पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और पार्टी में भगदड़ मची हुई है. पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाइक ने आज राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. प्रकाश चिक बड़ाइक से पहले टीएमसी के दो और कद्दावर राज्यसभा सांसद- सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव भी संसद के उच्च सदन से इस्तीफा दे चुके हैं. एक के बाद एक हुए इन तीन बड़े इस्तीफों के बाद राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की ताकत काफी कम हो गई है. आज बड़ाइक के इस्तीफे के बाद अब उच्च सदन में टीएमसी के सांसदों की संख्या घटकर केवल 10 रह गई है.
नहीं कम हो रहा ममता दीदी के लिए संकट
बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद ममता बनर्जी का सियासी संकट खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है. टीएमसी विधायक से लेकर सांसद तक एक-एक कर सब ममता बनर्जी का साथ छोड़ते जा रहे हैं. अब हालत यह है कि सयानी घोष से लेकर युसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे बड़े सितारे भी बागियों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं.
19 बागी सांसदों के नाम आए सामने
बता दें कि टीएमसी के 19 बागी सांसदों के नाम सामने आ गए हैं, जो काकोली घोष दस्तीदार के अगुवाई में अलग गुट बनाने का फैसला किया है. इस फेहरिश्त में उन सभी नेताओं के नाम है, जिन्हें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि बंगाल में ममता के पास कितनी ताकत बची है?
टीएमसी के बड़े सितारे छोड़ गए ममता का साथ
बंगाल की सियासत में ममता बनर्जी ने एक जनवरी 1198 को कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था. इसके बाद 13 साल तक ममता बनर्जी ने संघर्ष कर साढे तीन दशक से सत्ता पर काबिज लेफ्ट को उखाड़ फेका था. ममता के इस सियासी संघर्ष के रहे तमाम टीएमसी नेता धीरे-धीरे साथ छोड़ गए. अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी कई नए चेहरों को सियासत में लाए और सियासी पहचान दी, लेकिन सत्ता बदलते ही उनके मोहभंग हो गए.
यह भी पढ़ें- TMC में BJP ने कैसे लगाई सेंध? 14 मई को लिखी गई टूट की स्क्रिप्ट; जानें- बगावत के लिए क्यों चुना 8 जून
इन नामों को ममता ने दी थी सियासी पहचान
काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई वाले बागी गुट में शत्रुघ्न सिन्हा, जगदीश चंद्र बसुनिया, खलीउर रहमान, यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान, पार्थ भौमिक, बापी हलधर, सायोनी घोष, माला रॉय, मिताली बाग, दीपक अधिकारी, कालीपद सोरेन, जून मालिया, अरूप चक्रवर्ती, शर्मिला सरकार, असित कुमार मल्ल, शताब्दी रॉय और रचना बनर्जी शामिल हैं. ये ऐसे नाम हैं, जिनकी राजनीति को ममता बनर्जी ने सियासी पहचान दी.
ममता बनर्जी के पास कितने सांसद बचे हैं?
2024 के लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी ने राज्य की कुल 42 लोकसभा सीटों में से 29 सीटों पर जीत हासिल की थी. बीजेपी 12 और कांग्रेस को 1 सीट मिली थी, चुनावों के बाद टीएमसी के बशीरहाट से ससद हाजी नुरुल इस्लाम की मौत हो गई थी. टीएमसी के पास 28 लोकसभा सांसद बचे, जिसमें से 19 सांसद बागी हो गए हैं. इसके बाद ममता बनर्जी के पास अब सिर्फ 9 लोकसभा सांसद ही बचे हैं.
ममता बनर्जी के पास बचे टीएमसी लोकसभा सांसदों में फिलहाल कीर्ति आजाद, अभिषेक बनर्जी, सौगात राय, प्रसून बनर्जी, प्रतिमा मोंडल, सुदीप बंधोपाध्याय, महुआ मोइत्रा, कल्याण बनर्जी और सजदा अहमद हैं. टीएमसी के 13 राज्यसभा सांसद हैं, जिसमें दो सांसदों ने इस्तीफा दिया है. सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव ने राज्यसभा सदस्यता के साथ-साथ टीएमसी से भी इस्तीफा दे दिया है. इन दोनों के अब बीजेपी से राज्यसभा जाने की चर्चा. इस तरह 11 राज्यसभा सांसद बच रहे हैं, लेकिन उनसे में से भी कितने सांसद ममता के साथ रहेंगे, ये कहना मुश्किल है.
पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और पार्टी में भगदड़ मची हुई है. पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाइक ने आज राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. प्रकाश चिक बड़ाइक से पहले टीएमसी के दो और कद्दावर राज्यसभा सांसद- सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव भी संसद के उच्च सदन से इस्तीफा दे चुके हैं. एक के बाद एक हुए इन तीन बड़े इस्तीफों के बाद राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की ताकत काफी कम हो गई है. आज बड़ाइक के इस्तीफे के बाद अब उच्च सदन में टीएमसी के सांसदों की संख्या घटकर केवल 10 रह गई है.
नहीं कम हो रहा ममता दीदी के लिए संकट
बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद ममता बनर्जी का सियासी संकट खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है. टीएमसी विधायक से लेकर सांसद तक एक-एक कर सब ममता बनर्जी का साथ छोड़ते जा रहे हैं. अब हालत यह है कि सयानी घोष से लेकर युसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे बड़े सितारे भी बागियों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं.
19 बागी सांसदों के नाम आए सामने
बता दें कि टीएमसी के 19 बागी सांसदों के नाम सामने आ गए हैं, जो काकोली घोष दस्तीदार के अगुवाई में अलग गुट बनाने का फैसला किया है. इस फेहरिश्त में उन सभी नेताओं के नाम है, जिन्हें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि बंगाल में ममता के पास कितनी ताकत बची है?
टीएमसी के बड़े सितारे छोड़ गए ममता का साथ
बंगाल की सियासत में ममता बनर्जी ने एक जनवरी 1198 को कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था. इसके बाद 13 साल तक ममता बनर्जी ने संघर्ष कर साढे तीन दशक से सत्ता पर काबिज लेफ्ट को उखाड़ फेका था. ममता के इस सियासी संघर्ष के रहे तमाम टीएमसी नेता धीरे-धीरे साथ छोड़ गए. अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी कई नए चेहरों को सियासत में लाए और सियासी पहचान दी, लेकिन सत्ता बदलते ही उनके मोहभंग हो गए.
यह भी पढ़ें- TMC में BJP ने कैसे लगाई सेंध? 14 मई को लिखी गई टूट की स्क्रिप्ट; जानें- बगावत के लिए क्यों चुना 8 जून
इन नामों को ममता ने दी थी सियासी पहचान
काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई वाले बागी गुट में शत्रुघ्न सिन्हा, जगदीश चंद्र बसुनिया, खलीउर रहमान, यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान, पार्थ भौमिक, बापी हलधर, सायोनी घोष, माला रॉय, मिताली बाग, दीपक अधिकारी, कालीपद सोरेन, जून मालिया, अरूप चक्रवर्ती, शर्मिला सरकार, असित कुमार मल्ल, शताब्दी रॉय और रचना बनर्जी शामिल हैं. ये ऐसे नाम हैं, जिनकी राजनीति को ममता बनर्जी ने सियासी पहचान दी.
ममता बनर्जी के पास कितने सांसद बचे हैं?
2024 के लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी ने राज्य की कुल 42 लोकसभा सीटों में से 29 सीटों पर जीत हासिल की थी. बीजेपी 12 और कांग्रेस को 1 सीट मिली थी, चुनावों के बाद टीएमसी के बशीरहाट से ससद हाजी नुरुल इस्लाम की मौत हो गई थी. टीएमसी के पास 28 लोकसभा सांसद बचे, जिसमें से 19 सांसद बागी हो गए हैं. इसके बाद ममता बनर्जी के पास अब सिर्फ 9 लोकसभा सांसद ही बचे हैं.
ममता बनर्जी के पास बचे टीएमसी लोकसभा सांसदों में फिलहाल कीर्ति आजाद, अभिषेक बनर्जी, सौगात राय, प्रसून बनर्जी, प्रतिमा मोंडल, सुदीप बंधोपाध्याय, महुआ मोइत्रा, कल्याण बनर्जी और सजदा अहमद हैं. टीएमसी के 13 राज्यसभा सांसद हैं, जिसमें दो सांसदों ने इस्तीफा दिया है. सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव ने राज्यसभा सदस्यता के साथ-साथ टीएमसी से भी इस्तीफा दे दिया है. इन दोनों के अब बीजेपी से राज्यसभा जाने की चर्चा. इस तरह 11 राज्यसभा सांसद बच रहे हैं, लेकिन उनसे में से भी कितने सांसद ममता के साथ रहेंगे, ये कहना मुश्किल है.