Add News24 as a Preferred Source Add news 24 as a Preferred Source

---विज्ञापन---

पश्चिम बंगाल

खामेनेई की मौत पर बंगाल में मातम, रमजान और ईद पर नहीं मनाई जाएगी खुशी, 40 दिन के शोक का ऐलान

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पश्चिम बंगाल में रह रहे ईरानी समुदाय में गहरा शोक है. समुदाय के लोगों ने रमजान और ईद की खुशियां ना मनाने और घरों पर काला झंडा लगाकर 40 दिनों तक शोक मनाने का फैसला किया है. पढ़िए अमर देव पासवान की ये खास रिपोर्ट

Author
Edited By : Varsha Sikri Updated: Mar 9, 2026 23:54
Ali Khamenei
Credit: Social Media

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को लेकर बंगाल में रह रहे ईरानी समुदाय के बीच शोक का माहौल है. समुदाय के लोगों ने रमजान और ईद की खुशियां न मनाने का फैसला लिया है और अपने-अपने घरों के सामने काला झंडा लगाकर 40 दिनों तक शोक मनाने की घोषणा की है. दरअसल, 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले में उनकी मौत हो गई थी, जिसकी पुष्टि ईरानी सरकार ने 1 मार्च को की. इसके बाद मोजतबा खामेनेई को ईरान का अगला सर्वोच्च नेता बनाया गया है. लेकिन बंगाल में सैकड़ों सालों से रह रहे ईरानी समुदाय के लोग अभी भी अली खामेनेई के मौत के गम से उभर नहीं पाए हैं.

ये भी पढ़ें: ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई कितने अमीर? लंदन से दुबई तक अरबों की प्रॉपर्टी के मालिक

---विज्ञापन---

‘मुगल काल के दौरान भारत आए थे’

आसनसोल के पांडेश्वर, मुर्शिदाबाद, पुरुलिया जिले के आद्रा और हुगली समेत कई इलाकों में रहने वाले ईरानी समुदाय के लोग अपने घरों के बाहर काला झंडा लगाकर शोक व्यक्त कर रहे हैं. पांडेश्वर की ईरानी बस्ती में रहने वाले 70 वर्षीय रुस्तम अली खान बताते हैं कि उनका जन्म बंगाल में ही हुआ है. उनके मुताबिक, मुगल काल के दौरान उनके पूर्वज ईरान से भारत आए थे. आज उनके परिवार के लोग बंगाल के अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड समेत कई राज्यों में रहते हैं. उन्होंने बताया कि उनके समुदाय के लोगों का मुख्य पेशा पत्थर की अंगूठियां, चश्मा, मसाले, चूड़ियां और श्रृंगार के सामान का व्यापार रहा है, जो आज भी जारी है.

‘ईरान सरकार ने दी जमीन’

रुस्तम अली खान के मुताबिक, जिस जगह पर वो लोग रह रहे हैं, वो जमीन उनके पूर्वजों को ईरान सरकार की ओर से रहने के लिए दी गई थी. यहां मदरसे और मस्जिद के साथ-साथ रहने के लिए घर भी बनाए गए थे. उन्होंने बताया कि अब उनके पास आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड सहित सभी भारतीय दस्तावेज मौजूद हैं. साथ ही वे केंद्र और राज्य सरकार की अलग-अलग योजनाओं का लाभ भी उठा रहे हैं. रुस्तम अली खान कहते हैं कि वो खुद को “भारतीय ईरानी” के रूप में पहचान देते हैं और इस पर उन्हें गर्व है.

---विज्ञापन---

ये भी पढ़ें: क्यों एक-दूसरे के खून के प्यासे हैं सऊदी अरब और ईरान? जानिए दुश्मनी की असली वजह

First published on: Mar 09, 2026 11:46 PM

संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.