमग्न हो गए हैं और स्थानीय पुलिस स्टेशन भी प्रभावित हुआ है. बाढ़ के कारण द्वीप का एकमात्र स्थानीय अस्पताल भी बंद करना पड़ा है. अब प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं पंचायत कार्यालय से दी जा रही हैं. एहतियात के तौर पर बुठनी की गर्भवती महिलाओं को माणिकचक के दो स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया है.
बताया गया है कि 2 सितंबर की रात तटबंध टूटने के बाद भूतनी में पानी तेजी से फैल गया. जिस तटबंध का निर्माण 2025 में करीब 6.5 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था, उसके क्षतिग्रस्त होने पर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं. प्रशासन की ओर से फिलहाल लोगों के लिए राहत और बचाव कार्य किया जा रहा है. बाढ़ के बीच नए तटबंध का निर्माण संभव नहीं है और पानी उतरने के बाद नई योजना तैयार करने की बात सामने आई है.
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रतुआ में 1,725 लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है. वहीं, इंग्लिश बाजार के खस्कोल इलाके में नदी कटाव से जमीन और आम के बागों को नुकसान पहुंचा है, जिसके बाद 63 परिवारों ने स्कूल में शरण ली है.